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Balrampur News: घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली खाद, आक्रोश
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बलरामपुर के गैसड़ी में खाद लेने के लिए निजी दुकान पर लगी किसानों की भीड़।-संवाद
बलरामपुर। मौसम में बदलाव के साथ ही खेती-किसानी जोर पकड़ रही है। किसानों को जब खाद की जरूरत है तो उन्हें समितियों पर धक्के खाने पड़ रहे हैं। रविवार को घंटों कतार में लगने के बाद भी कई किसानों को मायूस लौटना पड़ा।
समितियों पर खाद का वितरण तो हो रहा है, लेकिन एक साथ जुट रहे किसानों को संभालने में समितियां सक्षम नहीं दिख नहीं हैं। टोकन प्रणाली के बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को किसानों को खाद लेने के लिए धक्के खाने पड़े। गैसड़ी के भोजपुर चौराहा स्थित सहकारी खाद वितरण केंद्र पर किसान सुबह से ही लाइन में खड़े हो गए, लेकिन दोपहर तक दुकान नहीं खुली। इससे किसानों में गहरी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने बताया कि दुकान पर खाद वितरण की पूर्व सूचना दी गई थी, जिसके चलते सैकड़ों किसान सुबह 6 बजे से ही लाइन में लग गए। निर्धारित समय 10 बजे तक भी खाद विक्रेता के न आने पर किसान भड़क उठे। दोपहर 12 बजे तक भी दुकान का ताला नहीं खुला।
मौके पर मौजूद किसानों मो. सलीम, रामकिशोर, नसीम अहमद और राकेश कुमार ने बताया कि निजी दुकानों पर यूरिया महंगे दामों में मिल रही है। अब धान की रोपाई का समय चल रहा है, ऐसे में समय पर खाद न मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सहकारी समिति द्वारा खाद वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। दुकान समय पर नहीं खुलती और कई बार बिना सूचना के बंद रहती है।
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वितरण प्रक्रिया रही धीमी, बेचैन रहे किसान
गैसड़ी/ललिया। सिंहपुर स्थित सहकारी समिति में भी रविवार को खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ जमा रही। महिलाएं और बुजुर्ग किसान धूप में खड़े रहे। लेकिन वितरण प्रक्रिया बेहद धीमी रही, जिससे असंतोष बढ़ता गया। गैसड़ी क्षेत्र में भी यही हालात रहे। महिलाओं की लंबी लाइन सुबह से ही प्राइवेट दुकानों के सामने देखने को मिलीं। किसानों ने बताया कि कई जगहों पर खाद की आपूर्ति तो हो रही है, लेकिन वितरण प्रक्रिया असंगठित और पक्षपातपूर्ण है। जिससे वास्तविक जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल रही है। इसी तरह उतरौला, तुलसीपुर, पचपेड़वा आदि क्षेत्रों में भी किसानों को खाद की समस्या से जूझ रहे हैं।
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समितियों पर खाद का वितरण तो हो रहा है, लेकिन एक साथ जुट रहे किसानों को संभालने में समितियां सक्षम नहीं दिख नहीं हैं। टोकन प्रणाली के बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रविवार को किसानों को खाद लेने के लिए धक्के खाने पड़े। गैसड़ी के भोजपुर चौराहा स्थित सहकारी खाद वितरण केंद्र पर किसान सुबह से ही लाइन में खड़े हो गए, लेकिन दोपहर तक दुकान नहीं खुली। इससे किसानों में गहरी नाराजगी देखी गई। ग्रामीणों ने बताया कि दुकान पर खाद वितरण की पूर्व सूचना दी गई थी, जिसके चलते सैकड़ों किसान सुबह 6 बजे से ही लाइन में लग गए। निर्धारित समय 10 बजे तक भी खाद विक्रेता के न आने पर किसान भड़क उठे। दोपहर 12 बजे तक भी दुकान का ताला नहीं खुला।
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मौके पर मौजूद किसानों मो. सलीम, रामकिशोर, नसीम अहमद और राकेश कुमार ने बताया कि निजी दुकानों पर यूरिया महंगे दामों में मिल रही है। अब धान की रोपाई का समय चल रहा है, ऐसे में समय पर खाद न मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि सहकारी समिति द्वारा खाद वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। दुकान समय पर नहीं खुलती और कई बार बिना सूचना के बंद रहती है।
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वितरण प्रक्रिया रही धीमी, बेचैन रहे किसान
गैसड़ी/ललिया। सिंहपुर स्थित सहकारी समिति में भी रविवार को खाद लेने के लिए किसानों की भारी भीड़ जमा रही। महिलाएं और बुजुर्ग किसान धूप में खड़े रहे। लेकिन वितरण प्रक्रिया बेहद धीमी रही, जिससे असंतोष बढ़ता गया। गैसड़ी क्षेत्र में भी यही हालात रहे। महिलाओं की लंबी लाइन सुबह से ही प्राइवेट दुकानों के सामने देखने को मिलीं। किसानों ने बताया कि कई जगहों पर खाद की आपूर्ति तो हो रही है, लेकिन वितरण प्रक्रिया असंगठित और पक्षपातपूर्ण है। जिससे वास्तविक जरूरतमंद किसानों को खाद नहीं मिल रही है। इसी तरह उतरौला, तुलसीपुर, पचपेड़वा आदि क्षेत्रों में भी किसानों को खाद की समस्या से जूझ रहे हैं।