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कोरोना के चलते नहीं मिला बजट, फिर से भेजा गया प्रस्ताव
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बलरामपुर। चालू वित्तीय वर्ष में जिला योजना समिति से 3.25 अरब रुपये के पास प्रस्ताव पर कोरोना महामारी के चलते 50 विभागों को विकास कार्य कराने के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी है।
अगले वित्तीय वर्ष के लिए इसी प्रस्ताव को जिला योजना समिति के माध्यम से शासन को फिर से भेजा गया है। जिले के सभी विभागों के विकास कार्यों पर अगले वित्तीय वर्ष में 3.25 अरब रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन से धनराशि मिलने के बाद विकास कार्य कराए जाएंगे। विकास कार्य परवान चढ़ने से जिले के 22 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिला योजना समिति की तरफ से 50 विभागों को विकास कार्य कराने के लिए तीन अरब 24 करोड़ 76 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।
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विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए कृषि विभाग ने 36 लाख, गन्ना विभाग ने 786.31 लाख, लघु सीमांत विभाग ने दो करोड़, पशुपालन विभाग ने 98.45 लाख और दुग्ध विकास विभाग ने 94.06 लाख की कार्ययोजना भेजी थी। सहकारिता ने 348.22 लाख, वन विभाग ने 613.54 लाख व ग्राम्य विकास विभाग ने 1460.00 लाख की कार्ययोजना तैयार की थी।
मनरेगा में 12209.00 लाख, पंचायती राज विभाग में छह करोड़, निजी लघु सिंचाई विभाग में 15.30 लाख व राजकीय लघु सिंचाई विभाग में 639.12 लाख का खाका तैयार किया गया था। अतिरिक्त ऊर्जा श्रोत पर 7.10 लाख रुपये, खादी ग्रामोद्योग से रोजगार सृजन पर 10 लाख, सड़क व पुल निर्माण पर पांच करोड़, पर्यावरण पर पांच लाख व पर्यटन पर 203.00 लाख रुपये खर्च करने की योजना तैयार की गई थी।
प्राथमिक शिक्षा पर 2224.00 लाख, माध्यमिक शिक्षा पर 445.00 लाख व प्राविधिक शिक्षा पर 93.21 लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना थी। प्रादेशिक दल विभाग की तरफ से ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं पर 13.50 लाख रुपये खर्च किया जाना था।
एलोपैथिक चिकित्सा पर तीन करोड़, अस्पतालों /औषधालयों में विशिष्ट सुविधा पर 70 लाख, परिवार कल्याण पर 150 लाख, होम्योपैथिक चिकित्सा पर 17.94 लाख, आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पर 97.94-97.94 लाख की कार्ययोजना बनाई गई थी।
ग्रामीण स्वच्छता पर 2469.60 लाख, पूल्ड आवास कालोनी पर एक करोड़, ग्रामीण आवास पर 1334.40 लाख व चारों नगरों के विकास पर 1633.95 लाख रुपये खर्च किए जाना था।
अनुसूचित जाति कल्याण पर 656.41 लाख, पिछड़ी जातियों के कल्याण पर 120 लाख, अल्पसंख्यक कल्याण पर 85 लाख, सामान्य जाति पर 714.72 लाख, जनजाति वजीफा पर 39.66 लाख रुपये के बजट की डिमांड की गई थी।
शिल्पकार प्रशिक्षण पर 1195.00 लाख, समाज कल्याण के कार्यों पर 2074.03 लाख, दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर 130 लाख और महिला कल्याण पर 588.60 लाख रुपये के विकास योजनाओं पर खर्च करने का मसौदा तैयार किया गया था।
कोविड-19 महामारी के दौर ने विकास कार्यक्रमों को परवान चढ़ाने वाले सभी विभागों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जिला योजना समिति के संयुक्त सचिव/डीएसटीओ संजीव कुमार ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के तीन अरब 24 करोड़ 76 लाख वाले प्रस्ताव को ही अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए फिर से भेजा गया है।
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अगले वित्तीय वर्ष के लिए इसी प्रस्ताव को जिला योजना समिति के माध्यम से शासन को फिर से भेजा गया है। जिले के सभी विभागों के विकास कार्यों पर अगले वित्तीय वर्ष में 3.25 अरब रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन से धनराशि मिलने के बाद विकास कार्य कराए जाएंगे। विकास कार्य परवान चढ़ने से जिले के 22 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिला योजना समिति की तरफ से 50 विभागों को विकास कार्य कराने के लिए तीन अरब 24 करोड़ 76 लाख रुपये खर्च करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।
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विकास योजनाओं पर खर्च करने के लिए कृषि विभाग ने 36 लाख, गन्ना विभाग ने 786.31 लाख, लघु सीमांत विभाग ने दो करोड़, पशुपालन विभाग ने 98.45 लाख और दुग्ध विकास विभाग ने 94.06 लाख की कार्ययोजना भेजी थी। सहकारिता ने 348.22 लाख, वन विभाग ने 613.54 लाख व ग्राम्य विकास विभाग ने 1460.00 लाख की कार्ययोजना तैयार की थी।
मनरेगा में 12209.00 लाख, पंचायती राज विभाग में छह करोड़, निजी लघु सिंचाई विभाग में 15.30 लाख व राजकीय लघु सिंचाई विभाग में 639.12 लाख का खाका तैयार किया गया था। अतिरिक्त ऊर्जा श्रोत पर 7.10 लाख रुपये, खादी ग्रामोद्योग से रोजगार सृजन पर 10 लाख, सड़क व पुल निर्माण पर पांच करोड़, पर्यावरण पर पांच लाख व पर्यटन पर 203.00 लाख रुपये खर्च करने की योजना तैयार की गई थी।
प्राथमिक शिक्षा पर 2224.00 लाख, माध्यमिक शिक्षा पर 445.00 लाख व प्राविधिक शिक्षा पर 93.21 लाख रुपये खर्च किए जाने की योजना थी। प्रादेशिक दल विभाग की तरफ से ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिताओं पर 13.50 लाख रुपये खर्च किया जाना था।
एलोपैथिक चिकित्सा पर तीन करोड़, अस्पतालों /औषधालयों में विशिष्ट सुविधा पर 70 लाख, परिवार कल्याण पर 150 लाख, होम्योपैथिक चिकित्सा पर 17.94 लाख, आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पर 97.94-97.94 लाख की कार्ययोजना बनाई गई थी।
ग्रामीण स्वच्छता पर 2469.60 लाख, पूल्ड आवास कालोनी पर एक करोड़, ग्रामीण आवास पर 1334.40 लाख व चारों नगरों के विकास पर 1633.95 लाख रुपये खर्च किए जाना था।
अनुसूचित जाति कल्याण पर 656.41 लाख, पिछड़ी जातियों के कल्याण पर 120 लाख, अल्पसंख्यक कल्याण पर 85 लाख, सामान्य जाति पर 714.72 लाख, जनजाति वजीफा पर 39.66 लाख रुपये के बजट की डिमांड की गई थी।
शिल्पकार प्रशिक्षण पर 1195.00 लाख, समाज कल्याण के कार्यों पर 2074.03 लाख, दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण पर 130 लाख और महिला कल्याण पर 588.60 लाख रुपये के विकास योजनाओं पर खर्च करने का मसौदा तैयार किया गया था।
कोविड-19 महामारी के दौर ने विकास कार्यक्रमों को परवान चढ़ाने वाले सभी विभागों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जिला योजना समिति के संयुक्त सचिव/डीएसटीओ संजीव कुमार ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के तीन अरब 24 करोड़ 76 लाख वाले प्रस्ताव को ही अगले वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए फिर से भेजा गया है।