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Balrampur News: बलरामपुर मंथन में गूंजी जिले की मिट्टी, इतिहास और संस्कृति की आवाज

Sun, 24 May 2026 10:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Sun, 24 May 2026 10:38 PM IST
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Balrampur Manthan resonates with the voices of the district's soil, history and culture
फोटो-24- नगर के एमएलके महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं व छात्राएं। स्रोत आयो
बलरामपुर। अपनी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और लोकपरंपराओं के लिए पहचाने जाने वाले बलरामपुर जिले की स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। रविवार को एमएलके पीजी कॉलेज के सभागार में बलरामपुर मंथन कार्यक्रम में जिले की मिट्टी, इतिहास, साहित्य, लोक जीवन और सामाजिक चेतना पर भावपूर्ण चर्चा हुई।
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आयोजन बलरामपुर राजपरिवार के उत्तराधिकारी जयेंद्र प्रताप सिंह के संरक्षण में शोध छात्र मनीष कुमार और अभय त्रिपाठी ने अपनी टीम के साथ किया। वक्ताओं ने कहा कि बलरामपुर केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, सहअस्तित्व और सामाजिक मूल्यों की जीवंत धरोहर है, जिसे सहेजना आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है।
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सेवानिवृत्त आईआरएस चंद्र राम चौधरी ने थारू जनजाति की विकास यात्रा पर चर्चा करते हुए कहा कि बलरामपुर की पहचान यहां की विविध संस्कृति और जनजातीय परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। एमएलके पीजी कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रकाश चंद्र गिरि ने इतिहास के पन्नों में दर्ज जिले के गौरवशाली अतीत को याद करते हुए कहा कि यह भूमि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक रही है। साहित्य संगम के अध्यक्ष अरुण प्रकाश पांडेय ने साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की मिट्टी में लोककथाएं, संवेदनाएं और रचनात्मकता रची-बसी है। वहीं प्राचार्य जनार्दन प्रसाद पांडेय ने ‘बलरामपुर के कुछ किस्से’ साझा करते हुए पुराने समय की सामाजिक आत्मीयता और सांस्कृतिक वातावरण को याद किया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में समाजहित में कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। समाजसेविका शुचि वर्मा, शिक्षक मोहम्मद आसिम, सफाईकर्मी राजकुमार वाल्मीकि, साहित्यकार वैष्णवी और आशीष कुमार वर्मा को महाराज ने सम्मान प्रदान किया। इस दौरान ज्योति वर्मा ने अपनी पुस्तक ‘मेरी स्मृतियां’ जनमानस को समर्पित की। महाराज ने युवाओं से अपने जिले की पहचान और विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन आशीष कुमार वर्मा ने किया। इस अवसर पर अनुज सिंह, डॉ. कौशल्या गुप्ता, सर्वेश सिंह, अनामिका सिंह, नीरजा शुक्ला, समीर, अवधेश, वीरेन्द्र, श्याम सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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