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तीन साल से नहीं परखी गई मिट्टी की सेहत
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बलिया। जिले में पिछले तीन साल से मिट्टी की सेहत नहीं परखी गई। कोविड के बाद से सरकार ने इसके लिए बजट देने से हाथ पीछे खींच लिए थे। हालात यह है कि बजट के अभाव में मिट्टी की जांच का काम तीन साल से ठप पड़ा है। मिट्टी जांच बंद हो जाने से इस मद में खर्च रकम भी अब पानी में जाती दिखती है।
मिट्टी के मुताबिक उपज की बुवाई करने के लिए सरकार ने आठ साल पहले प्रधानमंत्री मृदा परीक्षण योजना लागू की थी। इसके जरिए सरकारी खर्च पर मिट्टी के भीतर मौजूद तत्वों का परीक्षण होता है और उसके मुताबिक किसानों को फसलें सुझाई जाती है। इसके अतिरिक्त किसानों को बकायदा स्वाइल हेल्थ कार्ड भी दिए गए थे। बताया जाता है कि अब तक सरकार इस पर करीब अस्सी लाख खर्च कर चुकी है लेकिन कोविड के सरकार ने इसे हाथ पीछे खींच लिए। अब जबकि सभी योजनाएं धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी हैं लेकिन सरकार द्वारा मृदा परीक्षण के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है, जिससे योजना ठप पड़ी है।
मिट्टी से खत्म होता जा रहा जीवांश
दलहनी एवं तिलहनी फसल के लिए सबसे जरूरी अंश जीवांश धीरे-धीरे जिले की मिट्टी से खत्म होता जा रहा है। दो साल पहले हुए आखिरी मृदा परीक्षण में जीवांश को गिरावट चिंताजनक स्तर पर पाई गई थी। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जीवांश कार्बन की मात्रा एक प्रतिशत प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए लेकिन यह 04 प्रतिशत ही पाया गया। इसी तरह फास्फेट, नाइट्रेट, पोटाश, जिंक, बोरॉन एवं गंधक भी चिंताजनक स्तर पर पाया गया। जबकि फसलों की सेहत के लिए यह अत्यंत आवश्यक तत्व हैं।
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बजट अभी नहीं मिला है। इस वजह से मिट्टी का परीक्षण नहीं हो पा रहा। जिन किसानों को जरूरत होती है, वह निजी संस्थानों में जाकर इनका परीक्षण करा लेते हैं। - इंद्राज, उपनिदेशक, कृषि, बलिया
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मिट्टी के मुताबिक उपज की बुवाई करने के लिए सरकार ने आठ साल पहले प्रधानमंत्री मृदा परीक्षण योजना लागू की थी। इसके जरिए सरकारी खर्च पर मिट्टी के भीतर मौजूद तत्वों का परीक्षण होता है और उसके मुताबिक किसानों को फसलें सुझाई जाती है। इसके अतिरिक्त किसानों को बकायदा स्वाइल हेल्थ कार्ड भी दिए गए थे। बताया जाता है कि अब तक सरकार इस पर करीब अस्सी लाख खर्च कर चुकी है लेकिन कोविड के सरकार ने इसे हाथ पीछे खींच लिए। अब जबकि सभी योजनाएं धीरे-धीरे पटरी पर आने लगी हैं लेकिन सरकार द्वारा मृदा परीक्षण के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया है, जिससे योजना ठप पड़ी है।
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मिट्टी से खत्म होता जा रहा जीवांश
दलहनी एवं तिलहनी फसल के लिए सबसे जरूरी अंश जीवांश धीरे-धीरे जिले की मिट्टी से खत्म होता जा रहा है। दो साल पहले हुए आखिरी मृदा परीक्षण में जीवांश को गिरावट चिंताजनक स्तर पर पाई गई थी। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जीवांश कार्बन की मात्रा एक प्रतिशत प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए लेकिन यह 04 प्रतिशत ही पाया गया। इसी तरह फास्फेट, नाइट्रेट, पोटाश, जिंक, बोरॉन एवं गंधक भी चिंताजनक स्तर पर पाया गया। जबकि फसलों की सेहत के लिए यह अत्यंत आवश्यक तत्व हैं।
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बजट अभी नहीं मिला है। इस वजह से मिट्टी का परीक्षण नहीं हो पा रहा। जिन किसानों को जरूरत होती है, वह निजी संस्थानों में जाकर इनका परीक्षण करा लेते हैं। - इंद्राज, उपनिदेशक, कृषि, बलिया