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Balrampur News: नदी में समा रही जमीन, उजड़ रहे सपने

Tue, 12 Aug 2025 10:47 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Aug 2025 10:47 PM IST
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Land is getting submerged in the river, dreams are getting destroyed
बलरामपुर के टेंगनाहिया गांव के पास कटान कर रही राप्ती नदी।-संवाद
गैड़ास बुजुर्ग/महराजगंज तराई/बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर भले ही खतरे के निशान से नीचे आ गया हो, लेकिन इससे गांवों की मुसीबत बढ़ गई है। बाढ़ घटते ही तीनों तहसीलों के करीब 20 गांवों में कटान और तेज हो गई है। लहलहाती फसलों से भरे खेत पानी में समा रहे हैं। कई जगह किसानों के पास बोआई तो होती है, पर फसल कटाई तक नहीं पहुंच पाती या तो नदी निगल लेती है।
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गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के जिगना घाट गांव में पिछले दो साल से हालात बेहद खराब हैं। अब्दुल लतीफ, भगौती प्रसाद, देश दीपक पांडेय और हारुन रशीद जैसे किसानों की जमीन 2024 की कटान में सिद्धार्थनगर जिले में चली गई। गांव में चकबंदी की प्रक्रिया दस साल बाद पूरी हुई थी, लेकिन सीमा बदलने से विवाद और बढ़ गया। खेत तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे खेती के सहारे जी रहे थे, लेकिन अब पूरे खेत बाढ़ और कटान की चपेट में आ गए हैं। इससे भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है।
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सदर तहसील के गंगाबक्श भागड़, साहिबनगर, मानकोट टेंगनहिया और जबदहा जैसे गांवों में किसानों की जमीन राप्ती निगल चुकी है। टेंगनहिया के मोबीन का 15 बीघा, जबदहा के देवकुमार का 10 बीघा और बुढ़ऊ यादव समेत कई किसानों की 100 बीघा जमीन अब सिर्फ यादों में बची है। किठूरा में शहरबानों की चार बीघा जमीन भी नदी में समा चुकी है। तुलसीपुर के महरी, मलदा, मिश्रौलिया और साखीरेत गांव हों या उतरौला तहसील के चिचुड़ी सहंगिया, बारम, नंदौरी और महुआधनी, सभी जगह बाढ़ उतरने के बाद कटान की रफ्तार बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसलें मिट्टी के साथ बह रही हैं।
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नदी किनारे टिन शेड बना नया आशियाना
जिगना घाट गांव के मोहम्मद नईम का पक्का घर कटान में बह गया। अब उन्होंने नदी से आधा किलोमीटर दूर टिन का छोटा शेड डालकर परिवार को उसमें समेट दिया है। उतरौला तहसील के महुआधनी गांव की कलावती देवी अपना चूल्हा अब खुले आकाश तले जलाती हैं। पहले आंगन में पक्का चूल्हा था, लेकिन कटान में घर बह जाने के बाद वह पड़ोसी की खाली पड़ी ज़मीन पर ईंटों का छोटा घेरा बनाकर खाना पकाती हैं।
स्कूल का सपना दूर, दोपहर का खाना भी उधार
तुलसीपुर के मिश्रौलिया गांव की आठ साल की पूजा का स्कूल कटान की जद में है। उसके पिता मुनव्वर ने कहा कि हम चाहते हैं कि बेटी पढ़े, लेकिन स्कूल अगर बह गया तो पढ़ाई कैसे होगी। दूसरे गांव का स्कूल चार किलोमीटर दूर है। सदर तहसील के टेंगनहिया गांव के बुढऊ यादव का खेत और घर दोनों नदी में समा चुके हैं। अब परिवार का गुजारा गांव के किराना दुकानदार से उधार लेकर चल रहा है। सोचते थे खेती से उधार चुका देंगे, पर अब तो खेती भी नहीं बची।

कटान प्रभावित गांवों का सर्वे कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि किसानों को मदद दिलाई जा सके। नदी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अभी नदी खतरे के निशान से नीचे है।
प्रदीप कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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