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सुखपुरा शहीद दिवस: आज के ही दिन अंग्रेज सिपाहियों की गोली से शहीद हुए दो क्रांतिवीर

Mon, 22 Aug 2022 11:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 11:00 PM IST
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Sukhpura Martyrs Day: On this day, two revolutionaries were martyred by the bullets of British soldiers.
सुखपुरा। 1942 की क्रांति के दौरान जब पूरा देश आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था, उस समय सुखपुरा के भी क्रांतिकारी अग्रणी भूमिका में थे। यहां के वीर सपूतों ने संघर्ष की जो गाथा लिखी, वह इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। 23 अगस्त 1942 को अंग्रेज सिपाहियों से बंदूक छीनने की घटना के बाद अंग्रेजों ने सुखुपरा गांव में धावा बोल दिया और दो क्रांतिकारियों को गोली मार दी। एक के न मिलने पर उनके घर के जानवरों को भी नहीं बख्शा। उन्हीं शहीदों को नमन करने के लिए हर वर्ष 23 अगस्त को सुखपुरा शहीद दिवस मनाया जाता है।
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17 अगस्त 1942 को पांच अंग्रेज सिपाही देवरिया से बेल्थरारोड होते हुए सुखपुरा होकर बलिया जिला मुख्यालय जा रहे थे। सुखपुरा से तीन किमी पहले भरखरा गांव के समीप जब अंग्रेज सिपाही पहुंचे तो पहले से घात लगाकर बैठे क्रांतिकारियों ने अंग्रेज सिपाहियों से बंदूक छीनकर वर्दी उतरवाकर उन्हें भारतीय परिधान में रवाना कर दिया। बंदूक छीनने वाले क्रांतिवीरों में नागेश्वर राय, हीरा गोंड, जंग बहादुर सिंह, राजनारायण सिंह तथा भरखरा के लोग शामिल थे। सिपाही जब सुखपुरा चट्टी पर पहुंचे तो कुछ लोगों ने उनकी दशा देखकर मानवीय संवेदना दिखाते हुए उन्हें नाश्ता कराया। इस घटना ने अंग्रेज हुकूमत को हिलाकर रख दिया। उधर, क्रांतिकारी चित्तू पांडेय की अगुवाई में 19 अगस्त को बलिया आजाद हो गया था और इसे लेकर चारों ओर खुशी की लहर थी। 17 अगस्त की घटना से खार खाए अंग्रेजों ने सुखपुरा में 23 अगस्त को जमकर तांडव मचाया। अंग्रेज सिपाहियों ने बंदूक छीनने को लेकर सुखपुरा गांव में धावा बोल दिया। पूरा गांव अंग्रेज सिपाहियों के बूटों की आवाज और गोलियों की तड़तड़ाहट से सहम गया था। कस्बा के वरिष्ठ कांग्रेसी चंडी लाल को चट्टी पर अंग्रेज सिपाहियों ने गोली मार दी। इसके बाद सुखपुरा के महंत यदुनाथ गिरि के दरवाजे पर गए। महंत तो पिछले दरवाजे से भाग गए लेकिन उनके हाथी और कुत्ते को अंग्रेजों ने गोली मार दी। वहां से गौरी शंकर को खोजते हुए आगे बढ़े और उनको गोली मार दी। जबकि कुलदीप सिंह अंग्रेज सिपाहियों से बचकर भाग निकले और फिर कभी घर वापस नहीं लौटे। इन्हीं लोगों की याद में हर वर्ष सुखपुरा में शहीद मेला का आयोजन किया जाता है।
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