{"_id":"6a9da3c6d45780ffe9030d57","slug":"health-check-ups-conducted-for-131-lakh-children-in-four-months-balrampur-news-c-99-1-slko1018-154331-2026-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Balrampur News: चार माह में 1.31 लाख बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Balrampur News: चार माह में 1.31 लाख बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच
Sun, 06 Sep 2026 11:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:02 PM IST
विज्ञापन
बलरामपुर। बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिले में नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की जा रही है। अप्रैल से जुलाई 2026 तक स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल हेल्थ टीमों ने विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पहुंचकर 1,31,772 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की। इनमें विद्यालयों के 47,385 और आंगनबाड़ी केंद्रों के 84,387 बच्चे शामिल हैं।
सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि जांच के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े 9,018 बच्चों को चिन्हित किया गया। इन्हें आवश्यक परामर्श और बेहतर उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों को रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत बच्चों को जांच के बाद उपचार और फॉलोअप से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
मोबाइल हेल्थ टीमें निर्धारित माइक्रोप्लान के अनुसार सीधे विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रही हैं। इससे अभिभावकों को बच्चों को हर बार जांच के लिए अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्क्रीनिंग के दौरान जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं, विभिन्न बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों तथा शारीरिक और मानसिक विकास में देरी जैसे संकेतों की पहचान की जाती है।
विज्ञापन
सीएमओ ने बताया कि दृष्टि, श्रवण, दांत, एनीमिया, कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार संभव हो जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यक्रम की नियमित निगरानी की जा रही है। चिन्हित बच्चों के उपचार और फॉलोअप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण किसी बच्चे की शिक्षा और विकास प्रभावित न हो।
विज्ञापन
सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि जांच के दौरान विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े 9,018 बच्चों को चिन्हित किया गया। इन्हें आवश्यक परामर्श और बेहतर उपचार के लिए संबंधित स्वास्थ्य इकाइयों को रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत बच्चों को जांच के बाद उपचार और फॉलोअप से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन
मोबाइल हेल्थ टीमें निर्धारित माइक्रोप्लान के अनुसार सीधे विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंच रही हैं। इससे अभिभावकों को बच्चों को हर बार जांच के लिए अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। स्क्रीनिंग के दौरान जन्मजात स्वास्थ्य समस्याओं, विभिन्न बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों तथा शारीरिक और मानसिक विकास में देरी जैसे संकेतों की पहचान की जाती है।
विज्ञापन
सीएमओ ने बताया कि दृष्टि, श्रवण, दांत, एनीमिया, कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं की शुरुआती अवस्था में पहचान होने से समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उपचार संभव हो जाता है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यक्रम की नियमित निगरानी की जा रही है। चिन्हित बच्चों के उपचार और फॉलोअप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण किसी बच्चे की शिक्षा और विकास प्रभावित न हो।