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बलिया: गैंगस्टर एक्ट में दो वर्ष साधारण कारावास व 10 हजार अर्थदंड की सजा
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बलिया। अपर सत्र न्यायाधीश ओमकार शुक्ला की अदालत ने गैंगस्टर एक्ट मामले में अख्तर उर्फ बूढ़ा पुत्र उस्मान निवासी बहेरी को दोषी पाया। न्यायाधीश ने दो वर्ष के साधारण कारावास एवं 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतना होगी।
वादी मुकदमा प्रभारी निरीक्षक गौरीशंकर ने थाना कोतवाली में 27 जुलाई 2001 को प्रार्थना पत्र दिया था कि कोतवाली क्षेत्र बहेरी निवासी अख्तर उर्फ बूढ़ा पुत्र उस्मान शातिर किस्म का अपराधी है और अपराध करने में माहिर है। यह साथियों के आर्थिक लाभ देने के लिए अपराध करता है।
उसके गैंग का आतंक इतना ज्यादा हो गया कि कोई भी व्यक्ति इसके विरुद्ध नामजद प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। समाज विरोधी क्रियाकलाप में लिप्त रहता है। इनके विरुद्ध थाने में रिपोर्ट लिखाने और न्यायालय में गवाही देने का कोई साहस नहीं कर पाता है। इसके आधार पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया।
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न्यायालय ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत सभी साक्ष्यों का सम्यक परिशीलन और अवलोकन करने के बाद अभियोजन की तरफ से अजय कुमार तिवारी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद अभियुक्त के खिलाफ दोष साबित पाया। दो वर्ष के साधारण कारावास एवं 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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वादी मुकदमा प्रभारी निरीक्षक गौरीशंकर ने थाना कोतवाली में 27 जुलाई 2001 को प्रार्थना पत्र दिया था कि कोतवाली क्षेत्र बहेरी निवासी अख्तर उर्फ बूढ़ा पुत्र उस्मान शातिर किस्म का अपराधी है और अपराध करने में माहिर है। यह साथियों के आर्थिक लाभ देने के लिए अपराध करता है।
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उसके गैंग का आतंक इतना ज्यादा हो गया कि कोई भी व्यक्ति इसके विरुद्ध नामजद प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित कराने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है। समाज विरोधी क्रियाकलाप में लिप्त रहता है। इनके विरुद्ध थाने में रिपोर्ट लिखाने और न्यायालय में गवाही देने का कोई साहस नहीं कर पाता है। इसके आधार पर विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया।
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न्यायालय ने अभियोजन की ओर से प्रस्तुत सभी साक्ष्यों का सम्यक परिशीलन और अवलोकन करने के बाद अभियोजन की तरफ से अजय कुमार तिवारी और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद अभियुक्त के खिलाफ दोष साबित पाया। दो वर्ष के साधारण कारावास एवं 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।