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Balrampur News: जर्जर भवन से नए कार्यालय में स्थानांतरित हुई कस्टम चौकी
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बलरामपुर के जरवा में निर्माणाधीन चेकपोस्ट। संवाद
जरवा। भारत-नेपाल सीमा के जरवा चौकी केंद्र को पुराने जर्जर भवन से नए कार्यालय और आवास में स्थानांतरित कर दिया गया है। कस्टम चौकी पर कंप्यूटर, फर्नीचर, इन्वर्टर, प्रिंटर और नया चेक पोस्ट भवन उपलब्ध हो गया है। इससे क्षेत्रीय व्यापारियों और नागरिकों में खुशी की लहर है। व्यापारियों का कहना है कि अब भंसार (कस्टम) जल्द ही खुलने की संभावना है, जिससे इलाके में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
क्षेत्रीय व्यापारी बबलू ने बताया कि पहले वह जरवा में पत्थर का कारोबार करते थे, जिससे लाखों रुपये की कमाई होती थी, लेकिन भंसार बंद होने, जंगल संरक्षित होने और माओवादी गतिविधियों के कारण उनका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। उन्होंने कहा कि तब से हमारी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और लोग पलायन करने लगे। अब भंसार खुलने से हमारा व्यवसाय फिर से पटरी पर आ सकेगा और कई परिवारों की जीविका बचाई जा सकेगी।
बालापुर के गुड्डू होटल के मालिक संतोष कमलापुरी ने बताया कि भंसार संचालन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इलाके में आते-जाते थे। इससे होटल, दुकान और अन्य व्यापार अच्छे चलते थे। भंसार बंद होने के बाद स्थानीय व्यवसाय ठप हो गए, लेकिन नए भवन और संसाधनों के आने से व्यवसाय फिर से शुरू हो सकता है। कोयलाबास के व्यापारी और होटल संचालक जैसे अब्दुल हकीम (किराना), नियामतुल्लाह (होटल), अनिल कहार, गरिमा पुंज (गेस्ट हाउस), मधु नुपाने ( होटल), अन्नू और राजा (कैफे) ने कहा कि भंसार और नई सुविधाओं के आने से उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि व्यापार शुरू होने से पलायन कर चुके लोग अपने घर लौट आएंगे, और क्षेत्र फिर से आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत बनेगा।
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नगर के वरिष्ठ नागरिक और व्यापारियों ने प्रशासन और सीमा शुल्क विभाग को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कदम ‘तरक्की का द्वार अभियान’ के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि भंसार खुलने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा और जरवा भारत-नेपाल सीमा पर एक मजबूत आर्थिक केंद्र बन सकेगा।
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क्षेत्रीय व्यापारी बबलू ने बताया कि पहले वह जरवा में पत्थर का कारोबार करते थे, जिससे लाखों रुपये की कमाई होती थी, लेकिन भंसार बंद होने, जंगल संरक्षित होने और माओवादी गतिविधियों के कारण उनका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। उन्होंने कहा कि तब से हमारी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई और लोग पलायन करने लगे। अब भंसार खुलने से हमारा व्यवसाय फिर से पटरी पर आ सकेगा और कई परिवारों की जीविका बचाई जा सकेगी।
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बालापुर के गुड्डू होटल के मालिक संतोष कमलापुरी ने बताया कि भंसार संचालन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इलाके में आते-जाते थे। इससे होटल, दुकान और अन्य व्यापार अच्छे चलते थे। भंसार बंद होने के बाद स्थानीय व्यवसाय ठप हो गए, लेकिन नए भवन और संसाधनों के आने से व्यवसाय फिर से शुरू हो सकता है। कोयलाबास के व्यापारी और होटल संचालक जैसे अब्दुल हकीम (किराना), नियामतुल्लाह (होटल), अनिल कहार, गरिमा पुंज (गेस्ट हाउस), मधु नुपाने ( होटल), अन्नू और राजा (कैफे) ने कहा कि भंसार और नई सुविधाओं के आने से उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि व्यापार शुरू होने से पलायन कर चुके लोग अपने घर लौट आएंगे, और क्षेत्र फिर से आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत बनेगा।
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नगर के वरिष्ठ नागरिक और व्यापारियों ने प्रशासन और सीमा शुल्क विभाग को धन्यवाद दिया और कहा कि यह कदम ‘तरक्की का द्वार अभियान’ के अंतर्गत क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि भंसार खुलने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर होगा और जरवा भारत-नेपाल सीमा पर एक मजबूत आर्थिक केंद्र बन सकेगा।