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गैर प्रांतों तक फैली थी इस मठ की ख्याति
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
Updated Sun, 10 Jul 2016 11:56 PM IST
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चंडीहार मठ
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क्षेत्र के सलेमपुर गांव के पास अवला नदी के किनारे करीब छह सौ साल पुराना चंडीहार मठ स्थित है। लोगों की मानें तो इस मठ की स्थापना डुमराज नरेश के योगदान से हुई थी। एक समय था जब इस मठ में जनपद सहित गैर जनपदों और गैर प्रांतों के श्रद्धालु आते थे। इस मठ पर चंडी चंडेश्वर जागृत मंदिर है। मान्यता है कि श्रद्धालुओं ने सच्चे मन से इस मंदिर में जाकर जो भी मन्नतें मांगी, वह पूरी हुई। लेकिन आज यह मठ उदासीनता के कारण जर्जर अवस्था में पहुंच गया है।
किंवदंती है कि सालों पहले अवला नदी के किनारे चंडीहार मठ की स्थापना डुमरांव नरेश के सहयोग से की गई थी। इस मठ के पास सवा सौ बिगहा की अचल संपत्ति थी। साथ ही इस मठ की प्रसिद्ध जिले के साथ ही गैर जनपद और प्रांतों में थी। इस मठ पर दूर-दराज के श्रद्धालुु और संत पहुंचकर यहां आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में सिरकत करते थे। यही नहीं देवी का दर्जन पूजन कर अपनी मन्नते मांगते थे। उनको विश्वास था कि मां चंडी से मांगी मन्नत हर हाल में पूरी होती है।
यह मठ आज भी आस्था का केंद्र है। मठ की देखरेख वर्तमान में अंजनी कुमार शुक्ल द्वारा किया जा रहा है। यदि मठ की भूमि पर अवैध लोगों का कब्जा रहा और विवाद चलता रहा तो यह मठ धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो बैठेगा। समाज की जिम्मेदारी है कि धरोहर रूपी मठ की सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए आगे आकर उसे फिर से उसकी कीर्ति वापस लाएं।
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किंवदंती है कि सालों पहले अवला नदी के किनारे चंडीहार मठ की स्थापना डुमरांव नरेश के सहयोग से की गई थी। इस मठ के पास सवा सौ बिगहा की अचल संपत्ति थी। साथ ही इस मठ की प्रसिद्ध जिले के साथ ही गैर जनपद और प्रांतों में थी। इस मठ पर दूर-दराज के श्रद्धालुु और संत पहुंचकर यहां आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में सिरकत करते थे। यही नहीं देवी का दर्जन पूजन कर अपनी मन्नते मांगते थे। उनको विश्वास था कि मां चंडी से मांगी मन्नत हर हाल में पूरी होती है।
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यह मठ आज भी आस्था का केंद्र है। मठ की देखरेख वर्तमान में अंजनी कुमार शुक्ल द्वारा किया जा रहा है। यदि मठ की भूमि पर अवैध लोगों का कब्जा रहा और विवाद चलता रहा तो यह मठ धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो बैठेगा। समाज की जिम्मेदारी है कि धरोहर रूपी मठ की सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए आगे आकर उसे फिर से उसकी कीर्ति वापस लाएं।
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