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Balrampur News: ''''तरक्की के द्वार'''' से कोयलाबास और जरवा में लौटने लगी रौनक

Mon, 13 Oct 2025 09:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 13 Oct 2025 09:54 PM IST
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Koylabas and Jarwa are getting back their glory with the "Gate of Progress".
बलरामपुर के जरवा में आपस में चर्चा करते भारत व नेपाल के युवा ।-संवाद
जरवा।
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भारत-नेपाल सीमा से सटे जरवा और कोयलाबास बाजार में इन दिनों हलचल है। लंबे समय से सन्नाटे में डूबे इस सीमावर्ती क्षेत्र में अब बदलाव नजर आ रहा है। भंसार सीमा वृद्धि और चौकी व्यवस्था सुधारने की पहल ने लोगों में फिर से भरोसा और उत्साह जगाया है। सभी इस उम्मीद में हैं कि तराई में बदलाव आएगी। तरक्की की नई शुरुआत होगी।
नेपाल के कोयलाबास बाजार में व्यापारी, होटल संचालक, पर्यटन कारोबारी और स्थानीय नागरिक बैठक में जुटे हैं। वे आर्थिक स्थिति सुधारने, सीमापार व्यापार बढ़ाने और दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं। नेपाल के कोयलाबास ग्रामपालिका अध्यक्ष खालिद सिद्दीकी ने बताया कि हमारे यहां भंसार की सीमा पहले ही बढ़ाई जा चुकी है और अब सभी व्यवस्थाएं ऑनलाइन हैं। अगर भारत के जरवा चौकी की भंसार सीमा बढ़ जाती है, तो दोनों ओर के लोगों का आना-जाना बढ़ेगा और व्यापार फिर से तेजी पकड़ेगा।
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जरवा और कोयलाबास अब सिर्फ व्यापारिक चौकियां नहीं, बल्कि दो देशों की साझी तरक्की और सौहार्द का प्रतीक बनती जा रही हैं। ‘तरक्की का द्वार अभियान’ इन सीमावर्ती इलाकों में न सिर्फ आर्थिक सुधार की नींव रख रहा है, बल्कि मैत्रीपूर्ण रिश्तों में भी फिर से गर्माहट भर रहा है।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सीमा पर व्यापार को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों को तेजी से लागू किया गया, तो कोयलाबास और जरवा दोनों बाजारों में फिर से पहले जैसी चहल-पहल लौट आएगी।
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छांगुर कांड के बाद घटा व्यापार, अब बेहतरी की संभावना
स्थानीय होटल संचालक मधुसूदन ने बताया कि पहले माओवादी आंदोलन से व्यापार प्रभावित रहा। इसके बाद बीते महीनों में छांगुर कांड से सीमा पर अत्यधिक सतर्कता बढ़ गई। इससे स्थानीय लोगों से भी रोकटोक होने लगी। ऐसे में पहले भारतीय पर्यटकों की आमद से प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन छांगुर प्रकरण के बाद भारतीय पर्यटकों का इस सीमा से आना करीब बंद हो गया। इससे कारोबार ठप पड़ गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि तरक्की का द्वार अभियान से फिर से बाजार में रौनक लौटेगी।
पर्यटन कारोबारी निमतुल्लाह सिद्दीकी बताते हैं कि पहले भारत से पर्यटक और टूरिस्ट बसें नियमित आती थीं, लेकिन अब जांच में लगने वाले समय और प्रक्रियाओं के कारण बसें दूसरे मार्गों से जा रही हैं। अब जाकर फिर पुराना माहौल लौटने लगा है। इसे और विस्तार देने की जरूरत है।

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कोयलाबास में रौनक लौटने की उम्मीद
होटल संचालक अनिल कहार बताते हैं कि मेरी पांच पुश्तें कोयलाबास में रह चुकी हैं। माओवादी हमलों और बंदी के दौर को झेला है, लेकिन इस धरती से जुड़ाव ने हमें यहीं रोके रखा है। अब हमें उम्मीद है कि अभियान से कोयलाबास में फिर रौनक लौटेगी। वहीं स्थानीय निवासी सग्गू, लाला खान और गिरवर कहते हैं कि हम दशकों से यहां रह रहे हैं। पहले हम तुलसीपुर और बलरामपुर बाजारों से रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदते थे, लेकिन कड़ी जांच के कारण आवाजाही मुश्किल हो गई थी। अब अगर नई व्यवस्था लागू होती है तो सीमापार आवागमन और व्यापार में फिर से तेजी आएगी।
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