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देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा को मंदिरों में उमड़े श्रद्घालु
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बलरामपुर। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ भोर पहर से ही मंदिरों में जुटने लगी।
धूप व अगरबत्ती जलाकर जहां माता की पूजा की गई वहीं चुनरी व प्रसाद चढ़ा कर भक्तों ने मां से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा।
मां दुर्गा दूसरी शक्ति का नाम स्वरुप ब्रह्मचारिणी है। नवरात्र द्वितीया के दिन देवी ब्रह्मचारिणी की ही पूजा अर्चना का विधान है। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए देवी ने कठोर तप किया।
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तप के कारण ही देवी का एक नाम तपश्चारिणी भी है। देवी का तप हमें जीवन की सभी बाधाओं को पार कर सफलता के लिए कठिन परिश्रम करने का संदेश देता है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए भोर पहर से देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई।
शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में श्रद्धालु प्रात: काल चार बजे सूर्य कुंड में स्नान कर मां पाटेश्वरी की पूजा अर्चना के लिए कतारबद्ध खड़े हो गये। माता के जयकारे से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।
बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर, नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीमाता मंदिर, समय माता मंदिर, बड़िकी बहिनी थान, उतरौला स्थित ज्वालादेवी मंदिर एवं तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, रहिया देवी मंदिर व झिंगहा माता मंदिर में भी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।
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धूप व अगरबत्ती जलाकर जहां माता की पूजा की गई वहीं चुनरी व प्रसाद चढ़ा कर भक्तों ने मां से परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगा। शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा।
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मां दुर्गा दूसरी शक्ति का नाम स्वरुप ब्रह्मचारिणी है। नवरात्र द्वितीया के दिन देवी ब्रह्मचारिणी की ही पूजा अर्चना का विधान है। मान्यता है कि भगवान शिव को पति रुप में पाने के लिए देवी ने कठोर तप किया।
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तप के कारण ही देवी का एक नाम तपश्चारिणी भी है। देवी का तप हमें जीवन की सभी बाधाओं को पार कर सफलता के लिए कठिन परिश्रम करने का संदेश देता है। माता ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए भोर पहर से देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई।
शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर में श्रद्धालु प्रात: काल चार बजे सूर्य कुंड में स्नान कर मां पाटेश्वरी की पूजा अर्चना के लिए कतारबद्ध खड़े हो गये। माता के जयकारे से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।
बिजलीपुर स्थित बिजलेश्वरी देवी मंदिर, नगर स्थित झारखंडी मंदिर, कालीमाता मंदिर, समय माता मंदिर, बड़िकी बहिनी थान, उतरौला स्थित ज्वालादेवी मंदिर एवं तुलसीपुर स्थित नई देवी मंदिर, रहिया देवी मंदिर व झिंगहा माता मंदिर में भी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।