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Ballia News: लंबित मामलों का प्रतिशत ज्यादा होने से जिले की रैंकिंग गिरी

Tue, 10 Mar 2026 10:29 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 10:29 PM IST
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The ranking of the district fell due to high percentage of pending cases.
पंदह। राजस्व मामलों के निस्तारण में जिले की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में आजमगढ़ मंडल में बलिया का प्रदर्शन तीनों प्रमुख श्रेणियों- आरसीएमएस (रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम), धारा 116 और नामांतरण में कमजोर है।
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आरसीएमएस में जहां जिले की ओवरऑल रैंकिंग 74 है, वहीं कुर्रा बंटवारा और नामांतरण में क्रमशः 70वीं और 75वीं रैंक है। लंबित मामलों का प्रतिशत ज्यादा होने के कारण जिले की रैंकिंग निचले पायदान पर है। इससे साफ है कि राजस्व विभाग वर्षों से लंबित वादों के निस्तारण में अपेक्षित तेजी नहीं ला पा रहा है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं। राजस्व न्यायालयों में सुनवाई की धीमी गति के कारण लोगों को जमीन से जुड़े छोटे-छोटे मामलों के लिए भी महीनों और कई बार वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर खराब रैंकिंग ने विभागीय दावों की पोल खोल दी है।
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मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के आरसीएमएस आंकड़ों के अनुसार जिले में एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों का प्रतिशत 2.21 है, जिसके चलते बलिया को 74वीं रैंक मिली है। जिले में एक से तीन वर्ष के बीच 5480, तीन से पांच वर्ष के बीच 1476 और पांच वर्ष से अधिक समय से 1159 वाद लंबित हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राजस्व न्यायालयों में मामलों के निस्तारण की रफ्तार बेहद धीमी है।
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धारा 116 (कुर्रा बंटवारा) के मामलों में भी सुस्ती
भूमि विवादों से जुड़े धारा 116 के मामलों में भी जिले की स्थिति चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार छह माह से अधिक समय से लंबित मामलों का प्रतिशत 13.73 है, जिसके चलते जिले की रैंकिंग 72वीं रही। तीन से पांच वर्ष के बीच के मामले लंबित हैं। इससे स्पष्ट है कि जमीन से जुड़े खानगी बंटवारा विवादों के निस्तारण में भी विभाग की गति संतोषजनक नहीं है।

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नामांतरण में भी बढ़ी परेशानी
नामांतरण (धारा 34) के मामलों में भी जनपद पिछड़ गया है। 45 दिन से अधिक समय से लंबित मामलों का प्रतिशत 3.66 दर्ज किया गया है और जिले की रैंकिंग 75वीं रही। जिले में एक से तीन वर्ष के बीच 1290, तीन से पांच वर्ष के बीच 490 और पांच वर्ष से अधिक समय से 96 मामले लंबित हैं। इससे जमीन के स्वामित्व से जुड़े मामलों में आम लोगों को लंबे समय तक तहसील और राजस्व न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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