फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   shuddha pani pilane ka sarkari dava khokhala

शुद्ध जल पिलाने का सरकारी दावा खोखला

Tue, 06 Sep 2016 08:09 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया Updated Tue, 06 Sep 2016 08:09 PM IST
विज्ञापन
shuddha pani pilane ka sarkari dava khokhala
गंदे पानी की आपूर्ति - फोटो : अमर उजाला
पानी में घुला आर्सेनिक द्वाबा क्षेत्र के लोगों के लिए तो नासूर समस्या बना ही, अब शहरी क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं है। क्योंकि 70 फीट की बोरिंग से भी अब आर्सेनिकयुक्त पानी मिल रहा है। इसके मद्देनजर सरकार ने कई योजनाएं चलाईं, रिमुवल प्लांट, ट्रिटमेंट प्लांट फिर कुंओं का जीर्णोद्धार। पर अफसोस सरकार की एक भी योजनाएं धरातल पर मूर्त रूप नहीं ले पाई।
विज्ञापन


एक-आध योजनाएं यदि धरातल पर दिखी तो समुचित रखरखाव के अभाव में दम तोड़ चुकी हैं। ऐसे में जन मानस को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने का सरकारी दावा खोखला साबित हो रहा है।  वर्ष 2002 में जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता के प्रोफेसर दीपांकर चक्रवर्ती ने जनपद के बेलहरी ब्लॉक अंतर्गत उदवन छपरा, चौबे छपरा व तिवारी टोला में इंडिया मार्का हैंडपंप के जल में आर्सेनिक की मात्रा मानक से कई गुना अधिक पाई थी।
विज्ञापन


इसके बाद बीएचयू, पीजीआई लखनऊ, पीजीआई चंडीगढ़ और एम्स दिल्ली के चिकित्सकों ने पहुंचकर यहां के पानी के नमूने की जांच की और जांच में मानक से पांच गुना अधिक आर्सेनिक होने की पुष्टि की। सरकार ने इसपर गंभीरता बरतते हुए जनपद के 310 आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों में आर्सेनिक मुक्त जल उपलब्ध कराने के लिए 54 ओवर हेडटैंक, 450 आर्सेनिक रिमुवल प्लांट लगाए गए थे। लेकिन टंकियों के जल में भी आर्सेनिक की मात्रा कई गुना मिली तथा रख-रखाव के अभाव में आर्सेनिक रिमुवल प्लांट भी दम तोड़ चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद सपा सरकार ने 2013 में नई योजना के तहत कुओं के जीर्णोद्धार की योजना बनाई। पर  योजना ने धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ दिया और ठंडे बस्ते में चला गया। इसी क्रम में सात वर्ष पूर्व अर्थात बसपा की सरकार में हैदराबाद की टीम ने सुझाव दिया था कि गंगा ट्रीटमेंट प्लांट के तहत गंगा नदी के किनारे इंटक वेल बनाकर लोगों को शुद्ध जल मुहैया कराया जाय। लेकिन भारत सरकार ने कटान क्षेत्र होने के चलते इसे सिरे से खारिज कर दिया।   


 जनपद के 310 आर्सेनिक प्रभावित बस्तियों में आर्सेनिक मुक्त जल उपलब्ध कराने के लिए 54 ओवर हेडटैंक, 450 आर्सेनिक रिमुवल प्लांट लगाए गए थे। लेकिन टंकियों के जल में भी आर्सेनिक की मात्रा कई गुना मिली तथा रख-रखाव के अभाव में आर्सेनिक रिमुवल प्लांट भी दम तोड़ चुके हैं। 



आर्सेनिक युक्त जल पीने को मजबूर जनपदवासियों के सामने अब तरह-तरह के रोगों से निबटना गंभीर चुनौती बन गई है। अस्पताल के चर्म विभाग के आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो पिछले दस साल में जनपद में 30 फीसदी से अधिक चर्म की बीमारी की शिकायत आई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed