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स्मार्टफोन वाले अभिभावक बने मददगार, अब गरीबों के बच्चे भी कर रहे  ऑनलाइन पढ़ाई

Fri, 08 May 2020 03:40 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 08 May 2020 03:40 PM IST
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Smartphone parents become helpers, now children of poor are also studying online
अन्नू सिंह प्रधानाध्यापिका - फोटो : amar ujala

लॉकडाउन में अब वे बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है। आप सहसा इस पर भरोसा न करें, पर यह सोलह आने सच है।  ऐसे बच्चे उन अभिभावकों के पास जाकर पढ़ रहे हैं जो उनके घर के नजदीक हैं और उनके पास स्मार्टफोन है। यह सब संभव हुआ है विभाग के कुछ काबिल शिक्षकों की वजह से। जिन्होंने उन अभिभावकों को इसके लिए घर-घर जाकर तैयार किया। 

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शिक्षा क्षेत्र हनुमानगंज के प्राथमिक विद्यालय बघेजी की प्रधानाध्यापिका अन्नू सिंह बताती हैं कि ऑनलाइन एजुकेशन की शुरुआत तो कर दी गई लेकिन इससे सबको पढ़ाना संभव नहीं था। क्योंकि जो सक्षम परिवार था वह तो अपने बच्चों को स्मार्टफोन की सहायता से ऑनलाइन एजुकेशन दे रहा था, लेकिन बेसिक शिक्षा से जुड़े तमाम बच्चे इससे वंचित हो रहे थे क्योंकि उनके पास तो स्मार्टफोन ही नहीं था।
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ऐसे में सबसे पहले कीपैड मोबाइल की सहायता से बच्चों को मैसेज द्वारा पढ़ाना शुरू किया। फिर धीरे-धीरे सहायक अध्यापक रिचा शुक्ला, शिक्षामित्र सीमा सिंह, एसएमसी अध्यक्ष जयप्रकाश प्रसाद की सहायता से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। इस ग्रुप में आठ अभिभावकों को जोड़ा।
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फिर उनसे अपील की गई कि वे पास रहने वाले उन बच्चों को भी अपने घर बुला लें, जिनके माता-पिता के पास स्मार्टफोन नहीं हैं। उन्होंने इस बात को माना और इसका लाभ ये हुआ कि अत्यंत गरीब बच्चे भी अब आसानी से शिक्षा पा रहे हैं। अब ग्रुप की सहायता से लगभग सभी बच्चों को नए-नए शिक्षण कार्य करवाती हूं। ऑडियो एवं वीडियो की सहायता से प्रतिदिन नई चीजें बताई जाती हैं। बच्चों को ड्राइंग, आर्ट और क्राफ्ट वीडियो की सहायता से बनाना सिखाया जाता है।
 

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श्वेता सिंह सहायक अध्यापक - फोटो : amar ujala

शिक्षा क्षेत्र बेरुआरबारी के प्राथमिक विद्यालय हरिहर नगर की सहायक अध्यापक श्वेता सिंह बताती हैं कि प्रसूति अवकाश पर होने के कारण शिक्षण और बच्चों से मेरा कनेक्शन लगभग कमजोर पड़ चुका था। आनलाइन क्लास की सूचना ने मेरे अन्दर एक नवीन उर्जा भर दी है। शैक्षिक वीडियोज बनाने शुरू किए तथा उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर करना शुरु किया, जिसका लाभ तमाम शिक्षक और बच्चे ले रहे हैं।

कई शिक्षकों के मैसेज मुझे प्राप्त हो रहें हैं कि उन्हें मेरी क्लासेज से फायदा मिल रहा है। यूं तो मैं पहले से भी शैक्षिक यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज के माध्यम से अपनी शैक्षणिक गतिविधियां लोगों तो पहुंचाने के लिए क्रियाशील थी। इसके बेहतर परिणाम मुझे मिलते रहे हैं।

इस समय हमारे विद्यालय का ग्रुप बनाया गया है, जहां  अजय कुमार तथा श्रीमती वृन्दादेवी द्वारा गतिविधियां व होमवर्क का अभिभावकों तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। जो अभिभावक आनलाइन नहीं जुड़ पाए हैं, उनसे टेलिफोनिक जुड़े रहकर उन्हें कोरोना के प्रति अवेयर करने के साथ ही आनलाइन एजूकेशन से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हम सभी निरन्तर प्रयास में हैं कि इस ग्रुप से अधिक से अधिक अभिभावकों को जोड़ा जा सके, ताकि अधिक से अधिक बच्चे लाभान्वित हो सके।
 

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online class - फोटो : pixabay

शिक्षा क्षेत्र गड़वार के प्राथमिक विद्यालय बनकटा बगला के सहायक अध्यापक दयाशंकर यादव बताते हैं कि लाकडाउन में सभी विद्यालय बंद होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। इसी बीच अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई के लिए निर्देशित किया गया। मैंने प्रधानाध्यापक सत्यदेव यादव के सहयोग से अभिभावकों से सम्पर्क कर उनके मोबाइल नंबर एकत्रित किए।  

विद्यालय का व्हाट्सप्प समूह बनाया, जिसमें यथा संभव बच्चों को जोड़ कर प्रतिदिन पठन-पाठन का कार्य आरंभ किया। बच्चों को प्रतिदिन विषयवार पाठ योजनाबद्ध कुछ रोचक तथ्यों द्वारा शिक्षण कार्य किया जा रहा है। गृहकार्य का प्रतिदिन अवलोकन करके त्रुटियों और समस्याओं का समाधान किया जाता है।

वाट्सअप पर किए गके कार्यों का स्क्रीन शॉट लेकर, चेक करने के पश्चात दुबारा बच्चों को भेजा जाता है, जिससे गलतियों का निवारण हो सके। कभी-कभी वीडियो कॉल करके भी उनको पढ़ाया व समझाया जाता है। बच्चों को कुछ रोचक तथ्यों द्वारा मनोरंजन के लिए अंग्रेजी, हिंदी क़ी कविताओं को भी प्रेषित किया जाता है। कहानियां सुनाई जाती हैं। आज मैं अपने प्रधानाध्यापक व अध्यापक के सहयोग से यथासंभव ऑनलाइन क्लास चलाने में सफल हूं।

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