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बाबूजी धीरे चलना...नीची है पटरी खुद ही संभलना
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बलिया। सड़कों के निर्माण में हर बार पटरी कार्य अधूरा छोड़ दिया जाता है। जिले में एनएच 31 के मरम्मत का कार्य चल रहा है। लेकिन शहर से गुजरी सड़क किनारे अब तक पटरी नहीं बन सका है। कई जगह तो पटरी इतनी नीचे हो गई है जिसके चलते आए दिन लोग गिरकर जहां घायल होते हैं, वहीं बाइक असंतुलित होने के कारण हादसे भी होते हैं।
सात वर्षों बाद एनएच 31 पर मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है। यह कार्य काफी तेजी से चल रहा है और नगर में तो सड़क निर्माण का कार्य कई दिनों पहले पूरा हो चुका है। लेकिन सड़क किनारे पटरियों का निर्माण नहीं हो सका है। बताया जाता है हर बार सड़क निर्माण के बाद पटरी नहीं बनने के कारण पटरी काफी नीचे हो चुकी है। इसके चलते जहां सड़क भी टूटती है वहीं यह लोगों के खतरनाक भी साबित होती है। नगर का चित्तू पांडेय चौराहा व्यस्ततम चौराहे में से है। यहां भीड़ होने पर पैदल चलने वाले लोग अक्सर फिसल कर पटरी पर गिर पड़ते हैं और घायल हो जाते हैँ। इसी तरह आए दिन सड़क किनारे असंतुलित होकर बाइक सवार भी गिरकर हादसे का शिकार होते हैं।
बता दें कि पिछले सात वर्षों से एनएच 31 की दशा बदहाल रही जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक 102 करोड़ का टेंडर हुआ जिसे जयपुर की कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर को आंवटित किया गया था। लेकिन डेढ़ वर्ष तक कार्य नहीं हुआ तो एनएचएआई के अधिकारियों ने एजेंसी को टर्मिनेट कर नए सिरे से दिसंबर 2021 में टेंडर प्रक्रिया पूरी की। इस बार विभाग ने गाजीपुर से मांझी घाट तक की दूरी को तीन भाग में बांटा है। कुल 115 किलोमीटर की सड़क में गाजीपुर से फेफना तक 60 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर के कार्य को अलग-अलग तीन एजेंसियों को आवंटित किया है। कुल 117 करोड़ रुपये का टेंडर आवंटित है। तीनों एजेंसियों को कार्य पूरा करने की समय सीमा छह माह निर्धारित की गई है। अब कार्य तेजी से शुरु है। फेफना से बलिया तक सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है तो उधर, फेफना से लक्ष्मणपुर तक कार्य हो चुका है और शेेष कार्य चल रहा है।
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सात वर्षों बाद एनएच 31 पर मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है। यह कार्य काफी तेजी से चल रहा है और नगर में तो सड़क निर्माण का कार्य कई दिनों पहले पूरा हो चुका है। लेकिन सड़क किनारे पटरियों का निर्माण नहीं हो सका है। बताया जाता है हर बार सड़क निर्माण के बाद पटरी नहीं बनने के कारण पटरी काफी नीचे हो चुकी है। इसके चलते जहां सड़क भी टूटती है वहीं यह लोगों के खतरनाक भी साबित होती है। नगर का चित्तू पांडेय चौराहा व्यस्ततम चौराहे में से है। यहां भीड़ होने पर पैदल चलने वाले लोग अक्सर फिसल कर पटरी पर गिर पड़ते हैं और घायल हो जाते हैँ। इसी तरह आए दिन सड़क किनारे असंतुलित होकर बाइक सवार भी गिरकर हादसे का शिकार होते हैं।
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बता दें कि पिछले सात वर्षों से एनएच 31 की दशा बदहाल रही जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जून 2020 में गाजीपुर से मांझी तक 102 करोड़ का टेंडर हुआ जिसे जयपुर की कंपनी कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर को आंवटित किया गया था। लेकिन डेढ़ वर्ष तक कार्य नहीं हुआ तो एनएचएआई के अधिकारियों ने एजेंसी को टर्मिनेट कर नए सिरे से दिसंबर 2021 में टेंडर प्रक्रिया पूरी की। इस बार विभाग ने गाजीपुर से मांझी घाट तक की दूरी को तीन भाग में बांटा है। कुल 115 किलोमीटर की सड़क में गाजीपुर से फेफना तक 60 किलोमीटर, फेफना से चिरैयामोड़ तक 45 किलोमीटर और चिरैया मोड़ से मांझी के जयप्रभा सेतु तक 16 किलोमीटर के कार्य को अलग-अलग तीन एजेंसियों को आवंटित किया है। कुल 117 करोड़ रुपये का टेंडर आवंटित है। तीनों एजेंसियों को कार्य पूरा करने की समय सीमा छह माह निर्धारित की गई है। अब कार्य तेजी से शुरु है। फेफना से बलिया तक सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है तो उधर, फेफना से लक्ष्मणपुर तक कार्य हो चुका है और शेेष कार्य चल रहा है।
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