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Balrampur News: नेपाल सीमा के मेडिकल स्टोरों पर बेची गई थी कोडीनयुक्त कफ सिरप
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तुलसीपुर। कोडीनयुक्त कफ सिरप का धंधा जिले में कोविड काल से ही शुरू हो गया था। वर्ष 2024 में धंधा काफी तेज हुआ। नगर की दो मेडिकल एजेंसियों ने पूरी तहसील के एक दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोरों को कोडीनयुक्त कफ सीरप की आपूर्ति की। इसमें नेपाल सीमा से सटे गैसड़ी, जरवा और पचपेड़वा क्षेत्र भी शामिल हैं। हाल ही में जांच के बाद औषधि निरीक्षक सुमित कुमार वर्मा ने दोनों होलसेलर मेडिकल एजेंसियों के खिलाफ रिपाेर्ट दर्ज कराई है। औषधि निरीक्षक के व्यस्त होने से आगे की जांच नहीं हो पा रही है।
अक्तूबर में श्रावस्ती और गोंडा के औषधि निरीक्षक की टीम ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान चलाकर मेडिकल स्टोरों की जांच की थी। इस दौरान नगर के नई बाजार स्थित अशोक मेडिकल स्टोर व अमन मेडिकल एजेंसी में कोडीनयुक्त कफ सिरप होलसेल में कई मेडिकल स्टोरों को बेचे जाने की बात सामने आई थी। नवंबर में औषधि निरीक्षक ने दोनों मेडिकल एजेंसियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच में पता चला है कि कोडीनयुक्त कफ सिरप का व्यापार बड़े स्तर पर करने के लिए तुलसीपुर क्षेत्र में दवा माफियों ने पैठ बनाई थी। दोनों मेडिकल एजेंसियों के माध्यम से करोड़ों के कारोबार की धरातल तैयार की गई थी। इन दोनों मेडिकल एजेंसियों से क्षेत्र के संवदेनशील क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों पर बड़े स्तर पर सिरप की सप्लाई की गई। यही नहीं नेपाल से आने वाले लोगों ने भी कोडीनयुक्त कफ सीरप की बड़ी मात्रा में खरीद की। इसी के चलते विक्रय अभिलेख देने से मेडिकल एजेंसी के संचालक आनाकानी कर रहे हैं।
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मामले की जांच कर रहे उप निरीक्षक कौशल किशोर भार्गव के कदम भी रुके हुए हैं। उनका कहना है कि औषधि निरीक्षक से ही तकनीकी जानकारी मिल सकती है। मेडिकल एजेंसी भी बंद है, बिना औषधि निरीक्षक के जांच नहीं हो सकती है। वहीं पुलिस जांच रुकने से मामला गहराता जा रहा है। इस दौरान साक्ष्य भी मिटाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में नहीं मिल थे अभिलेख
अक्तूबर में श्रावस्ती के औषधि निरीक्षक श्रीकांत गुप्त ने नई बाजार स्थित अशोक मेडिकल स्टोर की जांच की तो कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री का खुलासा हुआ था। अशोक मेडिकल एजेंसी के प्रोपराइटर अशोक कुमार लाट के पास कफ सिरप के विक्रय अभिलेख नहीं थे। इसी दिन गोंडा के औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने अमन मेडिकल एजेंसी की जांच की तो कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री लंबे समय से किए जाने की पुष्टि हुई। वर्ष 2024 से अब तक के अभिलेख भी नहीं मिले। प्रोपराइटर संगीता भी अभिलेख नहीं दे सकीं। जबकि कोडीनयुक्त कफ सिरप बिक्री करने के सबूत एजेंसी में मिले, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। शासन से निर्देश पर 19 नवंबर को एफआईआर दर्ज हुई थी।
एसआईआर की ड्यूटी के बाद तेज होगी जांच
अभी गोंडा में एसआईआर के कार्य में ड्यूटी लगी है। इसमें काफी समय लग रहा है। जल्द ही कार्य पूरा करके कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी। मेडिकल एजेंसी ने क्षेत्र के दुकानों को जरूर दवा आपूर्ति की है। पुलिस को जांच में पूरा सहयोग देंगे।
- सुमित कुमार वर्मा, औषधि निरीक्षक गोंडा
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अक्तूबर में श्रावस्ती और गोंडा के औषधि निरीक्षक की टीम ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अभियान चलाकर मेडिकल स्टोरों की जांच की थी। इस दौरान नगर के नई बाजार स्थित अशोक मेडिकल स्टोर व अमन मेडिकल एजेंसी में कोडीनयुक्त कफ सिरप होलसेल में कई मेडिकल स्टोरों को बेचे जाने की बात सामने आई थी। नवंबर में औषधि निरीक्षक ने दोनों मेडिकल एजेंसियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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जांच में पता चला है कि कोडीनयुक्त कफ सिरप का व्यापार बड़े स्तर पर करने के लिए तुलसीपुर क्षेत्र में दवा माफियों ने पैठ बनाई थी। दोनों मेडिकल एजेंसियों के माध्यम से करोड़ों के कारोबार की धरातल तैयार की गई थी। इन दोनों मेडिकल एजेंसियों से क्षेत्र के संवदेनशील क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों पर बड़े स्तर पर सिरप की सप्लाई की गई। यही नहीं नेपाल से आने वाले लोगों ने भी कोडीनयुक्त कफ सीरप की बड़ी मात्रा में खरीद की। इसी के चलते विक्रय अभिलेख देने से मेडिकल एजेंसी के संचालक आनाकानी कर रहे हैं।
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मामले की जांच कर रहे उप निरीक्षक कौशल किशोर भार्गव के कदम भी रुके हुए हैं। उनका कहना है कि औषधि निरीक्षक से ही तकनीकी जानकारी मिल सकती है। मेडिकल एजेंसी भी बंद है, बिना औषधि निरीक्षक के जांच नहीं हो सकती है। वहीं पुलिस जांच रुकने से मामला गहराता जा रहा है। इस दौरान साक्ष्य भी मिटाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में नहीं मिल थे अभिलेख
अक्तूबर में श्रावस्ती के औषधि निरीक्षक श्रीकांत गुप्त ने नई बाजार स्थित अशोक मेडिकल स्टोर की जांच की तो कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री का खुलासा हुआ था। अशोक मेडिकल एजेंसी के प्रोपराइटर अशोक कुमार लाट के पास कफ सिरप के विक्रय अभिलेख नहीं थे। इसी दिन गोंडा के औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने अमन मेडिकल एजेंसी की जांच की तो कोडीनयुक्त कफ सिरप की बिक्री लंबे समय से किए जाने की पुष्टि हुई। वर्ष 2024 से अब तक के अभिलेख भी नहीं मिले। प्रोपराइटर संगीता भी अभिलेख नहीं दे सकीं। जबकि कोडीनयुक्त कफ सिरप बिक्री करने के सबूत एजेंसी में मिले, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई। शासन से निर्देश पर 19 नवंबर को एफआईआर दर्ज हुई थी।
एसआईआर की ड्यूटी के बाद तेज होगी जांच
अभी गोंडा में एसआईआर के कार्य में ड्यूटी लगी है। इसमें काफी समय लग रहा है। जल्द ही कार्य पूरा करके कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले की जांच आगे बढ़ाई जाएगी। मेडिकल एजेंसी ने क्षेत्र के दुकानों को जरूर दवा आपूर्ति की है। पुलिस को जांच में पूरा सहयोग देंगे।
- सुमित कुमार वर्मा, औषधि निरीक्षक गोंडा