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जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दे रहे डॉक्टर
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बलरामपुर। ग्रेजुएट मेडिकल प्रैक्टिसनर एसोसिएशन (जीएमपीए) की तरफ से सोमवार शाम शहर के एक होटल में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें एंटीबायोटिक दवाओं के अधिक प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभाव पर चर्चा की गई।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. हिफ्जुर्रहमान अंसारी ने कहा कि अप्रशिक्षित चिकित्सक पिछड़े इलाकों में मरीजों को एंटीबायोटिक दवाओं की ओवरडोज दे देते हैं, जिससे बाद में उन मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। ईएनटी सर्जन डॉ. अब्दुल कय्यूम ने कहा कि कान के मरीजों में भी आज कल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होने लगा है जिसे चिकित्सा जगत में अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। सर्जन डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव ने कहा कि 20 साल से कोई नई एंटीबायोटिक्स की खोज नहीं हो पायी है और न ही कुछ वर्षों तक होने वाली है। संपूर्ण चिकित्सा जगत के लिए ये भी विचारणीय प्रश्न है।
डॉ. देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया की अप्रशिक्षित चिकित्सक जिन बीमारियों में एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए या फिर कुछ दिन बाद देनी चाहिए उसे शुरू से ही देने लगते हैं। नतीजतन बाद में दवाओं के साथ दी जाने वाली एंटीबायोटिक काम ही नहीं करती। इससे मरीजों की सेहत खराब हो जाती है। गोष्ठी को डॉ. अशोक सिंह, डॉ. एफ रहमान, डॉ. ज्ञान प्रकाश तिवारी, डॉ. इकबाल, डॉ. जाहिद, डॉ. अखिलेश उपाध्याय, डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डॉ. असलम, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. फिरोज आलम, डॉ. अब्दुल सुभान, डॉ. जुबैर, डॉ. केके राणा, डॉ. राकेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।
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गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. हिफ्जुर्रहमान अंसारी ने कहा कि अप्रशिक्षित चिकित्सक पिछड़े इलाकों में मरीजों को एंटीबायोटिक दवाओं की ओवरडोज दे देते हैं, जिससे बाद में उन मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं। ईएनटी सर्जन डॉ. अब्दुल कय्यूम ने कहा कि कान के मरीजों में भी आज कल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस होने लगा है जिसे चिकित्सा जगत में अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है। सर्जन डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव ने कहा कि 20 साल से कोई नई एंटीबायोटिक्स की खोज नहीं हो पायी है और न ही कुछ वर्षों तक होने वाली है। संपूर्ण चिकित्सा जगत के लिए ये भी विचारणीय प्रश्न है।
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डॉ. देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया की अप्रशिक्षित चिकित्सक जिन बीमारियों में एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए या फिर कुछ दिन बाद देनी चाहिए उसे शुरू से ही देने लगते हैं। नतीजतन बाद में दवाओं के साथ दी जाने वाली एंटीबायोटिक काम ही नहीं करती। इससे मरीजों की सेहत खराब हो जाती है। गोष्ठी को डॉ. अशोक सिंह, डॉ. एफ रहमान, डॉ. ज्ञान प्रकाश तिवारी, डॉ. इकबाल, डॉ. जाहिद, डॉ. अखिलेश उपाध्याय, डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डॉ. असलम, डॉ. सौरभ सिंह, डॉ. मनीष सिंह, डॉ. फिरोज आलम, डॉ. अब्दुल सुभान, डॉ. जुबैर, डॉ. केके राणा, डॉ. राकेश चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।
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