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Ballia News: खाद्यान्न घोटाले में वीडीओ गिरफ्तार
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बलिया। चर्चित खाद्यान्न घोटाले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी की टीम ने सोमवार की रात ग्राम विकास अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। ब्लॉक दुबहड़ के ग्राम विकास अधिकारी रविशंकर सिंह यादव निवासी प्रोफेसर कॉलोनी, सिविल लाइन बलिया को मोतीनगर कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया। वह घोटाले के समय इसी पद पर ब्लॉक बेरुआरबारी में तैनात था।
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2002 से 2005 के मध्य बलिया में किया गया था। योजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में मिट्टी, नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्ग व पुलिया का निर्माण श्रमिकों का चयन कर कराया जाना था। श्रमिकों को श्रम के बदले अनाज व नकदी दिए जाने का निर्देश था। योजना में घोटाला किया गया। इसकी एफआईआर जिले के विभिन्न थानों में दर्ज है। इसकी विवेचना ईओडब्ल्यू वाराणसी कर रही है। विवेचना में पाया कि जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व कोटेदारों की मिलीभगत से कार्य योजनाओं की पत्रावलियों पर पेमेंट आर्डर, मस्टर रोल व खाद्यान्न वितरण रजिस्टर में कूटरचना कर सरकारी राजस्व को चूना लगाया।
निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा और रविंद्र प्रताप यादव के नेतृत्व में आई टीम ने गिरफ्तारी की। सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि रविशंकर सिंह यादव पर थाना सुखपुरा में एफआईआर दर्ज की गई थी। ब्लॉक के विभिन्न गांवों में ग्राम पंचायत अंश से योजना के तहत मिट्टी, नाली निर्माण, खड़ंजा, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्ग, सीसी और पुलिया निर्माण का कार्य कराया गया था। कार्य मानक के अनुरूप नहीं मिला और अपूर्ण पाया गया था। आरोपी ने अन्य से मिलीभगत करके कूटरचित अभिलेखों के आधार पर शासकीय धन का गबन किया है। आरोपी को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम वाराणसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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51 मुकदमे में 6049 लोग बनाए गए आरोपी
एसजीआरवाई के तहत जिले में साल 2000 से 2005 तक काम के बदले अनाज योजना का संचालन हुआ। इसमें अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने बडे़ पैमाने पर गड़बड़ी की। मामला प्रकाश में आने के बाद साल 2006 में जनपद के 14 थानों में 51 मुकदमे दर्ज कराए गए। इसमें 6049 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें तत्कालीन तीन सीडीओ, बीडीओ, सचिव, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान व कोटेदार शामिल हैं। शासन ने आठ मुकदमों की जांच सीबीआई तथा शेष 43 की तहकीकात करने की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी शाखा को दी।
फर्जी तरीके से 10.28 लाख निकालने का आरोपी वीडीओ निलंबित
बलिया/लालगंज। जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश ने मंगलवार को ग्राम विकास अधिकारी अरविंद कुमार निगम को निलंबित कर दिया। अरविंद को हनुमानगंज ब्लाॅक से अटैच किया गया है। मुरलीछपरा ब्लाॅक के दलनछपरा ग्राम पंचायत के डोंगल से (स्वच्छता अभियान) के खाते से 10 लाख 28 हजार 916 रुपये फर्जी तरीके से निकालने के मामले में यह कार्रवाई हुई है।
आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ब्लाॅक मुख्यालय पर साप्ताहिक समीक्षा बैठक में भाग नहीं लेते थे। डीडीओ ने इसकी जांच सीयर ब्लॉक के बीडीओ को सौंपी है।
दलछपरा की ग्राम प्रधान उषा देवी ने मुख्यमंत्री को 27 अक्तूबर को पत्र भेजा था। इसमें आरोप लगाया था कि ग्राम विकास अधिकारी अरविंद निगम यह कहकर मेरा डोंगल ले गए कि यह लाॅक हो गया है। इसे ठीक करने के लिए जिला मुख्यालय लेकर जाना पड़ेगा। इसके बाद फर्जी दस्तखत के माध्यम से स्वच्छता अभियान के खाते से 10 लाख 28 हजार 916 रुपये निकाल लिए।
ग्राम प्रधान व ब्लॉक के अधिकारियों ने अरविंद से बात करने का प्रयास किया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। डीडीओ के निर्देश पर मामले की जांच की गई। बीडीओ की रिपोर्ट पर डीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया। डीडीओ आनंद प्रकाश ने बताया कि प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित किया गया है।
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संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2002 से 2005 के मध्य बलिया में किया गया था। योजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में मिट्टी, नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्ग व पुलिया का निर्माण श्रमिकों का चयन कर कराया जाना था। श्रमिकों को श्रम के बदले अनाज व नकदी दिए जाने का निर्देश था। योजना में घोटाला किया गया। इसकी एफआईआर जिले के विभिन्न थानों में दर्ज है। इसकी विवेचना ईओडब्ल्यू वाराणसी कर रही है। विवेचना में पाया कि जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी व कोटेदारों की मिलीभगत से कार्य योजनाओं की पत्रावलियों पर पेमेंट आर्डर, मस्टर रोल व खाद्यान्न वितरण रजिस्टर में कूटरचना कर सरकारी राजस्व को चूना लगाया।
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निरीक्षक सुनील कुमार वर्मा और रविंद्र प्रताप यादव के नेतृत्व में आई टीम ने गिरफ्तारी की। सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि रविशंकर सिंह यादव पर थाना सुखपुरा में एफआईआर दर्ज की गई थी। ब्लॉक के विभिन्न गांवों में ग्राम पंचायत अंश से योजना के तहत मिट्टी, नाली निर्माण, खड़ंजा, पटरी मरम्मत, संपर्क मार्ग, सीसी और पुलिया निर्माण का कार्य कराया गया था। कार्य मानक के अनुरूप नहीं मिला और अपूर्ण पाया गया था। आरोपी ने अन्य से मिलीभगत करके कूटरचित अभिलेखों के आधार पर शासकीय धन का गबन किया है। आरोपी को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम वाराणसी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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51 मुकदमे में 6049 लोग बनाए गए आरोपी
एसजीआरवाई के तहत जिले में साल 2000 से 2005 तक काम के बदले अनाज योजना का संचालन हुआ। इसमें अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने बडे़ पैमाने पर गड़बड़ी की। मामला प्रकाश में आने के बाद साल 2006 में जनपद के 14 थानों में 51 मुकदमे दर्ज कराए गए। इसमें 6049 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें तत्कालीन तीन सीडीओ, बीडीओ, सचिव, ट्रांसपोर्टर, ग्राम प्रधान व कोटेदार शामिल हैं। शासन ने आठ मुकदमों की जांच सीबीआई तथा शेष 43 की तहकीकात करने की जिम्मेदारी आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन वाराणसी शाखा को दी।
फर्जी तरीके से 10.28 लाख निकालने का आरोपी वीडीओ निलंबित
बलिया/लालगंज। जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश ने मंगलवार को ग्राम विकास अधिकारी अरविंद कुमार निगम को निलंबित कर दिया। अरविंद को हनुमानगंज ब्लाॅक से अटैच किया गया है। मुरलीछपरा ब्लाॅक के दलनछपरा ग्राम पंचायत के डोंगल से (स्वच्छता अभियान) के खाते से 10 लाख 28 हजार 916 रुपये फर्जी तरीके से निकालने के मामले में यह कार्रवाई हुई है।
आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी ब्लाॅक मुख्यालय पर साप्ताहिक समीक्षा बैठक में भाग नहीं लेते थे। डीडीओ ने इसकी जांच सीयर ब्लॉक के बीडीओ को सौंपी है।
दलछपरा की ग्राम प्रधान उषा देवी ने मुख्यमंत्री को 27 अक्तूबर को पत्र भेजा था। इसमें आरोप लगाया था कि ग्राम विकास अधिकारी अरविंद निगम यह कहकर मेरा डोंगल ले गए कि यह लाॅक हो गया है। इसे ठीक करने के लिए जिला मुख्यालय लेकर जाना पड़ेगा। इसके बाद फर्जी दस्तखत के माध्यम से स्वच्छता अभियान के खाते से 10 लाख 28 हजार 916 रुपये निकाल लिए।
ग्राम प्रधान व ब्लॉक के अधिकारियों ने अरविंद से बात करने का प्रयास किया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला। डीडीओ के निर्देश पर मामले की जांच की गई। बीडीओ की रिपोर्ट पर डीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया। डीडीओ आनंद प्रकाश ने बताया कि प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित किया गया है।