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Ballia News: बाढ़ के बीच निकली बरात, नाव से शादी करने पहंुचा दूल्हा
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नरहीं। बलिया से लेकर बिहार के बक्सर जिला में गंगा में आई बाढ़ के बीच एक उत्सवी माहौल देखने को मिला। बाढ़ के बीच ही नाव से बरात लेकर दूल्हा शादी करने दुल्हन के गांव बेयासी पहंुचा।
दो-तीन महीने पहले बिहार के बक्सर जिला अंतर्गत नैनीजोर लाल डेरा गांव के रहने वाले कमलेश राम के पुत्र राजेश कुमार की शादी बलिया के बेयासी गांव में तय हुई थी। इस बीच बक्सर के सिमरी दियारा क्षेत्र में इस समय गंगा की बाढ़ से घिर गया है। शादी की तैयारी दोनों पक्ष की ओर से थी। अचानक बाढ़ ने सारे रास्ते बंद कर दिए। गंगा में आई बाढ़ के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए, ऐसे में बरात लेकर जाना मुश्किल हो गया। ऐसे विषम परिस्थिति में परिवार ने नाव से बरात ले जाने का फैसला किया। तब गांव के लोगों ने पहली बार एक अद्भुत नजारा देखा।
गंगौली गांव के पास तटबंध के नीचे से एक सजी-धजी नाव पर बरात निकली। दूल्हा साफा पहने, पारंपरिक पोशाक में नाव पर बैठा था और उसके साथ बराती भी उसी जोश के साथ मौजूद थे। दो नाव पर 20-25 लोग बरात लेकर निकले। नाव पर कोई डीजे नहीं था, न ही बैंड-बाजा, लेकिन गंगा की लहरों की थपकी और नाविकों की ताल ने माहौल को खास बना दिया। बरातियों ने भी पूरे जोश में ढोलक की जगह तालियां बजाईं।
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ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अनोखा था। लोगों ने अपने मोबाइल से इस खास बरात की फोटो और वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह बरात इलाके में चर्चा का विषय बन गई। दूल्हे के पिता कमलेश राम ने बताया कि शादी की तारीख पहले से तय थी और रद्द करना हमारे लिए संभव नहीं था। इसलिए हमने नाव से बरात ले जाने का निर्णय लिया। गंगा मैया की लहरों ने हमारी बरात को यादगार बना दिया। यह शादी हमारे परिवार के लिए हमेशा खास रहेगी।
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दो-तीन महीने पहले बिहार के बक्सर जिला अंतर्गत नैनीजोर लाल डेरा गांव के रहने वाले कमलेश राम के पुत्र राजेश कुमार की शादी बलिया के बेयासी गांव में तय हुई थी। इस बीच बक्सर के सिमरी दियारा क्षेत्र में इस समय गंगा की बाढ़ से घिर गया है। शादी की तैयारी दोनों पक्ष की ओर से थी। अचानक बाढ़ ने सारे रास्ते बंद कर दिए। गंगा में आई बाढ़ के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गए, ऐसे में बरात लेकर जाना मुश्किल हो गया। ऐसे विषम परिस्थिति में परिवार ने नाव से बरात ले जाने का फैसला किया। तब गांव के लोगों ने पहली बार एक अद्भुत नजारा देखा।
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गंगौली गांव के पास तटबंध के नीचे से एक सजी-धजी नाव पर बरात निकली। दूल्हा साफा पहने, पारंपरिक पोशाक में नाव पर बैठा था और उसके साथ बराती भी उसी जोश के साथ मौजूद थे। दो नाव पर 20-25 लोग बरात लेकर निकले। नाव पर कोई डीजे नहीं था, न ही बैंड-बाजा, लेकिन गंगा की लहरों की थपकी और नाविकों की ताल ने माहौल को खास बना दिया। बरातियों ने भी पूरे जोश में ढोलक की जगह तालियां बजाईं।
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ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अनोखा था। लोगों ने अपने मोबाइल से इस खास बरात की फोटो और वीडियो बनाई और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह बरात इलाके में चर्चा का विषय बन गई। दूल्हे के पिता कमलेश राम ने बताया कि शादी की तारीख पहले से तय थी और रद्द करना हमारे लिए संभव नहीं था। इसलिए हमने नाव से बरात ले जाने का निर्णय लिया। गंगा मैया की लहरों ने हमारी बरात को यादगार बना दिया। यह शादी हमारे परिवार के लिए हमेशा खास रहेगी।