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Ballia News: पानी तीन दिन में एक बार आता है वह भी 20 मिनट के लिए
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मझौंवा क्षेत्र के गंगापुर स्थित लिकेंज पाइप के गड्ढे से छोटे बर्तन के माध्यम से पानी भरने को व
मझौवां। आसमान से बरस रही आग और भीषण गर्मी ने जनजीवन बेहाल कर दिया है। इसी बीच गंगापुर और बलिहार ग्राम पंचायत के कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है।
गंगापुर के अंतर्गत बलिहार स्थित पानी टंकी से होने वाली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय निवासी कौशल पांडेय, संतोष पांडेय और गणेश यादव ने बताया कि पानी तीन दिन में एक बार आता है और वह भी मात्र 20 मिनट के लिए। पानी का प्रेशर इतना कम है कि लोगों को पाइपलाइन के पास गड्ढा खोदकर, उसमें बाॅल्टी रखकर पानी इकट्ठा करना पड़ता है। एक डिब्बा भरने में 15 मिनट लग जाते हैं और तब तक सप्लाई बंद हो जाती है। जल संकट की चपेट में हुकुम छपरा, तेलिया टोला, उपाध्याय टोला, दुर्जनपुर, मीनापुर, शाहपुर, तिवारी टोला, केहरपुर, नई बस्ती चौबे छपरा, रिकनी छपरा और बुल्लापुर समेत करीब 25 बस्तियां हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नलकूप ऑपरेटर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही से नहीं करते।
मुख्य पाइपलाइन छह स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। क्षेत्र के हैंडपंपों से निकलने वाला पानी आर्सेनिक युक्त है। शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण लोग यही दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिससे त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। जिन घरों में पानी लाने के लिए युवा सदस्य नहीं हैं, उनके लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है।
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धरातल पर फेल हर घर नल योजना
हर घर नल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछाई गई लेकिन रखरखाव न होने से कई जगहों पर पाइप कट चुके हैं। केहरपुर में निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य भी लंबे समय से अधूरा है। जयप्रकाश ओझा और उमाशंकर पांडेय समेत अन्य ग्रामीणों ने नियमित जलापूर्ति की मांग को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है।
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14 टोलों में पेयजल आपूर्ति बाधित है, जिसका डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में छह-सात मोहल्लों में आपूर्ति चालू है। सरफेस वाटर योजना में समय लगेगा, तब तक बाधित क्षेत्रों में अगले माह तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
मुदीम अहमद, एक्सईएन, जल जीवन मिशन ग्रामीण, बलिया
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गंगापुर के अंतर्गत बलिहार स्थित पानी टंकी से होने वाली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय निवासी कौशल पांडेय, संतोष पांडेय और गणेश यादव ने बताया कि पानी तीन दिन में एक बार आता है और वह भी मात्र 20 मिनट के लिए। पानी का प्रेशर इतना कम है कि लोगों को पाइपलाइन के पास गड्ढा खोदकर, उसमें बाॅल्टी रखकर पानी इकट्ठा करना पड़ता है। एक डिब्बा भरने में 15 मिनट लग जाते हैं और तब तक सप्लाई बंद हो जाती है। जल संकट की चपेट में हुकुम छपरा, तेलिया टोला, उपाध्याय टोला, दुर्जनपुर, मीनापुर, शाहपुर, तिवारी टोला, केहरपुर, नई बस्ती चौबे छपरा, रिकनी छपरा और बुल्लापुर समेत करीब 25 बस्तियां हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नलकूप ऑपरेटर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही से नहीं करते।
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मुख्य पाइपलाइन छह स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। क्षेत्र के हैंडपंपों से निकलने वाला पानी आर्सेनिक युक्त है। शुद्ध पेयजल न मिलने के कारण लोग यही दूषित पानी पीने को विवश हैं, जिससे त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। जिन घरों में पानी लाने के लिए युवा सदस्य नहीं हैं, उनके लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है।
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धरातल पर फेल हर घर नल योजना
हर घर नल योजना के तहत पाइपलाइन तो बिछाई गई लेकिन रखरखाव न होने से कई जगहों पर पाइप कट चुके हैं। केहरपुर में निर्माणाधीन ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य भी लंबे समय से अधूरा है। जयप्रकाश ओझा और उमाशंकर पांडेय समेत अन्य ग्रामीणों ने नियमित जलापूर्ति की मांग को लेकर आक्रोश व्यक्त किया है।
14 टोलों में पेयजल आपूर्ति बाधित है, जिसका डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में छह-सात मोहल्लों में आपूर्ति चालू है। सरफेस वाटर योजना में समय लगेगा, तब तक बाधित क्षेत्रों में अगले माह तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
मुदीम अहमद, एक्सईएन, जल जीवन मिशन ग्रामीण, बलिया