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कायाकल्प के मानकों पर खरे नहीं उतरे 1897 स्कूल
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बलरामपुर। विभागीय अफसरों में तालमेल न होने से परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। शासन स्तर से निर्धारित 14 पैरामीटर के मानक पर सुधार कराने में जिले के 1897 परिषदीय स्कूल खरे नहीं उतर सके हैं। जिम्मेदार विभागीय अफसरों ने कोरोना काल में बच्चों की गैर मौजूदगी में सभी स्कूलों में 14 पैरामीटर के मानक पर कायाकल्प कराने का शानदार मौका गंवा दिया। जिले से लेकर गांवों तक तैनात संबंधित विभागों के सभी अफसरों को 30 सितंबर तक जिले के शत-प्रतिशत परिषदीय स्कूलों को मानक के अनुरूप चकाचक कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गौरतलब हो कि विगत दो सालों से जिले के सभी परिषदीय स्कूलों को 14 पैरामीटर पर चकाचक बनाने की जद्दोजहद चल रही है। तत्कालीन सीडीओ कृत्तिका ज्योत्सना के तमाम प्रयास के बाद स्कूलों का कायाकल्प शुरू हआ था। उनका स्थानांतरण होते ही स्कूलों के कायाकल्प कराने के सभी प्रयास धरे के धरे रह गये।
वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासन ने जिले के 1247 प्राथमिक, 333 उच्च प्राथमिक व 317 कंपोजिट स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास राज्य वित्त आयोग की धनराशि से 14 पैरामीटर पर कायाकल्प कराने का निर्देश दिया। शासन ने अपने निर्देश यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से पंचायत घरों का निर्माण कराया जा रहा है इसीलिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि का प्रयोग किया जाएगा।
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मनरेगा योजना से स्कूलों में शौचालय व चहारदीवारी निर्माण के साथ-साथ पौधरोपण और खेलकूद के मैदानों को विकसित कराने की योजना तैयार की गई। 14 पैरामीटर में शुद्ध व सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिकाओं के अलग-अलग बाल मैत्रिक शौचालय, 3-3 यूरीनल के साथ मूत्रालय, शौचालयों व मूत्रालयों में नल की आपूर्ति व टायलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा-कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, रसोईघर का सुसज्जीकरण, स्कूलों की समुचित रंगाई-पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षा-कक्ष में क्रियाशील विद्युत संयोजन उपयुक्त वायरिंग, विद्युत उपकरण, मनरेगा योजना के तहत चहरदीवारी, खेलकूद का मैदान व पौधरोपण को शामिल किया गया है।
कोरोना महामारी से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अप्रैल 2020 से अभी तक स्कूलों में नहीं बुलाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की गैर मौजूदगी में स्कूलों को 14 पैरामीटर पर कायाकल्प आसानी से कराया जा सकता था। लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते स्कूलों के कायाकल्प की योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
डीसी निर्माण एनके सिंह ने बताया कि जिले के 300 परिषदीय स्कूल 14 पैरामीटर के कायाकल्प योजना से मात्र एक कदम दूर हैं। शासन स्तर से लगातार कायाकल्प योजना की नियमित निगरानी की जा रही हैं। इन तीन सौ स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालयों का निर्माण न होने से शासन के मानक पर खरे नहीं उतर सके हैं। जबकि इन 300 स्कूलों में 13 पैरामीटर पर कायाकल्प पूरा हो चुका है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि डीपीआरओ, डीसी मनरेगा, सभी नौ ब्लॉकों के बीडीओ व एडीओ पंचायतों और 800 ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों को 30 सितंबर तक जिले के 1897 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों में 14 पैरामीटर कायाकल्प कराने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
बीएसए को हर सप्ताह की प्रगति रिपोर्ट डीएम कार्यालय को उपलब्ध कराने, सभी नौ शिक्षा क्षेत्रों के बीईओ को सचिवों व प्रधानों से संपर्क कर कायाकल्प कराने व प्रधानों को 30 सितंबर तक राज्य वित्त आयोग की धनराशि 14 पैरामीटर पर मानक के अनुरूप कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। निर्देश का पालन न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गौरतलब हो कि विगत दो सालों से जिले के सभी परिषदीय स्कूलों को 14 पैरामीटर पर चकाचक बनाने की जद्दोजहद चल रही है। तत्कालीन सीडीओ कृत्तिका ज्योत्सना के तमाम प्रयास के बाद स्कूलों का कायाकल्प शुरू हआ था। उनका स्थानांतरण होते ही स्कूलों के कायाकल्प कराने के सभी प्रयास धरे के धरे रह गये।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासन ने जिले के 1247 प्राथमिक, 333 उच्च प्राथमिक व 317 कंपोजिट स्कूलों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास राज्य वित्त आयोग की धनराशि से 14 पैरामीटर पर कायाकल्प कराने का निर्देश दिया। शासन ने अपने निर्देश यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रीय वित्त आयोग की धनराशि से पंचायत घरों का निर्माण कराया जा रहा है इसीलिए राज्य वित्त आयोग की धनराशि का प्रयोग किया जाएगा।
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मनरेगा योजना से स्कूलों में शौचालय व चहारदीवारी निर्माण के साथ-साथ पौधरोपण और खेलकूद के मैदानों को विकसित कराने की योजना तैयार की गई। 14 पैरामीटर में शुद्ध व सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिकाओं के अलग-अलग बाल मैत्रिक शौचालय, 3-3 यूरीनल के साथ मूत्रालय, शौचालयों व मूत्रालयों में नल की आपूर्ति व टायलीकरण, दिव्यांग सुलभ शौचालय, मल्टीपल हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा-कक्ष के फर्श का टायलीकरण, श्याम पट्ट, रसोईघर का सुसज्जीकरण, स्कूलों की समुचित रंगाई-पुताई, विद्यालय परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिंग, कक्षा-कक्ष में क्रियाशील विद्युत संयोजन उपयुक्त वायरिंग, विद्युत उपकरण, मनरेगा योजना के तहत चहरदीवारी, खेलकूद का मैदान व पौधरोपण को शामिल किया गया है।
कोरोना महामारी से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए अप्रैल 2020 से अभी तक स्कूलों में नहीं बुलाया जा रहा है। ऐसे में बच्चों की गैर मौजूदगी में स्कूलों को 14 पैरामीटर पर कायाकल्प आसानी से कराया जा सकता था। लेकिन विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते स्कूलों के कायाकल्प की योजना परवान नहीं चढ़ सकी।
डीसी निर्माण एनके सिंह ने बताया कि जिले के 300 परिषदीय स्कूल 14 पैरामीटर के कायाकल्प योजना से मात्र एक कदम दूर हैं। शासन स्तर से लगातार कायाकल्प योजना की नियमित निगरानी की जा रही हैं। इन तीन सौ स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालयों का निर्माण न होने से शासन के मानक पर खरे नहीं उतर सके हैं। जबकि इन 300 स्कूलों में 13 पैरामीटर पर कायाकल्प पूरा हो चुका है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि डीपीआरओ, डीसी मनरेगा, सभी नौ ब्लॉकों के बीडीओ व एडीओ पंचायतों और 800 ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों को 30 सितंबर तक जिले के 1897 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों में 14 पैरामीटर कायाकल्प कराने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
बीएसए को हर सप्ताह की प्रगति रिपोर्ट डीएम कार्यालय को उपलब्ध कराने, सभी नौ शिक्षा क्षेत्रों के बीईओ को सचिवों व प्रधानों से संपर्क कर कायाकल्प कराने व प्रधानों को 30 सितंबर तक राज्य वित्त आयोग की धनराशि 14 पैरामीटर पर मानक के अनुरूप कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। निर्देश का पालन न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।