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सिस्टम का दंश झेलने को मजबूर हैं कार्डधारक!

Tue, 27 Jun 2017 11:25 PM IST
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ballia Updated Tue, 27 Jun 2017 11:25 PM IST
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System holders are forced to bear the bite
Ration card
बलिया। तमाम प्रयासों के बावजूद जिले में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है।14 महीने बाद भी राशन कार्ड संशोधन का काम पूरा नहीं हो सका है।    जिले में वर्ष 2005 में ग्रामीण व शहरी इलाकों के लोगों को राशन कार्ड मुहैया कराया।
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कुल तीन तरह के राशन कार्ड बनाए गए थे जिसमें अन्त्योदय, बीपीएल व एपीएल कार्ड थे। कुल पांच लाख 85 हजार राशन कार्ड जिले में बने थे, इसमें एक लाख एक हजार 701अन्त्योदय, एक लाख 61 हजार 16 बीपीएल व तीन लाख 22 हजार 283 एपीएल कार्डधारक थे।
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शासन के नियमों के मुताबिक राशन कार्ड की वैधता पांच साल की ही होती है लिहाजा वर्ष 2010 राशन कार्ड बनना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो सका और शासन ने पुराने राशन कार्ड की ही वैधता बढ़ा दी। इसके बाद लगातार वैधता बढ़ती रही और वर्ष 2014 में राशन कार्ड बनाने की प्रकिया शुरु हुई। लेकिन इसके बाद से लगातार नियम बदलते रहे और राशन कार्ड बनवाने के लिए लोग समय-समय पर आवेदन भी करते रहे।
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प्रक्रिया चल ही रही थी कि वर्ष 2015 में एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू करने का फरमान जिले में पहुंचा और एकबार फिर राशन कार्ड बनाने के लिए नए तरीके से प्रक्रिया शुरु हुई। अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से गांव से लेकर शहरी इलाकों तक सर्वे कर पात्र गृहस्थी व अन्त्योदय कार्डधारकों का चयन किया।


हालांकि यह प्रावधान किया गया कि अन्त्योदय कार्डधारक ज्यों के त्यों रहेंगे और बीपीएल कार्डधारकों को पात्र गृहस्थी में शामिल करते हुए मानक के अनुसार पात्र गृहस्थी का चयन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों की सूची ब्लाकों व नगरीय इलाकों की सूची नगरपालिका व नगर पंचायत कार्यालय से पूर्ति विभाग को भेजी गई।


पूर्ति विभाग की ओर से कार्डधारकों की फीडिंग कराई गई और शासन ने मार्च 2016 में सूची को ऑनलाइन प्रदर्शित किया तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद संशोधन का काम शुरु हुआ जो आज भी चल रहा है और पूर्ति विभाग की मनमानी जारी है। आलम यह है कि संशोधन के नाम पर हर महीने सूची बदलती है कार्डधारकों के नाम काटने व जोडने का %खेल % किया जाता है।        


जिले में हैं 600622 राशन कार्डधारक      
जिले में कुल छह लाख 622 राशन कार्ड बने हैं। इसमें पात्र गृहस्थी के कुल चार लाख 98 हजार 9211 तथा अन्त्योदय के कुल एक लाख एक हजार 701 हैं। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र गृहस्थी के कुल चार लाख 61 हजार 939 व शहरी क्षेत्रों में 36 हजार 982 तथा अन्त्योदय के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 91 हजार 668 व शहरी क्षेत्रों में 10 हजार 33 हैं।       


जारी है कार्डधारकों से कटौती      
बलिया। नियमानुसार पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट पांच किलो अनाज व अन्त्योदय कार्डधारकों को प्रति कार्डधारक 35 किलो अनाज देने का प्रावधान है। लेकिन जिलेभर में कोटेदारों की ओर से कार्डधारकों से दो से पांच किलो तक कटौती की जाती है।

इसको लेकर आए दिन हो-हल्ला भी मचता है लेकिन जांच के नाम पर अधिकारी केवल कोरम करते हैं और स्थिति ज्यों की त्यों रह जाती है। यहां तक कि शासन की ओर से निर्धारित थ्री स्टेज चेकिंग भी इसे रोक पाने में कारगर साबित नहीं हो पा रही है।      

 

हर महीने आवंटन के साथ ही कोटेदारों को मानक के अनुसार वितरण करने का निर्देश दिया जाता है। वितरण में गड़बड़ी करने की शिकायत मिलने पर संबंधित कोटेदारों के खिलाफ निलंबन, निरस्तीकरण या मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाती है।      -वीके सिंह , डीएसओ, बलिया।
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