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मां का मस्तक ऊंचा होता बेटों के बलिदानों से....
ब्यूरो/अमर उजाला/बलिया
Updated Mon, 04 Apr 2016 12:25 AM IST
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कवि सम्मेलन में मंचासीन कवि एवं कवियत्री।
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नगर के साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था शारदा संस्थान (मनन एवं सृजन) के तत्वावधान में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन सेमुषी विद्यापीठ रेवती में शनिवार की रात को आयोजित हुआ। कवि और शायरों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाईं। बाद में कवियों और अतिथियों को सम्मानित किया गया।
शुरुआत मे सबीना अदीब ने सरस्वती वंदना की। कवि वेदव्रत वाजपेयी ने सुनाया कि देश नहीं बनता मिट्टी-गिट्टी के मकानों से, मां का मस्तक ऊंचा होता बेटों के बलिदानों से...।
सरिता शर्मा ने लहर जैसी चपलता तो मुझमें भी है, अनकही एक विकलता तो मुझमें भी है सुना कर तालियां बटोरी।
प्रमोद तिवारी ने गीत बहुत आते हैं गुड्डा-गुड़ियों वाले दिन, याद आते हैं दस पैसे के चूर्ण के दो पुड़िया वाले दिन पढ़कर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। शायर अशोक साहिल ने जिदंगी क्या है, रेंगती नागिन लम्हा-लम्हा सरकती जाती है सुनाई।
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हास्य कवि आशीष अनल ने अपनी रचना तिरंगा को पढ़कर तिरंगे के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावा सुदीप भोला, अनामिका अंबर, वाहिद अली वाहिद, गजेंद्र प्रियांशु, प्रख्यात मिश्र ने अपनी रचनाएं पेश कीं। कवियों ने अपनी कृतियों से व्यवस्था पर खूब तंज किया और श्रोताओं को हंसाया।
अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष व्यासजी गोंड ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। बांसडीह के एसडीएम अरविंद राय, बैरिया के देवेश गुप्त ने दीप जलाया। मंत्री रामेश्वर नाथ तिवारी ने जहां 14 वर्षों के बाद शुरू किए गए कवि सम्मेलन के बारे में बताया
वहीं अध्यक्ष ब्रह्मेश्वर नाथ पांडेय ने संस्थान के रचना धर्मिता पर प्रकाश डाला। संयोजक अभिज्ञान तिवारी ने आभार जताया। मुख्य अतिथि बैरिया विधायक जेपी अंचल, पूर्व मंत्री बच्चा पाठक, भाजपा नेत्री केतकी सिंह, ब्लाक प्रमुख विनय शंकर अंचल को अंगवस्त्रम से जहां सम्मानित किया गया।
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शुरुआत मे सबीना अदीब ने सरस्वती वंदना की। कवि वेदव्रत वाजपेयी ने सुनाया कि देश नहीं बनता मिट्टी-गिट्टी के मकानों से, मां का मस्तक ऊंचा होता बेटों के बलिदानों से...।
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सरिता शर्मा ने लहर जैसी चपलता तो मुझमें भी है, अनकही एक विकलता तो मुझमें भी है सुना कर तालियां बटोरी।
प्रमोद तिवारी ने गीत बहुत आते हैं गुड्डा-गुड़ियों वाले दिन, याद आते हैं दस पैसे के चूर्ण के दो पुड़िया वाले दिन पढ़कर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। शायर अशोक साहिल ने जिदंगी क्या है, रेंगती नागिन लम्हा-लम्हा सरकती जाती है सुनाई।
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हास्य कवि आशीष अनल ने अपनी रचना तिरंगा को पढ़कर तिरंगे के महत्व को रेखांकित किया। इसके अलावा सुदीप भोला, अनामिका अंबर, वाहिद अली वाहिद, गजेंद्र प्रियांशु, प्रख्यात मिश्र ने अपनी रचनाएं पेश कीं। कवियों ने अपनी कृतियों से व्यवस्था पर खूब तंज किया और श्रोताओं को हंसाया।
अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष व्यासजी गोंड ने फीता काटकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। बांसडीह के एसडीएम अरविंद राय, बैरिया के देवेश गुप्त ने दीप जलाया। मंत्री रामेश्वर नाथ तिवारी ने जहां 14 वर्षों के बाद शुरू किए गए कवि सम्मेलन के बारे में बताया
वहीं अध्यक्ष ब्रह्मेश्वर नाथ पांडेय ने संस्थान के रचना धर्मिता पर प्रकाश डाला। संयोजक अभिज्ञान तिवारी ने आभार जताया। मुख्य अतिथि बैरिया विधायक जेपी अंचल, पूर्व मंत्री बच्चा पाठक, भाजपा नेत्री केतकी सिंह, ब्लाक प्रमुख विनय शंकर अंचल को अंगवस्त्रम से जहां सम्मानित किया गया।