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Balrampur News: हादसे में होम्योपैथिक चिकित्सक की मौत, पत्नी घायल
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बलरामपुर के बरदौलिया-ललिया मार्ग पर दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार। संवाद
हरैया सतघरवा। बरदौलिया-ललिया मार्ग पर रविवार रात सड़क हादसे में होम्योपैथिक चिकित्सक की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में कार सवार उनके एक साथी को भी चोटें आई हैं। शादी समारोह से लौटते समय उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गई।
होम्योपैथी चिकित्सक रामपाल श्रीवास्तव (63) अपनी पत्नी किरन श्रीवास्तव और साथी सुरेश कुमार यादव के साथ शहर में ही अपने सहपाठी रमनलाल गुप्त की बेटी के शादी समारोह में शामिल हो गए थे। देर रात कार से अपने गांव मैनडीह लौट रहे थे। कार वे स्वयं चला रहे थे। देर रात करीब एक बजे बरदौलिया-ललिया मार्ग पर सड़क किनारे पेड़ से उनकी कार अनियंत्रित होकर टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखचे उड़ गए।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुरा पहुंचाया। अधीक्षक डॉ. रजत शुक्ल ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही रामपाल श्रीवास्तव की मौत हो चुकी थी। उनकी पत्नी किरन श्रीवास्तव की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल बलरामपुर रेफर कर दिया गया। सुरेश कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जा रही है।
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साहित्य और पत्रकारिता से था गहरा नाता
बताया जाता है कि रामपाल श्रीवास्तव एक राष्ट्रीय स्तर के अखबार में संपादक रह चुके थे और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में भी उनकी पहचान थी। उन्होंने लंबे समय तक धनबाद, दिल्ली और नोएडा में रहकर पत्रकारिता और साहित्य साधना की। उनकी तीन पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वह करीब पांच वर्ष पूर्व वह अपने पैतृक गांव मैनडीह लौट आए थे, जहां वह होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से ग्रामीणों की सेवा कर रहे थे। गांव में उन्हें एक विद्वान, शांत स्वभाव और मददगार व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। साहित्यिक गोष्ठियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी और युवा लेखकों को मार्गदर्शन देना उनका स्वभाव था। पांच फरवरी को ही वह दिल्ली से बेटी रोशनी की शादी करके लौटे थे।
साहब ने कभी अलग नहीं होने दिया
हादसे में घायल उनके सहयोगी सुरेश कुमार यादव ने भावुक होकर बताया कि मेरे पिता धनीराम बचपन से ही साहब के साथ रहते थे। अब पिताजी घर पर रहते हैं, उनकी जगह मैं साहब के साथ रहता था। उन्होंने कभी हमें नौकर नहीं समझा, हमेशा परिवार जैसा स्नेह दिया। उनका व्यवहार और अपनापन कभी अलग नहीं होने दिया। लेकिन ईश्वर को शायद यही मंजूर था।
बेटा- बेटी दिल्ली में, खबर मिलते ही निकले
जैसे ही हादसे की खबर मैनडीह और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। उनके दो बेटे और एक बेटी है, जो दिल्ली में रहते हैं। बेटी डॉ. रोशनी श्रीवास्तव दिल्ली में होम्योपैथी चिकित्सक हैं। बेटा रवि श्रीवास्तव एक दिल्ली में ही निजी कंपनी में कार्यरत हैं। छोटे पुत्र डॉ. वसी कबीर श्रीवास्तव भी दिल्ली में होम्योपैथी चिकित्सक हैं। घर में रामपाल अपनी पत्नी व एक सहयोगी के साथ रहते थे। हादसे की खबर मिलते ही बेटा और बेटी परिवार के साथ घर के लिए निकल चुके हैं।
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होम्योपैथी चिकित्सक रामपाल श्रीवास्तव (63) अपनी पत्नी किरन श्रीवास्तव और साथी सुरेश कुमार यादव के साथ शहर में ही अपने सहपाठी रमनलाल गुप्त की बेटी के शादी समारोह में शामिल हो गए थे। देर रात कार से अपने गांव मैनडीह लौट रहे थे। कार वे स्वयं चला रहे थे। देर रात करीब एक बजे बरदौलिया-ललिया मार्ग पर सड़क किनारे पेड़ से उनकी कार अनियंत्रित होकर टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखचे उड़ गए।
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हादसे के बाद स्थानीय लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस से तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुरा पहुंचाया। अधीक्षक डॉ. रजत शुक्ल ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही रामपाल श्रीवास्तव की मौत हो चुकी थी। उनकी पत्नी किरन श्रीवास्तव की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल बलरामपुर रेफर कर दिया गया। सुरेश कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जा रही है।
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साहित्य और पत्रकारिता से था गहरा नाता
बताया जाता है कि रामपाल श्रीवास्तव एक राष्ट्रीय स्तर के अखबार में संपादक रह चुके थे और वरिष्ठ साहित्यकार के रूप में भी उनकी पहचान थी। उन्होंने लंबे समय तक धनबाद, दिल्ली और नोएडा में रहकर पत्रकारिता और साहित्य साधना की। उनकी तीन पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। वह करीब पांच वर्ष पूर्व वह अपने पैतृक गांव मैनडीह लौट आए थे, जहां वह होम्योपैथिक चिकित्सा के माध्यम से ग्रामीणों की सेवा कर रहे थे। गांव में उन्हें एक विद्वान, शांत स्वभाव और मददगार व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। साहित्यिक गोष्ठियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी और युवा लेखकों को मार्गदर्शन देना उनका स्वभाव था। पांच फरवरी को ही वह दिल्ली से बेटी रोशनी की शादी करके लौटे थे।
साहब ने कभी अलग नहीं होने दिया
हादसे में घायल उनके सहयोगी सुरेश कुमार यादव ने भावुक होकर बताया कि मेरे पिता धनीराम बचपन से ही साहब के साथ रहते थे। अब पिताजी घर पर रहते हैं, उनकी जगह मैं साहब के साथ रहता था। उन्होंने कभी हमें नौकर नहीं समझा, हमेशा परिवार जैसा स्नेह दिया। उनका व्यवहार और अपनापन कभी अलग नहीं होने दिया। लेकिन ईश्वर को शायद यही मंजूर था।
बेटा- बेटी दिल्ली में, खबर मिलते ही निकले
जैसे ही हादसे की खबर मैनडीह और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। उनके दो बेटे और एक बेटी है, जो दिल्ली में रहते हैं। बेटी डॉ. रोशनी श्रीवास्तव दिल्ली में होम्योपैथी चिकित्सक हैं। बेटा रवि श्रीवास्तव एक दिल्ली में ही निजी कंपनी में कार्यरत हैं। छोटे पुत्र डॉ. वसी कबीर श्रीवास्तव भी दिल्ली में होम्योपैथी चिकित्सक हैं। घर में रामपाल अपनी पत्नी व एक सहयोगी के साथ रहते थे। हादसे की खबर मिलते ही बेटा और बेटी परिवार के साथ घर के लिए निकल चुके हैं।