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ठंड ने दिखाने शुरू किए तेवर
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Thu, 17 Dec 2015 11:33 PM IST
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कुछ दिनों पहले तक सुहानी लग रही गुलाबी ठंड अब गलन भरी असहनीय ठंड में तब्दील हो चुकी है। सायंकाल से लेकर पूर्वाह्न नौ बजे तक कोहरे की धुंध ने सड़क और रेल यातायात सहित लोगों की दिनचर्या पर असर डालना शुरू कर दिया है। ऐसे में बढ़ती ठंड की वजह से कोल्ड डायरिया का खतरा भी काफी बढ़ गया है।
कुहासे की वजह से सड़क दुर्घटनाओं में भी तेजी से इजाफा हुआ है। जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर नौ डिग्री तक पहुंच गया है। कड़कड़ाती ठंड में भी प्रशासन की ओर से अभी कोई तैयारी नहीं की गई है। प्रमुख जगहों और चौराहों पर अलाव की भी व्यवस्था भी नहीं दिख रही है।
बुुधवार को देर रात से ही कोहरे की चादर तन गई थी। यह सिलसिला दूसरे दिन पूर्वांह्न दस बजे तक चलता रहा। भोर में घर से निकलने पर भी सामने कुछ दिखाई तक नहीं दे रहा था। कड़ाके की ठंड और गलन के बीच गर्म कपड़ों में लिपटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे।
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पिछले तीन दिनों की तरह गुरुवार को भी घना कोहरा छाया रहा। इसके चलते सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। सुबह नौ-दस बजे के बाद धूप जरूर निकल रही है, लेकिन हाड़ कंपाऊ ठंड के कारण वह नाकाफी साबित हो रही है। फिर तीन बजते-बजते ठंड धूप को इस कदर फीकी कर दे रही है कि लोग गलन से कांप जा रहे हैं।
पांच बजते-बजते चारों और से घना कोहरा पहरा डाल दे रहा है। ऐसे में ठंड से परेशान बच्चे अभिभावक से स्कूल न जाने की जिद्द करते नजर आए। वहीं लोग अपने दफ्तरों पर निर्धारित समय से एक-दो घंटे विलंब पहुंचते देखे गए। गृहिणियों के लिए ऐसे में दिनचर्या निपटाना चुनौती समान हो गया है।
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कुहासे की वजह से सड़क दुर्घटनाओं में भी तेजी से इजाफा हुआ है। जिले का न्यूनतम तापमान गिरकर नौ डिग्री तक पहुंच गया है। कड़कड़ाती ठंड में भी प्रशासन की ओर से अभी कोई तैयारी नहीं की गई है। प्रमुख जगहों और चौराहों पर अलाव की भी व्यवस्था भी नहीं दिख रही है।
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बुुधवार को देर रात से ही कोहरे की चादर तन गई थी। यह सिलसिला दूसरे दिन पूर्वांह्न दस बजे तक चलता रहा। भोर में घर से निकलने पर भी सामने कुछ दिखाई तक नहीं दे रहा था। कड़ाके की ठंड और गलन के बीच गर्म कपड़ों में लिपटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे।
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पिछले तीन दिनों की तरह गुरुवार को भी घना कोहरा छाया रहा। इसके चलते सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। सुबह नौ-दस बजे के बाद धूप जरूर निकल रही है, लेकिन हाड़ कंपाऊ ठंड के कारण वह नाकाफी साबित हो रही है। फिर तीन बजते-बजते ठंड धूप को इस कदर फीकी कर दे रही है कि लोग गलन से कांप जा रहे हैं।
पांच बजते-बजते चारों और से घना कोहरा पहरा डाल दे रहा है। ऐसे में ठंड से परेशान बच्चे अभिभावक से स्कूल न जाने की जिद्द करते नजर आए। वहीं लोग अपने दफ्तरों पर निर्धारित समय से एक-दो घंटे विलंब पहुंचते देखे गए। गृहिणियों के लिए ऐसे में दिनचर्या निपटाना चुनौती समान हो गया है।