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Balrampur News: अल्लाह कुबूल करता है रमजान में मांगी दुआ
Tue, 11 Apr 2023 11:28 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 11 Apr 2023 11:28 PM IST
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बलरामपुर। सुबह से शाम तक सिर्फ भूखा रहना रोजा नहीं माना जाता है। रोजा तभी मुकम्मल माना जाएगा, जब आप ईमानदारी से रोजा रखकर पांचों वक्त की नमाज पढ़ें। कुरान-ए-पाक की तिलावत करने के साथ ही अपनी संपत्ति से सदका निकालकर गरीबों की मदद करें। रमजान में रोजा रखने वालों की नेक दुआ अल्लाह जरूर कुबूल करता है।
ये बातें मंगलवार को खानवादे सरकार फजले रहमा के पीरजादे शकेबुर्रहमान उर्फ भय्यू मियां ने रोजे की अहमियत बताते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि यह रमजान का दूसरा आशरा मगफिरत चल रहा है, इसमें सभी अकीदतमंद रोजा रखने के साथ नमाज और कुरान-ए-पाक पढ़ने के बाद गुुनाहों की माफी मांगें।
तबियत खराब होने का बहाना बताकर रोजा न रखने वाले लोग अल्लाह को नापसंद होते हैं। रोजा आप तभी छोड़ सकते हैं, जब डॉक्टर आप को रोजा रखने से मना कर दें, लेकिन तबियत ठीक होने के बाद आपको छूटा हुआ रोजा पूरा करना होगा। जानबूझकर एक रोजा छोड़ने वाले शख्स को एक रोजे के बदले 60 रोजा रखना पड़ेगा। सदका और जकात देते समय अपने घर के आसपास जरूर देख लें कि कोई परिवार परेशान हाल में तो नहीं है। अगर है तो सबसे पहले उस परिवार की मदद करें।
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ये बातें मंगलवार को खानवादे सरकार फजले रहमा के पीरजादे शकेबुर्रहमान उर्फ भय्यू मियां ने रोजे की अहमियत बताते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि यह रमजान का दूसरा आशरा मगफिरत चल रहा है, इसमें सभी अकीदतमंद रोजा रखने के साथ नमाज और कुरान-ए-पाक पढ़ने के बाद गुुनाहों की माफी मांगें।
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तबियत खराब होने का बहाना बताकर रोजा न रखने वाले लोग अल्लाह को नापसंद होते हैं। रोजा आप तभी छोड़ सकते हैं, जब डॉक्टर आप को रोजा रखने से मना कर दें, लेकिन तबियत ठीक होने के बाद आपको छूटा हुआ रोजा पूरा करना होगा। जानबूझकर एक रोजा छोड़ने वाले शख्स को एक रोजे के बदले 60 रोजा रखना पड़ेगा। सदका और जकात देते समय अपने घर के आसपास जरूर देख लें कि कोई परिवार परेशान हाल में तो नहीं है। अगर है तो सबसे पहले उस परिवार की मदद करें।
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