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Balrampur News: विकास का बजट दबाए हैं 70 पंचायत
Sun, 03 Aug 2025 08:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 03 Aug 2025 08:57 PM IST
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बलरामपुर। 70 ग्राम पंचायतों ने विकास के बजट को दबा रखा है। मार्च से ही पंचायतें कोई विकास कार्य नहीं कर रहीं हैं। सीएम डैशबोर्ड पर समीक्षा में यह गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। पंचायतीराज विभाग ने संबंधित पंचायतों के सचिवों से जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव के करीब आने पर विकास कार्य के लिए अभी पंचायतें हाथ बटोरे हैं।
पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला पंचायतीराज अधिकारी से जवाब तलब किया है। डीपीआरओ ने भी 73 पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में बजट व्यय की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कार्रवाई के दायरे में सदर ब्लॉक की 12, हरैया सतघरवा की सात, रेहराबाजार की पांच, गैसड़ी की नौ, पचपेड़वा की 17, गैड़ास बुजुर्ग की चार, तुलसीपुर की 13 और उतरौला की तीन ग्राम पंचायतें आईं हैं। इन पंचायतों के सचिव और प्रधानों ने रणनीति तैयार बजट को रोके रखा है। जिससे जब चुनावी शोर तेज हो तब खर्च करें।
यहां होता है इस बजट का इस्तेमाल
पंचम राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा मरम्मत और रखरखाव पर खर्च होता है, जबकि बाकी का उपयोग पंचायत सचिवालय के बिजली बिल, पंचायत सहायक, ग्राम प्रधान व केयरटेकर (स्वयं सहायता समूह) को मानदेय देने में होता है।
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नोटिस जारी कर सभी संबंधित सचिवों से जवाब मांगा गया है। समय से बजट खर्च न करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।
-- श्रेया उपाध्याय, डीपीआरओ
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पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए जिला पंचायतीराज अधिकारी से जवाब तलब किया है। डीपीआरओ ने भी 73 पंचायत सचिवों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में बजट व्यय की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कार्रवाई के दायरे में सदर ब्लॉक की 12, हरैया सतघरवा की सात, रेहराबाजार की पांच, गैसड़ी की नौ, पचपेड़वा की 17, गैड़ास बुजुर्ग की चार, तुलसीपुर की 13 और उतरौला की तीन ग्राम पंचायतें आईं हैं। इन पंचायतों के सचिव और प्रधानों ने रणनीति तैयार बजट को रोके रखा है। जिससे जब चुनावी शोर तेज हो तब खर्च करें।
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यहां होता है इस बजट का इस्तेमाल
पंचम राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले बजट का 50 प्रतिशत हिस्सा मरम्मत और रखरखाव पर खर्च होता है, जबकि बाकी का उपयोग पंचायत सचिवालय के बिजली बिल, पंचायत सहायक, ग्राम प्रधान व केयरटेकर (स्वयं सहायता समूह) को मानदेय देने में होता है।
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नोटिस जारी कर सभी संबंधित सचिवों से जवाब मांगा गया है। समय से बजट खर्च न करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी।