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अनाथ बच्चों का सहारा बनेगी बाल सेवा योजना
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बलरामपुर। गंभीर बीमारियों से माता-पिता को खोने वाले अनाथ बच्चों के जीवन का मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना सहारा बनेगी। जीरो से 18 वर्ष तक के बच्चों को योजना का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश का निवासी होना अनिवार्य है। एक परिवार के अधिकतम दो बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा।
जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सामान्य बाल सेवा योजना में ऐसे बच्चों को जिन्होने एक मार्च 2020 के बाद कोरोना से भिन्न अन्य कारणों से अपने माता-पिता अथवा दोनों में से किसी एक को खोने वाले ऐसे बच्चों को भरण-पोषण, शिक्षा व चिकित्सा आदि की व्यवस्था के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।
ऐसे बच्चों की दो श्रेणी निर्धारित की गई है। जीरो से 18 वर्ष तक के ऐसे बच्चे माता-पिता या दोनों को एक मार्च 2020 के बाद खोया है उन्हें पहली श्रेणी में रखा जाएगा। दूसरी श्रेणी में जीरो से 18 वर्ष तक के माता-पिता अथवा दोनों को खोने वाले ऐसे बच्चों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख से कम होनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने के साथ एक परिवार के जैविक व कानूनी रुप से गोद लिए गए अधिकतम दो बच्चों को ही लाभ मिल सकेगा। निर्धारित प्रारुप को पूर्ण रुप से भरकर अभिलेखों के साथ विकास भवन स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध कराना होगा।
जिले में अब तक 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्राप्त होने वाले सभी आवेदन पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन में वैध पाए जाने वाले आवदेन पत्रों को कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद जीरो से 18 वर्ष तक के मान्यता प्राप्त विद्यालय में पंजीकरण कराने वाले बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 2500 रुपये की धनराशि दी जाएगी।
पूर्ण अनाथ बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर विभाग से संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं आवासित कराए गए हों उन्हें कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व केजीवीबी में प्रवेश दिलाया जाएगा।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सामान्य बाल सेवा योजना में ऐसे बच्चों को जिन्होने एक मार्च 2020 के बाद कोरोना से भिन्न अन्य कारणों से अपने माता-पिता अथवा दोनों में से किसी एक को खोने वाले ऐसे बच्चों को भरण-पोषण, शिक्षा व चिकित्सा आदि की व्यवस्था के लिए आर्थिक सहयोग दिया जाएगा।
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ऐसे बच्चों की दो श्रेणी निर्धारित की गई है। जीरो से 18 वर्ष तक के ऐसे बच्चे माता-पिता या दोनों को एक मार्च 2020 के बाद खोया है उन्हें पहली श्रेणी में रखा जाएगा। दूसरी श्रेणी में जीरो से 18 वर्ष तक के माता-पिता अथवा दोनों को खोने वाले ऐसे बच्चों के परिवार की वार्षिक आय तीन लाख से कम होनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने के साथ एक परिवार के जैविक व कानूनी रुप से गोद लिए गए अधिकतम दो बच्चों को ही लाभ मिल सकेगा। निर्धारित प्रारुप को पूर्ण रुप से भरकर अभिलेखों के साथ विकास भवन स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध कराना होगा।
जिले में अब तक 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्राप्त होने वाले सभी आवेदन पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन में वैध पाए जाने वाले आवदेन पत्रों को कमेटी के समक्ष रखा जाएगा।
कमेटी की रिपोर्ट के बाद जीरो से 18 वर्ष तक के मान्यता प्राप्त विद्यालय में पंजीकरण कराने वाले बच्चों के वैध संरक्षक के बैंक खाते में 2500 रुपये की धनराशि दी जाएगी।
पूर्ण अनाथ बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर विभाग से संचालित बाल्य देखभाल संस्थाओं आवासित कराए गए हों उन्हें कक्षा छह से 12 तक की शिक्षा के लिए अटल आवासीय विद्यालयों व केजीवीबी में प्रवेश दिलाया जाएगा।