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कागजों में वेंडिंग जोन, सड़क पर ठेले से लग रहा जाम

Mon, 18 Oct 2021 11:12 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 11:12 PM IST
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Vending zone on paper, jam on the road
नगर के स्टेशन चौक रोड पर लगा फलों का ठेला। संवाद - फोटो : BALLIA
शहर को जाम से निजात दिलाने और ठेले-खोमचे वालों को व्यापार के लिए उचित जगह मुहैया कराने के लिए वेंडिंग जोन बनाया जाना था। लेकिन यह योजना कागजों में सिमट कर रह गई है। कार्यदायी संस्था की ओर से 18 माह पहले वेडिंग जोन का प्रस्ताव नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) को उपलब्ध करा दिया गया था। इसके बाद भी जिला प्रशासन की मुहर नहीं लग पाई है। पूरे शहर में अवैध और बेतरतीब तरीके से ठेले और खोमचे लगने से अतिक्रमण है। जहां-तहां पटरियों पर दुकानें सज रही हैं। सड़कों पर वाहन खड़े हो रहे हैं। हालत यह है कि राहगीर जाम से जूझ रहे हैं।
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शहर में चार वर्ष पहले वेंडिंग जोन स्थापित करने की योजना बनी थी। इसके तहत चिह्नित स्थानों पर शेड, पेयजल, पार्किंग व अन्य सुविधाएं विकसित की जानी थीं ताकि दुकानदार आराम से अपना व्यापार कर सकें और ग्राहकों को भी कोई परेशानी न हो। शासन की योजना शहरी पथ विक्रेताओं को शोषण से मुक्ति दिलाने की भी थी। योजना के तहत, पटरी दुकानदारों का सर्वे कराकर उनका पंजीकरण कराकर पहचान पत्र जारी करना था। साथ ही उन्हें वेडिंग जोन में स्थापित करना था। इससे रोजाना दुकान लगाने को लेकर होने वाले विवाद और शोषण से मुक्ति दिलानी थी। पंजीकृत पटरी दुकानदारों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी लाभ मिलना था।
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भारी पड़ रही लेटलतीफी
बलिया। बीते चार वर्ष में डूडा की ओर से वेंडिंग जोन एवं पार्किंग के लिए केडीएस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की शहरी पथ विक्रेताओं के पंजीकरण के साथ वेडिंग जोन को सर्वे कर चिह्नित कराया गया। इसमें संस्था की ओर से 20 स्थानों का प्रस्ताव किया गया। कुल 1213 पथ विक्रेताओं का पंजीकरण किया गया था, जिनको विस्थापित किया जाना था। हालांकि इनकी संख्या इससे कहीं ज्यादा है। इसकी पुष्टी इससे ही होती है कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत भी छह हजार से ज्यादा पथ विक्रेताओं का पंजीकरण किया गया है। वेडिंग जोन चिह्नित न होने से इसका खामियाजा पटरी दुकानदार भी भुगत रहे हैं। उन्हें जाम लगाने के नाम पर पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ती हैं। आम राहगीरों के गुस्से का कोपभाजन भी बनना पड़ रहा है।
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चिह्नित किए थे यह स्थान
चौक से पानी टंकी रोड पर पहली दाएं और साथ लगी गली, इसी रोड पर पहली बायी गली रोड, अन्नपूर्णा होटल के पीछे, गुरुद्वारा रोड के पीछे और पीछे वाली गली, टाउन हाल मवेशी अस्पताल के पास सरकार स्कूल वाली गली, शनिचरी मंदिर एलआईसी होते हुए माल गोदाम तक, काली मंदिर से दुर्गा मंदिर तक, पुराने पोस्ट आफिस से नया चौक होते हुए एनएच-31 तक, एलआईसी के सामने से रामलीला मैदान चित्रगुप्त मंदिर होते हुए भृगु मंदिर तक, दुर्गा मंदिर के पास पुलिस चौकी एनएच-31 तक, चौक सुतरी पट्टी होते हुए लोहिया मार्केट तक, बस स्टैंड-गड़वार रोड पर बायीं तरफ, ओवरब्रिज के नीचे, कासिम बाजार रोड पर बायीं तरफ, गुदरी बाजार बायीं तरफ, चित्तू पांडेय चौकस, सागरपाली रोड-माल्देपुर स्टैंड, कुचेरी-मिड्ढी चौराहा होते हुए टीडी कालेज तक।
जोन बने तो जाम से मिल सकती है मुक्ति
बलिया। शहर में सबसे बड़ी समस्या जाम की है। पार्किंग और वेंडिंग जोन के अभाव में सड़क की पटरियों पर कहीं गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं तो कहीं ठेले लग रहे हैं। पटरियों पर अतिक्रमण के चलते सड़क सिकुड़ गई है। इससे रोजाना घंटों जाम लग रहा है। जाम में फंसने से राहगीर तो परेशान हैं ही, दुकानों पर ग्राहक के पहुंचने में भी मुश्किल होती है। इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है।

शहर में लेडिंग जोन के लिए 20 स्थान प्रस्तावित किए गए हैं। अभी इस पर जिलाधिकारी की मुहर नहीं लग पाई है। मुहर लगने के बाद इसे विकसित कराया जाएगा। - अमरदेव सिंह चौहान, प्रभारी पीओ डूडा
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