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Ballia News: आग ने छीन लिया 39 परिवारों का आशियाना
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बैरिया। गोपालनगर साहनी बस्ती में बुधवार रात लगी भीषण आग में 39 परिवारों की 125 झोपड़ियां स्वाह हो गई। अगलगी में पांच मोटरसाइकिल, 55 साइकिल, खाने पीने के सामान के साथ ही आठ लाख की नगदी और आभूषण भी जलकर राख हो गए। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियों ने ग्रामीणों के सहयोग से आग पर काबू पाया। हादसे के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
गोपालनगर साहनी बस्ती में बुधवार रात दो बजे सिपाही साहनी के घर अज्ञात कारणों से आग लग गई। जब तक लोग आग बुझाने का प्रयास करने में जुटे तब तक आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते लल्लन साहनी, ज्ञांती देवी पत्नी मुन्नीलाल साहनी, रविशंकर साहनी, नरहरी साहनी, भोला साहनी, टुनटुन साहनी, मंटू साहनी, मुकुल साहनी, मुकेश साहनी, राजेश शाह, श्रवण शाह, भोला शाह, छोटक शाह, रोहित शाह, दिलीप शाह, रोहित शाह सहित 39 परिवारों की 125 रिहायशी झोपड़ी राख हो गईं।
उसमें रखी तीन मोटरसाइकिल, 55 साइकिल, नगदी करीब 8 लाख से अधिक, आभूषण, खाद्यान्न, पशुचारा, चौकी सब कुछ जलकर राख हो गया। फायर ब्रिगेड के दीवान ददन राम रात में आग बुझाते समय फिसल कर गिर गए और जख्मी हो गए। काफी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां चार घंटे बाद आग पर काबू पा सकीं। अग्निकांड पीड़ित खुले आसमान के नीचे आ गए है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अभिमन्यु यादव ने अग्निपीड़ितों को पका भोजन उपलब्ध कराया। 39 परिवारों की झोपड़ियां जलने से लोग रोड पर आ गए हैं। खाने पीने का सारा सामान जल गया है। परिजन बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था में जुट गए हैं। मौके पर सब एक दूसरे को दिलासा देते नजर आए। कोई जले सामान से परिवार के लिए चावल चुन रहा था तो कोई घर का बचा सामान। मंजर ऐसा कि देखने वाले की रूह कांप जाए।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व देवेन्द्र प्रताप सिंह, एसडीएम बैरिया आत्रेय मिश्र, पूर्ति निरीक्षक संजीव कुमार, नायब तहसीलदार राजेश यादव, लेखपाल राजू यादव ने घटना की जानकारी ली। एसडीएम के देखरेख में अग्निपीड़ितों को तिरपाल वितरण किया। लोगों ने बताया कि आग लगने से पूरे गांव में अफरा-तफर मच गई थी। लोग अपनी-अपनी जान बचा कर भागने लगे थे। जैसे- तैसे फायर ब्रिगेड को सूचना दी। अग्निपीड़ितों को एसडीएम ने भरोसा दिया कि तीन दिनों के अंदर राहत का पैसा खाते में भेज दिया जाएगा।
कइसे होई गुजारा...सबकुछ जल गइल
बैरिया। हमार सब कुछ जल गइल हो दादा, अब हमनी के कईसे गुजरा होई...। एक तरफ अग्निपीड़ित आग से अधजला चावल व अन्य सामग्री किसी तरह समेटने में लगे हुए थे। दूसरी तरह छोटे-छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे। अग्निपीड़ितों का कहना है कि तिनका-तिनका जुटाकर हमने झोपड़ी खड़ी की थी। इसमें परिवार व बच्चों का सपना बुन रहे थे। अग्नि तांडव में सबकुछ जलकर राख हो गया। कई लोगों ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार हर साल सैकड़ों प्रधानमंत्री आवास व मुख्यमंत्री आवास के लिए करोड़ों रुपये भुगतान करती है।
बावजूद दियारा क्षेत्र में सैकड़ों परिवार आज भी झोपड़ियों में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गरीबी का मंजर देखना है तो दियरा क्षेत्र के झोपड़ियों में पहुंचें तब एहसास होगा कि इन लोगों का जीवन कैसे व्यतीत हो रहा है। तहसील प्रशासन से तिरपाल मिलते ही चिलचिलाती धूप में छोटी से तिरपाल के अंदर छोटे-छोटे बच्चों के साथ पांच से सात लोग छांव में राहत पाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, तिरपाल से औरतों की सिसकियां बाहर निकल रही थीं तो सिसकियों को सुन आम लोगों का कलेजा फटकर रह जा रहा था।
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गोपालनगर साहनी बस्ती में बुधवार रात दो बजे सिपाही साहनी के घर अज्ञात कारणों से आग लग गई। जब तक लोग आग बुझाने का प्रयास करने में जुटे तब तक आग ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते लल्लन साहनी, ज्ञांती देवी पत्नी मुन्नीलाल साहनी, रविशंकर साहनी, नरहरी साहनी, भोला साहनी, टुनटुन साहनी, मंटू साहनी, मुकुल साहनी, मुकेश साहनी, राजेश शाह, श्रवण शाह, भोला शाह, छोटक शाह, रोहित शाह, दिलीप शाह, रोहित शाह सहित 39 परिवारों की 125 रिहायशी झोपड़ी राख हो गईं।
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उसमें रखी तीन मोटरसाइकिल, 55 साइकिल, नगदी करीब 8 लाख से अधिक, आभूषण, खाद्यान्न, पशुचारा, चौकी सब कुछ जलकर राख हो गया। फायर ब्रिगेड के दीवान ददन राम रात में आग बुझाते समय फिसल कर गिर गए और जख्मी हो गए। काफी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां चार घंटे बाद आग पर काबू पा सकीं। अग्निकांड पीड़ित खुले आसमान के नीचे आ गए है।
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ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अभिमन्यु यादव ने अग्निपीड़ितों को पका भोजन उपलब्ध कराया। 39 परिवारों की झोपड़ियां जलने से लोग रोड पर आ गए हैं। खाने पीने का सारा सामान जल गया है। परिजन बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था में जुट गए हैं। मौके पर सब एक दूसरे को दिलासा देते नजर आए। कोई जले सामान से परिवार के लिए चावल चुन रहा था तो कोई घर का बचा सामान। मंजर ऐसा कि देखने वाले की रूह कांप जाए।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व देवेन्द्र प्रताप सिंह, एसडीएम बैरिया आत्रेय मिश्र, पूर्ति निरीक्षक संजीव कुमार, नायब तहसीलदार राजेश यादव, लेखपाल राजू यादव ने घटना की जानकारी ली। एसडीएम के देखरेख में अग्निपीड़ितों को तिरपाल वितरण किया। लोगों ने बताया कि आग लगने से पूरे गांव में अफरा-तफर मच गई थी। लोग अपनी-अपनी जान बचा कर भागने लगे थे। जैसे- तैसे फायर ब्रिगेड को सूचना दी। अग्निपीड़ितों को एसडीएम ने भरोसा दिया कि तीन दिनों के अंदर राहत का पैसा खाते में भेज दिया जाएगा।
कइसे होई गुजारा...सबकुछ जल गइल
बैरिया। हमार सब कुछ जल गइल हो दादा, अब हमनी के कईसे गुजरा होई...। एक तरफ अग्निपीड़ित आग से अधजला चावल व अन्य सामग्री किसी तरह समेटने में लगे हुए थे। दूसरी तरह छोटे-छोटे बच्चे भूख से बिलबिला रहे थे। अग्निपीड़ितों का कहना है कि तिनका-तिनका जुटाकर हमने झोपड़ी खड़ी की थी। इसमें परिवार व बच्चों का सपना बुन रहे थे। अग्नि तांडव में सबकुछ जलकर राख हो गया। कई लोगों ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार हर साल सैकड़ों प्रधानमंत्री आवास व मुख्यमंत्री आवास के लिए करोड़ों रुपये भुगतान करती है।
बावजूद दियारा क्षेत्र में सैकड़ों परिवार आज भी झोपड़ियों में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। गरीबी का मंजर देखना है तो दियरा क्षेत्र के झोपड़ियों में पहुंचें तब एहसास होगा कि इन लोगों का जीवन कैसे व्यतीत हो रहा है। तहसील प्रशासन से तिरपाल मिलते ही चिलचिलाती धूप में छोटी से तिरपाल के अंदर छोटे-छोटे बच्चों के साथ पांच से सात लोग छांव में राहत पाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, तिरपाल से औरतों की सिसकियां बाहर निकल रही थीं तो सिसकियों को सुन आम लोगों का कलेजा फटकर रह जा रहा था।