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समाज में महिलाओं के उत्पीड़न और शोषण पर लगेगी रोक

Tue, 22 Aug 2017 11:04 PM IST
ballia
ballia Updated Tue, 22 Aug 2017 11:04 PM IST
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The ban on women's oppression and exploitation in society
tripel talak
तीन तलाक को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इस पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया रही। महिलाओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश हित में स्वागत योग्य है। तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में सुधार होगा और समाज में उनके उत्पीड़न, शोषण पर रोक लगेगी। वहीं, दूसरी ओर उलेमा ने कहा कि तीन तलाक मसले पर न्यायालय और सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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तीन तलाक पीड़िता सरोज खान ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं। शौहर ने शादी के सालभर बाद तीन तलाक देकर सारे रिश्ते खत्म कर दिए थे। ससुराल से निकाल दिया गया और उनकी जिंदगी बरबाद हो कर रह गई। कहा कि उन्हें तलाक देने से पहले शारीरिक तकलीफ से गुजरना पड़ा। कोर्ट के फैसले से वह खुश हैं। शबनम बानो बोलीं कि तीन तलाक खत्म होने से मुस्लिम महिलाओं की स्थिति में सुधार साथ ही समाज में उनके उत्पीड़न और शोषण पर रोक लगेगी। अब तक तीन तलाक के बाद उनका जो शोषण होता था वह रुक जाएगा।
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एलएलबी की छात्रा सुमैया का कहना है कि तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला महिलाओं के हित में होगा। महिलाओं का शोषण कम होगा और उन्हें यह फैसला सुकून देगा। अधिवक्ता रेशमा परवीन ने कहा कि  सुप्रीम कोर्ट का तीन तलाक पर फैसला देश हित में है। इससे महिलाओं को आत्मबल मिलेगा।
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महिलाओं को भी समाज में बराबरी का हक मिलना चाहिए।

मदरसा अरबिया मखजामुन ओलुम धनौती के शिक्षक हाफिज इलियास ने कहा कि सभी धर्म के लोग अपने-अपने धर्म के हिसाब से जीते व रहते हैं।            संविधान ने उन्हें यह अधिकार भी दिया है। हम भी अपने धर्म के हिसाब से कोई कार्य करते हैं, इसमें न्यायालय और केंद्र सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि इस पर फैसला करना उलेमा का काम है।
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