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चार अर्थियां देखकर हिल गया कलेजा
अमर उजाला ब्यूरोः बलिया
Updated Sun, 10 Jul 2016 01:23 AM IST
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सुखपुरा चौराहे पर हुए हादसे में अपने परिवार के सदस्यों की मौत पर बिलखती बेटी। अमर उजाला
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सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद जब एक साथ चार अर्थियां उठीं तो उसे देखकर लोगों का कलेजा हिल गया। मृतक दंपती की विवाहिता बेटी और बूढ़ी मां के साथ ही अन्य बच्चे धाड़ें मारकर रोए जा रहे थे। चीत्कार और आंसूओं के सैलाबके बीच घर से जब चार-चार अर्थियां उठी तो जिसने भी देखा उसका कलेजा फट पड़ा। चाहे वो घर के लोग हों या पड़ोसी हर कोई अनाथ मासूमों को ही देख रहा था।
सुखपुरा कसबा निवासी उमाशंकर सहित उसके परिवार को बच्चों के साथ आसपास के लोगों ने हंसते-खिलखिलाते देखा था। अचानक रात में हुए हादसे के बाद का मंजर देखकर सभी अवाक थे। उनके समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह हो क्या गया? हादसा इतना जोरदार था कि कुछ समय के लिए कुछ उड़े धूल से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जब सब कुछ दिखने लगा तो ओमप्रकाश और उसकी पत्नी विद्यावती के साथ ही विशाल और पुत्री बबीता का शव देख अवाक रह गए।
पुलिसिया कार्रवाई पूरी होने के बाद जब एक साथ चार शव निकले तो मृतक उमाशंकर की 70 वर्षीय बूढ़ी मां, उसकी विवाहित बेटी और अन्य बचे बच्चे दहाड़े मार कर रो पड़े। बूढ़ी मां और बच्चों की चीत्कार सुन वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू भर आए और गले रूंध गए। अनाथ मासूमों को देख लोगों को कलेजा हिल जा रहा था। वहीं सगे-संबंधी रूंधे गले और आंखों के आंसू लिए ढांढ़स बढ़ाने में जुटे रहे। हालांकि हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा था कि अब ये परिवार आखिर कैसे चलेगा। बेटे-बहू और पोते को खोने वाली दादी के आंसू भरे आंखों में अन्य बच्चों के भविष्य की चिंता साफ दिख रही थी।
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सुखपुरा कसबा निवासी उमाशंकर सहित उसके परिवार को बच्चों के साथ आसपास के लोगों ने हंसते-खिलखिलाते देखा था। अचानक रात में हुए हादसे के बाद का मंजर देखकर सभी अवाक थे। उनके समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक यह हो क्या गया? हादसा इतना जोरदार था कि कुछ समय के लिए कुछ उड़े धूल से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। जब सब कुछ दिखने लगा तो ओमप्रकाश और उसकी पत्नी विद्यावती के साथ ही विशाल और पुत्री बबीता का शव देख अवाक रह गए।
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पुलिसिया कार्रवाई पूरी होने के बाद जब एक साथ चार शव निकले तो मृतक उमाशंकर की 70 वर्षीय बूढ़ी मां, उसकी विवाहित बेटी और अन्य बचे बच्चे दहाड़े मार कर रो पड़े। बूढ़ी मां और बच्चों की चीत्कार सुन वहां मौजूद सभी की आंखों में आंसू भर आए और गले रूंध गए। अनाथ मासूमों को देख लोगों को कलेजा हिल जा रहा था। वहीं सगे-संबंधी रूंधे गले और आंखों के आंसू लिए ढांढ़स बढ़ाने में जुटे रहे। हालांकि हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा था कि अब ये परिवार आखिर कैसे चलेगा। बेटे-बहू और पोते को खोने वाली दादी के आंसू भरे आंखों में अन्य बच्चों के भविष्य की चिंता साफ दिख रही थी।
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