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Balrampur News: विधायक निधि की 162 परियोजनाएं अधूरी, कैसे हो विकास
Fri, 28 Feb 2025 12:24 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 28 Feb 2025 12:24 AM IST
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बलरामपुर में विधायक निधि से लगाया गया प्रवेशद्वार।
बलरामपुर। विधायक निधि से जिले में होने वाले विकास कार्यों की रफ्तार काफी सुस्त है। कोई भी अधिकारी इसका कारण बता नहीं पा रहा है। मामला माननीयों से जो जुड़ा है। समीक्षा में कार्यदायी संस्थाओं को चेतावनी भी दी जाती है। इसके बाद भी स्वीकृत करीब 162 परियोजनाएं अधूरी हैं। ऐसा तब है जब वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है।
विकास कार्यों के लिए विधायक को प्रत्येक वर्ष पांच करोड़ की धनराशि का आवंटन होता है। इसके साथ ही पूर्व में अवशेष बजट भी जुड़ता है। जिले में चार विधानसभाओं के लिए 20 करोड़ रुपयों का आवंटन हो चुका है। पूर्व के अवशेष 18 लाख रुपये भी निधि में जोड़कर प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं। गैसड़ी और उतरौला विधानसभा क्षेत्रों में आवंटित बजट के सापेक्ष परियोजनाओं के कार्य शुरू ही नहीं हो सके हैं।
विधानसभावार आवंटित बजट के सापेक्ष कार्यों की स्थिति
विधानसभा - मिला बजट - प्रस्तावित कार्य- स्वीकृत- स्वीकृत बजट - व्यय बजट
तुलसीपुर - 505 लाख - 42 - 34 - 462.70 लाख - 219.93 लाख
गैसड़ी - 500 लाख - 39 - 20 - 254.37 लाख - 164.80 लाख
उतरौला - 502 लाख - 71 - 31 - 255.11 लाख - 249.71 लाख
सदर - 511 लाख - 86 - 77 - 482.12 लाख - 434.41 लाख
एमएलसी ने निधि से नहीं दिया बजट
तीन विधान परिषद सदस्य ऐसे हैं, जिनके क्षेत्र जिले में शामिल हैं। लेकिन तीनों एमएलसी ने विकास के लिए कोई बजट नहीं दिया है। इसमें गोंडा-बलरामपुर विधानसभा परिषद क्षेत्र भी शामिल है। एमएलसी अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह को पांच करोड़ रुपये का बजट मिला है, उन्होंने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। इसी तरह शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को भी 9.69 करोड़ रुपये का बजट मिला, स्नातक एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के पास भी पांच करोड़ का बजट है। उनका कार्य क्षेत्र भी है लेकिन जिले के विकास के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
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पोर्टल बयां कर रहा हकीकत
विकास के दावों की हकीकत एमएलए फंड पोर्टल बयां कर रहा है। विकास के लिए किन जनप्रतिनिधियों ने कौन से प्रस्ताव दिए हैं और उनकी हकीकत क्या है, इसका पूरा ब्योरा उपलब्ध है। विकास कार्यों की प्रगति अधूरी है।
जल्द पूरी की जाएगी प्रक्रिया
विधायक निधि से प्रस्तावित कार्यों को समय से पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों के प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं है, उनकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सभी विधानसभा क्षेत्रों से प्रस्ताव मिल गए हैं।
राघवेंद्र तिवारी, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास
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विकास कार्यों के लिए विधायक को प्रत्येक वर्ष पांच करोड़ की धनराशि का आवंटन होता है। इसके साथ ही पूर्व में अवशेष बजट भी जुड़ता है। जिले में चार विधानसभाओं के लिए 20 करोड़ रुपयों का आवंटन हो चुका है। पूर्व के अवशेष 18 लाख रुपये भी निधि में जोड़कर प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं। गैसड़ी और उतरौला विधानसभा क्षेत्रों में आवंटित बजट के सापेक्ष परियोजनाओं के कार्य शुरू ही नहीं हो सके हैं।
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विधानसभावार आवंटित बजट के सापेक्ष कार्यों की स्थिति
विधानसभा - मिला बजट - प्रस्तावित कार्य- स्वीकृत- स्वीकृत बजट - व्यय बजट
तुलसीपुर - 505 लाख - 42 - 34 - 462.70 लाख - 219.93 लाख
गैसड़ी - 500 लाख - 39 - 20 - 254.37 लाख - 164.80 लाख
उतरौला - 502 लाख - 71 - 31 - 255.11 लाख - 249.71 लाख
सदर - 511 लाख - 86 - 77 - 482.12 लाख - 434.41 लाख
एमएलसी ने निधि से नहीं दिया बजट
तीन विधान परिषद सदस्य ऐसे हैं, जिनके क्षेत्र जिले में शामिल हैं। लेकिन तीनों एमएलसी ने विकास के लिए कोई बजट नहीं दिया है। इसमें गोंडा-बलरामपुर विधानसभा परिषद क्षेत्र भी शामिल है। एमएलसी अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह को पांच करोड़ रुपये का बजट मिला है, उन्होंने कोई प्रस्ताव नहीं दिया है। इसी तरह शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को भी 9.69 करोड़ रुपये का बजट मिला, स्नातक एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के पास भी पांच करोड़ का बजट है। उनका कार्य क्षेत्र भी है लेकिन जिले के विकास के लिए कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है।
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पोर्टल बयां कर रहा हकीकत
विकास के दावों की हकीकत एमएलए फंड पोर्टल बयां कर रहा है। विकास के लिए किन जनप्रतिनिधियों ने कौन से प्रस्ताव दिए हैं और उनकी हकीकत क्या है, इसका पूरा ब्योरा उपलब्ध है। विकास कार्यों की प्रगति अधूरी है।
जल्द पूरी की जाएगी प्रक्रिया
विधायक निधि से प्रस्तावित कार्यों को समय से पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिन क्षेत्रों के प्रस्ताव अभी स्वीकृत नहीं है, उनकी प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सभी विधानसभा क्षेत्रों से प्रस्ताव मिल गए हैं।
राघवेंद्र तिवारी, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास