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मनचाहा आवास देने के लिए कई हथकंडे

Thu, 30 Nov 2017 11:34 PM IST
ballia
ballia Updated Thu, 30 Nov 2017 11:34 PM IST
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Several handcuffs to provide the desired accommodation
Prime Minister Accommodation Scheme - फोटो : google
जिले में संचालित प्रधानमंत्री आवास आवंटन में खूब गड़बड़झाला किया गया है। ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने मनचाहे लोगों को आवास देने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए हैं। विभिन्न ब्लाकों के कुल 560 लाभार्थियों को तो गांव का निवासी नहीं होने का जिक्र कर उन्हें आवास से वंचित कर दिया गया। मामले में पीडी ने भी बीडीओ को कारण बताओ नोटिस देते हुए पुन: सत्यापन करने का निर्देश दिया। लेकिन दो माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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2016-17 में केंद्र  सरकार ने इंदिरा आवास योजना के स्थान पर प्रधानमंत्री आवास योजना की शुुरुआत की। आवास आवंटन के लिए फूलप्रूफ व्यवस्था भी बनाई गई ताकि किसी अपात्र का चयन नहीं हो सके। लेकिन जिले में इस व्यवस्था को अधिकारियों और कर्मचारियों ने तार-तार कर दिया। प्रावधान किया गया कि सेक डाटा से संबंधित गांवों के लाभार्थियों की सूची को संबंधित ब्लाक के बीडीओ के लॉगिन भेजा जाएगा। इसके बाद इस सूची का सत्यापन ग्रामसभा की खुली बैठक में कराते हुए पात्रों का चयन किया जाएगा। सूची को गांव के पंचायत भवन आदि पर चस्पा भी किया जाएगा ताकि चयन में गड़बड़ी होने पर लाभार्थी शिकायत कर सकें। लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इस व्यवस्था के विपरीत कार्य किया गया। अधिकांश गांवों में तो खुली बैठक तक नहीं कराई नहीं कराई गई और सचिव, प्रधान, एडीओ, बीडीओ की मिलीभगत से मनमानी तरीके से लाभार्थियों का चयन कर लिया गया।
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इतना ही नहीं मनचाहे लाभार्थियों के चयन के लिए कर्मचारियों ने उपर के क्रम पर अंकित पात्रों को हटाने के लिए या तो गांव में नहीं रहते या फिर अज्ञात लिखकर खेल कर दिया। हालांकि इस तरह के करीब 560 मामले सामने आने पर डीआरडीए के पीडी ने सभी बीडीओ को पत्र भेजकर आपत्ति जताई और कारण बताते हुए इन पात्रों का सत्यापन करने को कहा। लेकिन बीडीओ ने न कोई कार्रवाई की और न ही पीडी व अन्य अधिकारियों ने ही इसकी सुधि ली। डीआरडीए की मानें तो इस तरह के मामले सबसे अधिक नवानगर के हैं। इसके अलावा सोहांव, दुबहड़, सीयर आदि ब्लाकों से भी इस तरह की सूची आई है।
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