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Balrampur News: पांच मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट सेंटर खुलेंगे
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बलरामपुर। खून की कमी से जूझ रही गर्भवती की सेहत की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक और पहल शुरू की है। फर्स्ट रेफरल यूनिट वाले पांच अस्पतालों में मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट सेंटर खोलने की तैयारी की जा रही है। इसके माध्यम से गर्भवती की जांच से लेकर खानपान तक पर नजर रखी जाएगी।
गर्भवती को आयरन की जरूरत सामान्य से अधिक होती है। ऐसे में आयरन की कमी के कारण गर्भवती में खून की कमी हो जाती है। इसके चलते गर्भवती को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में 45.9 प्रतिशत गर्भवती एनीमिया से ग्रसित हैं।
इसमें से 2.1 प्रतिशत महिलाएं गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं। 100 दिन तक आयरन की गोली का सेवन करने वाली गर्भवती की तादाद महज 22 प्रतिशत व 180 दिन तक सेवन करने वाली गर्भवती सिर्फ 9.7 प्रतिशत हैं।
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ऐसे में अब गर्भवती की सेहत को बेहतर बनाने के लिए सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में फर्स्ट रेफरल यूनिट वाले जिला संयुक्त अस्पताल, महिला अस्पताल, तुलसीपुर, पचपेड़वा व उतरौला में सेंटर स्थापित किया जाएगा। यही नहीं, इन अस्पतालों में एक से तीन बेड एनीमिया के मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रसव इकाइयों को और बेहतर बनाया जाएगा।
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गर्भवती को आयरन की जरूरत सामान्य से अधिक होती है। ऐसे में आयरन की कमी के कारण गर्भवती में खून की कमी हो जाती है। इसके चलते गर्भवती को तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश में 45.9 प्रतिशत गर्भवती एनीमिया से ग्रसित हैं।
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इसमें से 2.1 प्रतिशत महिलाएं गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं। 100 दिन तक आयरन की गोली का सेवन करने वाली गर्भवती की तादाद महज 22 प्रतिशत व 180 दिन तक सेवन करने वाली गर्भवती सिर्फ 9.7 प्रतिशत हैं।
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ऐसे में अब गर्भवती की सेहत को बेहतर बनाने के लिए सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में फर्स्ट रेफरल यूनिट वाले जिला संयुक्त अस्पताल, महिला अस्पताल, तुलसीपुर, पचपेड़वा व उतरौला में सेंटर स्थापित किया जाएगा। यही नहीं, इन अस्पतालों में एक से तीन बेड एनीमिया के मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।
अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रसव इकाइयों को और बेहतर बनाया जाएगा।