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Balrampur News: जरूरतमंदों की मदद करना सभी धर्मों में नेक काम
Sun, 04 Feb 2024 12:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 04 Feb 2024 12:22 AM IST
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बलरामपुर। मोहल्ला गदुरहवा स्थित हजरत बाबा हुरमत शाह रहमत उल्लाह अलैह के आस्ताने पर पांच दिवसीय सालाना उर्स का शुभारंभ हुआ। उर्स के पहले दिन आस्ताने पर तकरीरी कार्यक्रम का आयोजन कर इस्लाम धर्म से जुड़ी खूबियों के बारे में तकरीर पेश की गई। वक्ताओं ने कहा कि जरूरतमंद की मदद करना सभी धर्म में एक बहुत ही नेक काम माना गया है।
कार्यक्रम की शुरूआत कारी इकरार ने कुरान-ए-पाक की तिलावत से की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने कहा कि सूफी संतों के मजार पर सभी धर्म के लोग अपनी-अपनी नेक मुराद लेकर आते हैं। सच्चे मन से दुआ मांगने पर उनकी मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। सूफी संतों ने कभी भी किसी को मजहब के चश्मे के आधार पर नहीं देखा। उनके आस्ताने पर सजदा करने वाले सिर्फ इंसान के रूप में होते हैं।
मौलाना मोहम्मद हसन और मौलाना अली हुसैन ने कहा कि किसी जरूरतमंद की मदद करने से पहले यह कतई न सोचें कि वह किस मजहब का है। कारी फरियाद और कारी तैय्यब ने कहा कि इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह किसी का हक मारना होता है। इसके बाद शायरे इस्लाम अब्दुल रहीम चिश्ती, दानिश बलरामपुरी व हाफिज जाहिद ने अपने नातिया कलाम से आस्ताने पर आए अकीदतमंदों को देर रात तक बांधे रखा। आस्ताना कमेटी के चीफ सुपरवाजर डॉ. तारिक अफजल सिद्दीकी, सचिव हकीम निसार वारिश आदि ने उलेमाओं और शायरे इस्लाम को आस्ताने का चादर भेंट कर उनका स्वागत किया।
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कार्यक्रम की शुरूआत कारी इकरार ने कुरान-ए-पाक की तिलावत से की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने कहा कि सूफी संतों के मजार पर सभी धर्म के लोग अपनी-अपनी नेक मुराद लेकर आते हैं। सच्चे मन से दुआ मांगने पर उनकी मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। सूफी संतों ने कभी भी किसी को मजहब के चश्मे के आधार पर नहीं देखा। उनके आस्ताने पर सजदा करने वाले सिर्फ इंसान के रूप में होते हैं।
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मौलाना मोहम्मद हसन और मौलाना अली हुसैन ने कहा कि किसी जरूरतमंद की मदद करने से पहले यह कतई न सोचें कि वह किस मजहब का है। कारी फरियाद और कारी तैय्यब ने कहा कि इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह किसी का हक मारना होता है। इसके बाद शायरे इस्लाम अब्दुल रहीम चिश्ती, दानिश बलरामपुरी व हाफिज जाहिद ने अपने नातिया कलाम से आस्ताने पर आए अकीदतमंदों को देर रात तक बांधे रखा। आस्ताना कमेटी के चीफ सुपरवाजर डॉ. तारिक अफजल सिद्दीकी, सचिव हकीम निसार वारिश आदि ने उलेमाओं और शायरे इस्लाम को आस्ताने का चादर भेंट कर उनका स्वागत किया।
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