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Ballia News: सरयू की कटान से उत्तरी दियरांचल में तीन मकान नदी में समाए, 100 बीघे जमीन कटी
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बांसडीह क्षेत्र के महराजपुर गांव में सरयू नदी के कटान को रोकने के लिए मिट्टी और पेड़ की डालियों
बलिया। सरयू नदी की उतरती धारा से बांसडीह व बैरिया तहसील क्षेत्र में कटान हो रही है। 24 घंटे के अंदर तीन मकान नदी में समा गए। लगभग 100 बीघा जमीन कटकर बह गई। कटान तेज होने लोग रतजगा कर रहे हैं। बैरिया के उत्तरी दियरांचल में बुधवार की रात से कटान अचानक तेज हो गई है। वशिष्ठ नगर और गोपालनगर के सिवान में 100 बीघा से ज्यादा जमीन सरयू नदी में कटकर बह गई। गोपालनगर टांडी निवासी गनेश यादव, शिवजी यादव और महेश यादव के मकान नदी में समा गए।
बस्तियों के करीब कटान पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गोपालनगर टांडी और शिवाल मठिया में आबादी के काफी करीब कटान हो रही है। इन दोनों क्षेत्रों में लगभग 12 मकान अब भी कटान की जद में हैं।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान की रफ्तार इसी तरह रही तो आने वाले समय में कई और मकान नदी में समा सकते हैं। ग्रामीण अपने घरों और जमीन को बचाने को लेकर चिंतित हैं। अब तक 500 एकड़ भूमि नदी में समाहित हो चूकी है। उधर, बांसडीह में सरयू नदी का रौद्र रूप मुसीबत बनता जा रहा है। महाराजपुर गांव के नाहरछपरा टोला कटान के मुहाने पर है। नदी और आबादी के बीच अब सिर्फ 20 मीटर का फासला बचा है।
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रात भर ग्रामीण टाॅर्च और लाठी लेकर नदी किनारे पहरा देते रहे। बाढ़ खंड के अभियंता मौके पर डटे हैं। बचाव के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है। नदी में बांस की बल्लियां गाड़कर जियो तिरपाल और बालू भरे जियो बैग डाले जा रहे हैं। बृहस्पतिवार की सुबह से फिर मजदूरों को लगाकर कटान रोधी कार्य तेज कर दिया गया है।
जेसीबी से जल्दी-जल्दी मकान तोड़ने में जुटे पीड़ित : सरयू नदी का रौद्र रूप देख पूरे गांव में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ पानी घटाव पर है तो दूसरी तरफ कटान की रफ्तार बढ़ती जा रही है। वहीं लगभग एक दर्जन लोग अपने मकान जेसीबी लगा कर तुड़वा रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान को ले जाकर कहीं सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं।
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बस्तियों के करीब कटान पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गोपालनगर टांडी और शिवाल मठिया में आबादी के काफी करीब कटान हो रही है। इन दोनों क्षेत्रों में लगभग 12 मकान अब भी कटान की जद में हैं।
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ग्रामीणों को आशंका है कि यदि कटान की रफ्तार इसी तरह रही तो आने वाले समय में कई और मकान नदी में समा सकते हैं। ग्रामीण अपने घरों और जमीन को बचाने को लेकर चिंतित हैं। अब तक 500 एकड़ भूमि नदी में समाहित हो चूकी है। उधर, बांसडीह में सरयू नदी का रौद्र रूप मुसीबत बनता जा रहा है। महाराजपुर गांव के नाहरछपरा टोला कटान के मुहाने पर है। नदी और आबादी के बीच अब सिर्फ 20 मीटर का फासला बचा है।
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रात भर ग्रामीण टाॅर्च और लाठी लेकर नदी किनारे पहरा देते रहे। बाढ़ खंड के अभियंता मौके पर डटे हैं। बचाव के लिए नई तकनीक अपनाई जा रही है। नदी में बांस की बल्लियां गाड़कर जियो तिरपाल और बालू भरे जियो बैग डाले जा रहे हैं। बृहस्पतिवार की सुबह से फिर मजदूरों को लगाकर कटान रोधी कार्य तेज कर दिया गया है।
जेसीबी से जल्दी-जल्दी मकान तोड़ने में जुटे पीड़ित : सरयू नदी का रौद्र रूप देख पूरे गांव में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ पानी घटाव पर है तो दूसरी तरफ कटान की रफ्तार बढ़ती जा रही है। वहीं लगभग एक दर्जन लोग अपने मकान जेसीबी लगा कर तुड़वा रहे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली से सामान को ले जाकर कहीं सुरक्षित जगह पर रख रहे हैं।

बांसडीह क्षेत्र के महराजपुर गांव में सरयू नदी के कटान को रोकने के लिए मिट्टी और पेड़ की डालियों