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बंधे पर तिरपाल के नीचे मनेगी बाढ़ पीड़ितों की दिवाली

Sun, 23 Oct 2022 10:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2022 10:27 PM IST
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Tied but under the tarpaulin, the flood victims will celebrate Diwali
जयप्रकाशनगर क्षेत्र स्थित बीएसटी बंधे पर शरण लिए कटान पीड़ित तथा खेल रहे बच्चे। - फोटो : BALLIA
बलिया/रामगढ़। बाढ़ पीड़ितों की दिवाली इस बार भी तिरपाल और पन्नी के बीच बंधे पर ही मनेगी। हालात इतने ज्यादा खराब हो गए हैं कि बाढ़ पीड़ितों के पास मिठाई तो दूर की बात, घर में दीया जलाने की खरीद करने के लिए पैसा तक नहीं है। क्योंकि जो कुछ था वह बाढ़ में बह गया है। अब जैसे-तैसे परिवार का भरण पोषण किया जा रहा है।
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अक्तूबर में बाढ़ से सैकड़ों परिवारों को घर से बेघर कर दिया। ये परिवार एनएच 31 पर तिरपाल और पन्नी के नीचे जीवन गुजार रहे हैं। पीड़ितों के मन में दीपावली की खुशी कम बाढ़ का गम और खौफ ज्यादा है। बंधे पर रह रहे लोग बच्चों की मिठाई तो दूर दीपक खरीदने को भी मोहताज दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में जब पूरा देश दीपावली की रोशनी में नहाया होगा तो ये लोग तटबंध पर अंधेरे में रात गुजार रहे होंगे। लेकिन तटबंध पर रह रहे लोगों को किसी प्रकार की कोई राहत नहीं मिल पाई है। बाढ़ के समय लोगों को राहत सामग्री का वितरण किया गया था जो अब खत्म हो गई है। ऐसे में लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी गहराता जा रहा है।
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बाढ़ में सब बह गया, कैसे मनाएं पर्व
एनएच 31 तटबंध पर रह रहे करीब तीन दशकों में मझौवा, पचरुखिया, नारायणपुर, उपाध्याय टोला, हुकुम छपरा, गंगापुर, तेलिया टोंक दुर्जनपुर, मीनापुर शाहपुर, चौबे छपरा गंगौली रिकनी छपरा, श्रीनगर, प्रसाद छपरा बक्शी, उदई छपरा के अलावा मनियर, बांसडीह और रेवती विकास खंड के तमाम गांवों के कटान पीड़ित टीएस बंधे को अपना आशियाना बनाए है। कटान पीड़ितों ने कहा कि हम लोग इस बार दीपावली मजबूर होकर तटबंध पर ही मनाएंगे क्योंकि घर में कुछ बचा ही नहीं है। कहा कि जो कुछ था वह सब बाढ़ में बह गया ऐसे में कौन सा पर्व और कैसा त्योहार। सुबह शाम का खाना मिल जाए, वही बहुत है। बताते हैं कि कुछ गांवों में अभी भी सरयू का पानी भरा है। कुछ जगहों से पानी निकल गया है। जिसके बाद भी सीपेज है। इसी कारण लोग तटबंध पर ही दीपावली मनाएंगे। कोई सरकारी मदद अभी यहां तक नहीं आई है।
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