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गर्मी ने दी दस्तक, न लक्ष्य, न निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो /बलिया
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:07 AM IST
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गर्मी की शुरूआत होने के बावजूद जिले में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर विभाग उदासीन है। हालांकि विभागीय अधिकारी शासन की ओर से जारी निर्देश व लक्ष्य की ओर टकटकी लगाए हुए है। जनपद में कुल 949 गांवों के सापेक्ष महज 106 पेयजल परियोजनाएं ही संचालित हैं।
हर साल गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे जाने के कारण अधिकांश हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो जाता है। जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा जलस्तर नीचे होने का असर सिंचाई के लिए स्थापित नलकूपों पर भी पड़ता है और सिंचाई का कार्य भी बाधित हो जाता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता की मानें तो जिले में कुल 106 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। प्रत्येक पेयजल योजना के तहत तीन-चार गांवों को पाइप लाइन के जरिए पेयजल की सप्लाई की जाती है। पेजयल योजना के तहत डीप बोरिंग के नलकूप स्थापित किए गए हैं और जलस्तर नीचे हो जाने के बावजूद नलकूपों का संचालन प्रभावित नहीं होता है। हालांकि सभी परियोजनाएं बिजली से संचालित होती हैं और बिजली का संकट होने की स्थिति में ही यह नलकूप बंद होते हैं। एक्सईएन ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व से ही ग्रामीण इलाकों में कुल 44 हजार व नगरीय इलाकों में कुल ढाई हजार इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगे हुए हैं। गर्मी को देखते हुए ब्लॉक, नगर पंचायत व नगरपालिका के अधिकारियों से हैंडपंपों की स्थिति की जानकारी मांगी गई है। अधिकारी की मानें तो शासन की ओर से अभी कोई निर्देश व लक्ष्य का निर्धारण नहीं किया गया है। बताया कि निर्देश के अनुसार ही कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
हर साल गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे जाने के कारण अधिकांश हैंडपंपों से पानी निकलना बंद हो जाता है। जिससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा जलस्तर नीचे होने का असर सिंचाई के लिए स्थापित नलकूपों पर भी पड़ता है और सिंचाई का कार्य भी बाधित हो जाता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता की मानें तो जिले में कुल 106 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। प्रत्येक पेयजल योजना के तहत तीन-चार गांवों को पाइप लाइन के जरिए पेयजल की सप्लाई की जाती है। पेजयल योजना के तहत डीप बोरिंग के नलकूप स्थापित किए गए हैं और जलस्तर नीचे हो जाने के बावजूद नलकूपों का संचालन प्रभावित नहीं होता है। हालांकि सभी परियोजनाएं बिजली से संचालित होती हैं और बिजली का संकट होने की स्थिति में ही यह नलकूप बंद होते हैं। एक्सईएन ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व से ही ग्रामीण इलाकों में कुल 44 हजार व नगरीय इलाकों में कुल ढाई हजार इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगे हुए हैं। गर्मी को देखते हुए ब्लॉक, नगर पंचायत व नगरपालिका के अधिकारियों से हैंडपंपों की स्थिति की जानकारी मांगी गई है। अधिकारी की मानें तो शासन की ओर से अभी कोई निर्देश व लक्ष्य का निर्धारण नहीं किया गया है। बताया कि निर्देश के अनुसार ही कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा जाएगा।
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