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सूरत-ए- हाल जिला महिला अस्पताल का
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 21 Jun 2016 10:42 PM IST
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दिल धड़कता देख परिजन बोले जिंदा है रामदास डॉक्टर बोले ब्रेन डेड है, बचने की उम्मीद नहीं
- फोटो : bureau
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जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों के आने का कोई समय निर्धारित नहीं रह गया है, मरीज सुबह से ही आकर इंतजार में बैठ जाते हैं लेकिन डॉक्टर दस बजे के बाद ही पहुुंचेंगे, इसकी एक बानगी मंगलवार को देखने को मिली,
जिला महिला अस्पताल में प्रसूति व अन्य रोग से ग्रसित महिलाएं सुबह आठ बजे ही पर्ची कटाकर उपचार के लिए चिकित्सकों का इंतजार कर रही थी, लेकिन दस बजे तक कोई भी चिकित्सक ओपीडी में उपस्थित नहीं था। ऐसी स्थिति महिला अस्पताल की नियति बन गई है।
इतना ही नहीं, अस्पताल में लगा अल्ट्रासोनोग्राफी केवल शो पीस बनकर रह गया है। मंगलवार को सुबह कार्यालय तो खुला था लेकिन कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं था। इसको लेकर मरीजों की लंबी लाइन जांच कराने के लिए जांच कक्ष के बाहर खड़ी रही।
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जिला महिला अस्पताल में प्रसूति व अन्य रोग से ग्रसित महिलाएं सुबह आठ बजे ही पर्ची कटाकर उपचार के लिए चिकित्सकों का इंतजार कर रही थी, लेकिन दस बजे तक कोई भी चिकित्सक ओपीडी में उपस्थित नहीं था। ऐसी स्थिति महिला अस्पताल की नियति बन गई है।
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इतना ही नहीं, अस्पताल में लगा अल्ट्रासोनोग्राफी केवल शो पीस बनकर रह गया है। मंगलवार को सुबह कार्यालय तो खुला था लेकिन कोई कर्मचारी उपस्थित नहीं था। इसको लेकर मरीजों की लंबी लाइन जांच कराने के लिए जांच कक्ष के बाहर खड़ी रही।
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