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मृदा परीक्षण और कंपोस्ट खाद के गिनाए लाभ
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 26 Jun 2015 10:49 PM IST
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टीडी कालेज के कृषि रसायन एवं मृदा विभाग की ओर से 14 दिवसीय मृदा प्रशिक्षण एवं कंपोस्ंिटग तकनीकी परीक्षण के चौथे दिन शुक्रवार को कृषि के छात्रों को मिट्टी के परीक्षण का गुर बताया गया। साथ ही मृदा परीक्षण से होने वाले लाभ के बारे में बताया गया।
मुख्य वक्ता कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के सेवानिवृत्त निदेशक डा. ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की दशा खराब होती जा रही है। हर साल तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है और अनाज का उत्पादन नहीं बढ़ रहा। मृदा परीक्षण और कंपोस्ट खाद के प्रयोग से जहां उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी खत्म नहीं होती। बिगड़ते मानव स्वास्थ्य के लिए रासायनिक उर्वरकों का बेतहाशा इस्तेमाल भी है। बताया कि देश में हजारों बड़ी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्य कर रही हैं। अब समय आ गया है कि पैथालाजी केंद्र की तरह मृदा परीक्षण प्रयोगशाला केंद्र प्राइवेट में खुलें।
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कहा कि परीक्षण में मृदा का नमूना लेना आवश्यक नहीं है। आवश्यक है, उसे छाया में सुखाएं और ठीक से पिसाई करें। कहा कि किसी भी अपमिश्रण से बचाव कर ठीक प्रकार पैकिंग की जाए। इसी प्रकार कंपोजिट नमूना के लिए ठीक प्रकार से नमूने की तैयारी कर प्रयोगशाला पहुंचाएं। बताया कि पौधा नाइट्रोजन को नाइट्रेट और अमोनियम के रूप में लेता है। इस मौके पर प्रशिक्षक समन्वयक डा. अशोक कुमार सिंह, डा. बृजेश सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. दिलीप कुमार उपाध्याय, डा. वीके सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के सेवानिवृत्त निदेशक डा. ओपी श्रीवास्तव ने कहा कि असंतुलित उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की दशा खराब होती जा रही है। हर साल तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है और अनाज का उत्पादन नहीं बढ़ रहा। मृदा परीक्षण और कंपोस्ट खाद के प्रयोग से जहां उत्पादकता बढ़ा सकते हैं।
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वहीं मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी खत्म नहीं होती। बिगड़ते मानव स्वास्थ्य के लिए रासायनिक उर्वरकों का बेतहाशा इस्तेमाल भी है। बताया कि देश में हजारों बड़ी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं कार्य कर रही हैं। अब समय आ गया है कि पैथालाजी केंद्र की तरह मृदा परीक्षण प्रयोगशाला केंद्र प्राइवेट में खुलें।
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कहा कि परीक्षण में मृदा का नमूना लेना आवश्यक नहीं है। आवश्यक है, उसे छाया में सुखाएं और ठीक से पिसाई करें। कहा कि किसी भी अपमिश्रण से बचाव कर ठीक प्रकार पैकिंग की जाए। इसी प्रकार कंपोजिट नमूना के लिए ठीक प्रकार से नमूने की तैयारी कर प्रयोगशाला पहुंचाएं। बताया कि पौधा नाइट्रोजन को नाइट्रेट और अमोनियम के रूप में लेता है। इस मौके पर प्रशिक्षक समन्वयक डा. अशोक कुमार सिंह, डा. बृजेश सिंह, डा. धर्मेंद्र सिंह, डा. दिलीप कुमार उपाध्याय, डा. वीके सिंह आदि लोग मौजूद रहे।