{"_id":"595bdccb4f1c1be71c8b464d","slug":"21499192523-balrampur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदहाल है शिक्षा का मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदहाल है शिक्षा का मंदिर
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदहाल है शिक्षा का मंदिर
तुलसीपुर-बलरामपुर। आजादी के समय से ही संचालित स्वतंत्र भारत इंटर कालेज प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पूरी तरह बदहाली का शिकार है। विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है और बाउंड्रीवॉल पूरी तरह टूट चुकी है। विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों को दुर्घटना की डर बना रहता है। बिना छत के ही विद्यार्थी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे है। नगरवासियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विद्यालय की बदहाली दूर किए जाने की मांग की है।
नगरवासी संतोष जायसवाल, श्याम अग्रहरि, अजय गुप्ता, श्याम सुंदर व सुखदेव आर्य आदि ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि देेश की आजादी के समय से संचालित स्वतंत्र भारत इंटर कालेज की स्थापना 1948 में की गई थी। नगर की शिक्षा का केंद्र बिंदु रहे इस विद्यालय में आसपास के ही नहीं बल्कि दूसरे जनपदों से भी बच्चे यहां पढ़ने आते थे। इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करके तमाम लोग उच्च सरकारी पदों पर रहते हुए कार्य किया। नगर का यह विद्यालय प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। विद्यालय की छतों में कई जगह दरार है। प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। विद्यालय की बाउंड्रीवॉल भी गिर चुकी है। कई वर्षो से विद्यालय का रंगरोगन भी नहीं कराया गया है जिसके चलते दीवारों में दरारें पड़ने लगी है। इन लोगों ने मुख्यमंत्री से विद्यालय भवन की मरम्मत कराए जाने तथा शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाए जाने की मांग की है।
विज्ञापन
तुलसीपुर-बलरामपुर। आजादी के समय से ही संचालित स्वतंत्र भारत इंटर कालेज प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पूरी तरह बदहाली का शिकार है। विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है और बाउंड्रीवॉल पूरी तरह टूट चुकी है। विद्यालय भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण यहां पढ़ने वाले बच्चों को दुर्घटना की डर बना रहता है। बिना छत के ही विद्यार्थी कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे है। नगरवासियों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर विद्यालय की बदहाली दूर किए जाने की मांग की है।
नगरवासी संतोष जायसवाल, श्याम अग्रहरि, अजय गुप्ता, श्याम सुंदर व सुखदेव आर्य आदि ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि देेश की आजादी के समय से संचालित स्वतंत्र भारत इंटर कालेज की स्थापना 1948 में की गई थी। नगर की शिक्षा का केंद्र बिंदु रहे इस विद्यालय में आसपास के ही नहीं बल्कि दूसरे जनपदों से भी बच्चे यहां पढ़ने आते थे। इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करके तमाम लोग उच्च सरकारी पदों पर रहते हुए कार्य किया। नगर का यह विद्यालय प्रशासनिक उपेक्षा के चलते अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। विद्यालय की छतों में कई जगह दरार है। प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। विद्यालय की बाउंड्रीवॉल भी गिर चुकी है। कई वर्षो से विद्यालय का रंगरोगन भी नहीं कराया गया है जिसके चलते दीवारों में दरारें पड़ने लगी है। इन लोगों ने मुख्यमंत्री से विद्यालय भवन की मरम्मत कराए जाने तथा शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार लाए जाने की मांग की है।
विज्ञापन