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Ballia News: महिला अस्पताल में तीन चिकित्सकों ने संभाला कार्यभार
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जिला महिला अस्पताल में दो महिला स्त्रीरोग विशेषज्ञ सहित तीन चिकित्सकों की तैनाती हुई है। अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सक के अभाव के कारण सीजर से दूसरी डिलेवरी नहीं होती है। पहला बच्चा ऑपरेशन से होने के बाद दूसरी डिलेवरी के लिए भी ऑपरेशन अनिवार्य होता है। गर्भवती महिलाओं को दूसरे प्रसव के लिए निजी अस्पतालों में महंगे दर पर ऑपरेशन करवाना पड़ता था। जिला महिला अस्पताल में वर्षों बाद सेकेंड सीजर प्रसव की सुविधा मिलने लगेगी।
पिछले दिनों माले के नेता लक्ष्मण यादव ने जिलाधिकारी को पत्रक देकर महिला अस्पताल में सेकेंड सीजर की सुविधा शुरू करने की मांग की थी। डीएम रविंद्र कुमार ने अस्पताल प्रशासन से सिजेरियन से डिलिवरी नहीं होने का कारण पूछा था। अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सकों की कमी बताया था। जिला प्रशासन की मांग पर शासन ने महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. राजेश सरोज, डाॅ. रजनी सिंह व बालरोग विशेषज्ञ डाॅ. विजय भास्कर की तैनाती की। शुक्रवार को तीन चिकित्सकों ने चार्ज लिया। विजय भास्कर इसके पूर्व सेवा दे चुके हैं। अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती के बाद लोगों में सेकेंड सीजर की आस जग गई है। अस्पताल में जिले के कोने-कोने से रोज करीब आधा दर्जन केस सेकेंड सीजर के आते हैं। चिकित्सक के अभाव के कारण केस खराब न हो जाए, इसके कारण अस्पताल प्रशासन रिस्क नहीं उठाता था। सीएमएस डॉ. सुमिता सिन्हा ने बताया कि मांग के अनरूप अभी चिकित्सक काफी कम हैं। अब अस्पताल में आधा दर्जन महिला रोग विशेषज्ञ होने से जल्द ही सेकेंड सीजर की सुविधा शुरू की जाएगी। अस्पताल में रोज करीब 35 से 45 नार्मल डिलेवरी होती है, इसमें आधा दर्जन सीजेरियन से प्रसव होता है। जो पूर्णत: नि:शुल्क होता है।
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पिछले दिनों माले के नेता लक्ष्मण यादव ने जिलाधिकारी को पत्रक देकर महिला अस्पताल में सेकेंड सीजर की सुविधा शुरू करने की मांग की थी। डीएम रविंद्र कुमार ने अस्पताल प्रशासन से सिजेरियन से डिलिवरी नहीं होने का कारण पूछा था। अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सकों की कमी बताया था। जिला प्रशासन की मांग पर शासन ने महिला रोग विशेषज्ञ डाॅ. राजेश सरोज, डाॅ. रजनी सिंह व बालरोग विशेषज्ञ डाॅ. विजय भास्कर की तैनाती की। शुक्रवार को तीन चिकित्सकों ने चार्ज लिया। विजय भास्कर इसके पूर्व सेवा दे चुके हैं। अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती के बाद लोगों में सेकेंड सीजर की आस जग गई है। अस्पताल में जिले के कोने-कोने से रोज करीब आधा दर्जन केस सेकेंड सीजर के आते हैं। चिकित्सक के अभाव के कारण केस खराब न हो जाए, इसके कारण अस्पताल प्रशासन रिस्क नहीं उठाता था। सीएमएस डॉ. सुमिता सिन्हा ने बताया कि मांग के अनरूप अभी चिकित्सक काफी कम हैं। अब अस्पताल में आधा दर्जन महिला रोग विशेषज्ञ होने से जल्द ही सेकेंड सीजर की सुविधा शुरू की जाएगी। अस्पताल में रोज करीब 35 से 45 नार्मल डिलेवरी होती है, इसमें आधा दर्जन सीजेरियन से प्रसव होता है। जो पूर्णत: नि:शुल्क होता है।
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