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सुबह जुड़ती है आस पर शाम निराश

Wed, 16 Nov 2016 08:07 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया Updated Wed, 16 Nov 2016 08:07 PM IST
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subah judti hai aas par sham nirash
50 and 100 rupee
क्षेत्र के किसान रवि की बुआई व शादी विवाह करने वालों के लिए बडे़ नोट बंद करना आपदा के समान लगने लगा है। क्योंकि एक सप्ताह से अधिक बीतने के बाद भी कई लोग बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी अपने रुपये नहीं पा सके। जयप्रकाशनगर निवासी समाजसेवी सूर्यभान सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह निर्णय बहुत ही सराहनीय है।
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लेकिन किसानों एवं शादी-विवाह वाले घरों के परिवारों के लिए कुछ व्यवस्था होनी चाहिए। धतुरी टोला निवासी किसान अशोक कुमार सिंह का कहना है कि इस निर्णय से हम लोग खुश जरूर है लेकिन हम लोगों को खाद एवं बीजों के  लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग किया है तत्काल खाद-बीज गोदाम तथा समितियों पर पांच सौ और एक हजार के नोट लिए जाएं।
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डोमनराय के टोला निवासी किसान रामकुमार ङ्क्षसह का कहना है कि मोदी का निर्णय सर्वोपरि है। लेकिन इस बात का ख्याल जरूर करना चाहिए था कि हम किसानों के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था किया जाए। चार दिनों से बैरिया स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा में जाकर कतार में लग रहा हूं लेकिन पैसा न मिलने से निराश होकर घर लौटना पड़ रहा है।
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सोनबरसा निवासी मनोज कुमार ओझा का कहना है कि बड़े नोटों के बंद होने से लोग खुश जरूर है। लेकिन हद तो तब हो गई शिवपुर घाट स्थित अंत्येष्ठि स्थल पर अंतिम संस्कार करने गए लोगों ने जब मुखाग्रि के समय आग देने वाले डोम द्वारा पांच सौ और एक हजार के नोटों को लेने से मना कर दिया गया। लोग अब करें तो क्या करें। 
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