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मिलकर करनी होगी बाघों की सुरक्षा
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बलरामपुर। टाइगर नेचर क्लब व एमएलके पीजी कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में विश्व बाघ दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने बाघों की सुरक्षा पर प्रकाश डाला। सभी से मिलकर बाघों की सुरक्षा करने की अपील की गई।
पर्यावरणविद् प्रो. नागेन्द्र सिंह ने कहा कि विश्व में बाघों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। बाघ कभी भी नरभक्षी नहीं होते हैं। इंसान डर के चलते बाघों को नरभक्षी समझते हैं और उनके जान के दुश्मन बने हुए हैं। हम सभी को अपने जहन से नरभक्षी शब्द निकाल करके बाघों की सुरक्षा में आगे आना होगा। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके प्राकृतिवास को दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।
गोष्ठी को डीएफओ रजनीकांत मित्तल, डॉ. सदगुरु प्रसाद, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, डॉ. शिव महेन्द्र सिंह, प्रखर त्रिपाठी व आनंद वाजपेयी आदि ने संबोधित कर विश्व बाघ दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए।
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पर्यावरणविद् प्रो. नागेन्द्र सिंह ने कहा कि विश्व में बाघों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। बाघ कभी भी नरभक्षी नहीं होते हैं। इंसान डर के चलते बाघों को नरभक्षी समझते हैं और उनके जान के दुश्मन बने हुए हैं। हम सभी को अपने जहन से नरभक्षी शब्द निकाल करके बाघों की सुरक्षा में आगे आना होगा। बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके प्राकृतिवास को दुरुस्त किए जाने की जरूरत है।
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गोष्ठी को डीएफओ रजनीकांत मित्तल, डॉ. सदगुरु प्रसाद, डॉ. आरके पांडेय, डॉ. आकांक्षा त्रिपाठी, डॉ. शिव महेन्द्र सिंह, प्रखर त्रिपाठी व आनंद वाजपेयी आदि ने संबोधित कर विश्व बाघ दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए।
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