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विसंगति फिर भी स्वागत योग्य
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Tue, 13 Dec 2016 11:39 PM IST
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प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने की संस्तुति पर जिले के राज्यकर्मचारियों में हर्ष व्याप्त है। कर्मचारी नेताओं ने सातवें वेतन आयोग पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसका स्वागत किया है जबकि कुछ ने इसे छोटे कर्मचारियों के हित में नहीं बताया है। उनका कहना था कि इसमें छोटे कर्मचारियों का ध्यान नहीं दिया गया।
कर्मचारी नेता बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार ने बड़े कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग में अधिक लाभ देने की संस्तुति की है। जबकि छोटे कर्मचारियों का नुकसान अधिक हो रहा है। वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए। उनका कहना है कि छोटे और बड़े कर्मचारियों की सैलरी में अंतर अधिक है, जिसे कम करने की जरूरत थी। शिक्षक नेता डॉ. घनश्याम चौबे का कहना है कि प्रदेश सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देकर सराहनीय कार्य किया है। इससे सभी कर्मचारियों को लाभ होगा। कुछ विसंगतियां अभी भी रह गई हैं, जिस पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत थी। इस सं्स्तुति में बड़े तथा छोटे कर्मचारियों के बीच एक बड़ी खाई है, जिसे सरकार को भरने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सातवां वेतन लगने के बाद भी केंद्रीय कर्मियों से कम ही वेतन रहेगा। इसके देखते हुए प्रस्ताव बनाना चाहिए।
कर्मचारी नेता बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार ने बड़े कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग में अधिक लाभ देने की संस्तुति की है। जबकि छोटे कर्मचारियों का नुकसान अधिक हो रहा है। वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए। उनका कहना है कि छोटे और बड़े कर्मचारियों की सैलरी में अंतर अधिक है, जिसे कम करने की जरूरत थी। शिक्षक नेता डॉ. घनश्याम चौबे का कहना है कि प्रदेश सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी देकर सराहनीय कार्य किया है। इससे सभी कर्मचारियों को लाभ होगा। कुछ विसंगतियां अभी भी रह गई हैं, जिस पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत थी। इस सं्स्तुति में बड़े तथा छोटे कर्मचारियों के बीच एक बड़ी खाई है, जिसे सरकार को भरने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सातवां वेतन लगने के बाद भी केंद्रीय कर्मियों से कम ही वेतन रहेगा। इसके देखते हुए प्रस्ताव बनाना चाहिए।
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