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आयुर्वेद के कितने स्टोर, विभाग को नहीं पता
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बलरामपुर। जिले का आयुर्वेदिक एवं यूनानी विभाग मरीजों की सेहत को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कितने आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाखाने संचालित हैं, विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं है। जिम्मेदार इसके लिए कोई नियम न होने की बात कहते हुए बच रहे हैं। ऐसेे में ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण के आयुर्वेदिक दवा के नाम पर चल रहीं दुकानें मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं।
बीमारी से जूझ रहे मरीजों को निरोग बनाने में आयुर्वेद अहम भूमिका निभाता है। आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो बीमार होने पर सबसे पहले आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज कराते हैं। ये दुकानें ऐसे मरीजों की जान खतरे में भी डाल देती हैं।
पचपेड़वा व गैसड़ी समेत नेपाल सीमा से सटे अधिकांश क्षेत्रों में कई ऐसे आयुर्वेदिक स्टोर हैं जहां आयुर्वेदिक दवा के नाम पर एलोपैथ (अंग्रेजी दवा) के साथ-साथ नशे के लिए प्रयोग की जानें वाली दवाएं भी बिकती हैं। ऐसी कुछ दुकानों पर मरीजों का उपचार भी किया जाता है। ये दुकानें सिर्फ जीएसटी पंजीकरण पर संचालित हैं। विभाग को इनकी कोई जानकारी तक नहीं है।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने का कहना है कि जिले में संचालित आयुर्वेदिक दवा स्टोर व यूनानी दवाखाना खुलने की कोई लिखित सूचना हमारे कार्यालय में नहीं आती है। जिसके चलते जनपद में कुल कितने ऐसे स्टोर संचालित हैं इसकी जानकारी नहीं है।
आयुर्वेद विभाग में केवल आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों की क्लीनिक का पंजीकरण करने की व्यवस्था है। इन चिकित्सकों को क्लीनिक खोलने से पहले विभाग में पंजीकरण कराना होता है। विभाग के अनुसार जिले में ऐसी करीब 300 क्लीनिक पंजीकृत हैं।
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बीमारी से जूझ रहे मरीजों को निरोग बनाने में आयुर्वेद अहम भूमिका निभाता है। आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो बीमार होने पर सबसे पहले आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज कराते हैं। ये दुकानें ऐसे मरीजों की जान खतरे में भी डाल देती हैं।
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पचपेड़वा व गैसड़ी समेत नेपाल सीमा से सटे अधिकांश क्षेत्रों में कई ऐसे आयुर्वेदिक स्टोर हैं जहां आयुर्वेदिक दवा के नाम पर एलोपैथ (अंग्रेजी दवा) के साथ-साथ नशे के लिए प्रयोग की जानें वाली दवाएं भी बिकती हैं। ऐसी कुछ दुकानों पर मरीजों का उपचार भी किया जाता है। ये दुकानें सिर्फ जीएसटी पंजीकरण पर संचालित हैं। विभाग को इनकी कोई जानकारी तक नहीं है।
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क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दिग्विजय नाथ ने का कहना है कि जिले में संचालित आयुर्वेदिक दवा स्टोर व यूनानी दवाखाना खुलने की कोई लिखित सूचना हमारे कार्यालय में नहीं आती है। जिसके चलते जनपद में कुल कितने ऐसे स्टोर संचालित हैं इसकी जानकारी नहीं है।
आयुर्वेद विभाग में केवल आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सकों की क्लीनिक का पंजीकरण करने की व्यवस्था है। इन चिकित्सकों को क्लीनिक खोलने से पहले विभाग में पंजीकरण कराना होता है। विभाग के अनुसार जिले में ऐसी करीब 300 क्लीनिक पंजीकृत हैं।