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Balrampur News: विलुप्त होती जनजातीय कला को मिलेगा नया जीवन
Mon, 08 Jun 2026 11:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 08 Jun 2026 11:05 PM IST
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फोटो-19-बलरामपुर के मोहकमपुर जरवा में चित्रकला का प्रदर्शन करते बच्चे ।-संवाद
जरवा। थारू जनजाति की विलुप्त होती कला और परंपराओं के संरक्षण के लिए 10 दिवसीय थारू चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ रविवार को मोहकमपुर जरवा में हुआ। इसका आयोजन उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ व जनजाति कला एवं विकास फाउंडेशन, बलरामपुर ने संयुक्त रूप से किया। सृजन कार्यक्रम के तहत यह कार्यशाला 17 जून 2026 तक चलेगी। पहले दिन से सैकड़ों छात्राओं ने चित्रकला गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यशाला में थारू चित्रकला विशेषज्ञ आशा चौधरी और लक्ष्मी चौधरी प्रतिभागियों को थारू समाज की लोक जीवन शैली, प्रकृति प्रेम, देवी-देवताओं तथा दैनिक जीवन से जुड़ी पारंपरिक चित्रकला की बारीकियां सिखाएंगी। इसका उद्घाटन रामकृपाल शुक्ल, महाराणा प्रताप जनजाति सेवा संस्थान के अध्यक्ष मदनलाल जायसवाल तथा उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की सदस्य तारा चौधरी साध्वी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर संजू चौधरी, चांदनी, वंदना, संध्या, मनाली, ज्योति, सुष्मिता, अंजलि सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।
नई पीढ़ी काे विरासत से जोड़ना ही उद्देश्य : तारा
तारा चौधरी ने बताया कि थारू समुदाय की भित्ति चित्रकला और गोबर-मिट्टी की लिपाई पर बनने वाले ज्यामितीय एवं प्राकृतिक चित्र आधुनिक पीढ़ी से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं और कला प्रेमियों को इस विरासत से जोड़कर थारू संस्कृति की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। कार्यशाला में छात्र-छात्राएं और कला प्रेमी निशुल्क भाग ले सकते हैं। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
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कार्यशाला में थारू चित्रकला विशेषज्ञ आशा चौधरी और लक्ष्मी चौधरी प्रतिभागियों को थारू समाज की लोक जीवन शैली, प्रकृति प्रेम, देवी-देवताओं तथा दैनिक जीवन से जुड़ी पारंपरिक चित्रकला की बारीकियां सिखाएंगी। इसका उद्घाटन रामकृपाल शुक्ल, महाराणा प्रताप जनजाति सेवा संस्थान के अध्यक्ष मदनलाल जायसवाल तथा उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान की सदस्य तारा चौधरी साध्वी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर संजू चौधरी, चांदनी, वंदना, संध्या, मनाली, ज्योति, सुष्मिता, अंजलि सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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नई पीढ़ी काे विरासत से जोड़ना ही उद्देश्य : तारा
तारा चौधरी ने बताया कि थारू समुदाय की भित्ति चित्रकला और गोबर-मिट्टी की लिपाई पर बनने वाले ज्यामितीय एवं प्राकृतिक चित्र आधुनिक पीढ़ी से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। इसका उद्देश्य युवाओं और कला प्रेमियों को इस विरासत से जोड़कर थारू संस्कृति की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। कार्यशाला में छात्र-छात्राएं और कला प्रेमी निशुल्क भाग ले सकते हैं। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों द्वारा तैयार कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
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