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पहाड़ी नालों में उफान, कई गांवों की आफत में जान
Updated Sun, 15 Jul 2018 10:32 PM IST
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खरझार नाला उफनाया, 12 गांव बने टापू
बलरामपुर। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश के चलते रविवार को खरझार नाले में फिर जबरदस्त उफान आ गया है। उफान के चलते करीब 12 गांव टापू बन गए है। लोगों के घरों में रखा अनाज व अन्य सामान भी भीग गया है।
रविवार को खरझार पहाड़ी नाले में आए उफान से लहेरी, शांतीनगर, रामगढ़ मैटहवा, हरिहरनगर, सुगानगर व औरहिया गांव में पानी घुस गया। लोगों के घरों में भी पानी भर गया है। घर में रखा अनाज व अन्य सामान भीग गया है।
ग्रामीण दिनेश, पवन कुमार, संतोष, रिजवान, ह्रदयराम, सफीउल्ला, संजय व अब्दुल सलाम ने बताया कि बीते एक सप्ताह में दो बार खरझार नाने की बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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मवेशियों को सड़क पर बांधना पड़ रहा है। महराजगंज तराई ललिया रोड पर लोग बाढ़ के पानी से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे है। इस रोड पर बाढ़ के चलते आवागमन ठप हो गया है।
खेतों में लगी सैकड़ों बीघे धान व दलहनी फसल पानी में डूब गई है। सुभानगर, रुपनगर, रामस्वरुप पुरवा, पटोहाकोट, कोटिया, जगरामपुरवा, अलीनगर, भवनियापुर, बेला-बेली, दरहारपुर, मिर्जापुर, मध्यनगर, विजईडीह, महादेव गोसाई, बनकटवा, कनहरा तिवारीडीह व लैबुड्डी आदि गांव बाढ़ की चपेट में है।
कई गांव के लोगों का आवागमन दूभर हो गया है। पहाड़ी नाले में बार-बार आ रही बाढ़ से क्षेत्रवासी दहशत में है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ के बाद हर साल प्रशासन बांध आदि बनाने की बात तो करता है लेकिन आज तक इस दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया।
हरसाल लोगों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन लोगों ने जिला प्रशासन से बाढ़ पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
इस संबंध में एसडीएम तुलसीपुर एसके त्रिपाठी ने बताया कि खरझार पहाड़ी नाले में उफान आने की सूचना मिली है। मैं खुद मौके का जायजा लेने पहुंच रहा हूं। पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी।
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बलरामपुर। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश के चलते रविवार को खरझार नाले में फिर जबरदस्त उफान आ गया है। उफान के चलते करीब 12 गांव टापू बन गए है। लोगों के घरों में रखा अनाज व अन्य सामान भी भीग गया है।
रविवार को खरझार पहाड़ी नाले में आए उफान से लहेरी, शांतीनगर, रामगढ़ मैटहवा, हरिहरनगर, सुगानगर व औरहिया गांव में पानी घुस गया। लोगों के घरों में भी पानी भर गया है। घर में रखा अनाज व अन्य सामान भीग गया है।
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ग्रामीण दिनेश, पवन कुमार, संतोष, रिजवान, ह्रदयराम, सफीउल्ला, संजय व अब्दुल सलाम ने बताया कि बीते एक सप्ताह में दो बार खरझार नाने की बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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मवेशियों को सड़क पर बांधना पड़ रहा है। महराजगंज तराई ललिया रोड पर लोग बाढ़ के पानी से जान जोखिम में डालकर गुजर रहे है। इस रोड पर बाढ़ के चलते आवागमन ठप हो गया है।
खेतों में लगी सैकड़ों बीघे धान व दलहनी फसल पानी में डूब गई है। सुभानगर, रुपनगर, रामस्वरुप पुरवा, पटोहाकोट, कोटिया, जगरामपुरवा, अलीनगर, भवनियापुर, बेला-बेली, दरहारपुर, मिर्जापुर, मध्यनगर, विजईडीह, महादेव गोसाई, बनकटवा, कनहरा तिवारीडीह व लैबुड्डी आदि गांव बाढ़ की चपेट में है।
कई गांव के लोगों का आवागमन दूभर हो गया है। पहाड़ी नाले में बार-बार आ रही बाढ़ से क्षेत्रवासी दहशत में है। लोगों का आरोप है कि बाढ़ के बाद हर साल प्रशासन बांध आदि बनाने की बात तो करता है लेकिन आज तक इस दिशा में कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया।
हरसाल लोगों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन लोगों ने जिला प्रशासन से बाढ़ पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नुकसान का मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
इस संबंध में एसडीएम तुलसीपुर एसके त्रिपाठी ने बताया कि खरझार पहाड़ी नाले में उफान आने की सूचना मिली है। मैं खुद मौके का जायजा लेने पहुंच रहा हूं। पीड़ितों की हर संभव मदद की जाएगी।